छतरपुर में केन-बेतवा विस्थापितों में आक्रोश, किया प्रदर्शन:आदिवासी महिलाओं ने बांध निर्माण रुकवाया, प्रशासन पर लगाया मनमानी का आरोप
छतरपुर में केन-बेतवा विस्थापितों में आक्रोश, किया प्रदर्शन:आदिवासी महिलाओं ने बांध निर्माण रुकवाया, प्रशासन पर लगाया मनमानी का आरोप
छतरपुर में केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत बन रहे दौड़न बांध के निर्माण स्थल पर सैकड़ों आदिवासी महिलाओं ने प्रदर्शन किया। महिलाओं ने प्रशासन पर कानून का पालन न करने का आरोप लगाते हुए बांध का निर्माण कार्य रुकवा दिया। प्रदर्शनकारी महिलाओं का कहना है कि बांध का निर्माण बिना वैधानिक प्रक्रिया और वास्तविक ग्राम सभा की सहमति के किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन कानून के नाम पर फर्जी ग्राम सभाएं आयोजित कर रहा है और वास्तविक विस्थापितों की आवाज को दबाया जा रहा है। आदिवासी अधिकारों की लगातार हो रही अनदेखी महिलाओं ने यह भी आरोप लगाया कि जब वे शांतिपूर्ण ढंग से अपने संवैधानिक अधिकारों और कानून के पालन की मांग करती हैं, तो उनके विरोध प्रदर्शनों पर लाठीचार्ज किया जाता है। उनका कहना है कि एक ओर उनके घर-परिवार और आजीविका को प्रभावित करने वाले बांध का निर्माण अवैध रूप से जारी है। प्रदर्शनकारियों ने बांध निर्माण को लोकतंत्र और संविधान का अपहरण बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका यह संघर्ष किसी विकास परियोजना के खिलाफ नहीं, बल्कि कानून, अधिकार और सम्मान के लिए है। सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने इस अवसर पर कहा-केन-बेतवा परियोजना में प्रशासन पूरी तरह मनमानी पर उतारू है। कानून, संविधान और आदिवासी अधिकारों की लगातार अनदेखी की जा रही है। जब तक वैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं होगा और विस्थापितों को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक यह संघर्ष शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहेगा।
छतरपुर में केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत बन रहे दौड़न बांध के निर्माण स्थल पर सैकड़ों आदिवासी महिलाओं ने प्रदर्शन किया। महिलाओं ने प्रशासन पर कानून का पालन न करने का आरोप लगाते हुए बांध का निर्माण कार्य रुकवा दिया। प्रदर्शनकारी महिलाओं का कहना है कि बांध का निर्माण बिना वैधानिक प्रक्रिया और वास्तविक ग्राम सभा की सहमति के किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन कानून के नाम पर फर्जी ग्राम सभाएं आयोजित कर रहा है और वास्तविक विस्थापितों की आवाज को दबाया जा रहा है। आदिवासी अधिकारों की लगातार हो रही अनदेखी महिलाओं ने यह भी आरोप लगाया कि जब वे शांतिपूर्ण ढंग से अपने संवैधानिक अधिकारों और कानून के पालन की मांग करती हैं, तो उनके विरोध प्रदर्शनों पर लाठीचार्ज किया जाता है। उनका कहना है कि एक ओर उनके घर-परिवार और आजीविका को प्रभावित करने वाले बांध का निर्माण अवैध रूप से जारी है। प्रदर्शनकारियों ने बांध निर्माण को लोकतंत्र और संविधान का अपहरण बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका यह संघर्ष किसी विकास परियोजना के खिलाफ नहीं, बल्कि कानून, अधिकार और सम्मान के लिए है। सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने इस अवसर पर कहा-केन-बेतवा परियोजना में प्रशासन पूरी तरह मनमानी पर उतारू है। कानून, संविधान और आदिवासी अधिकारों की लगातार अनदेखी की जा रही है। जब तक वैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं होगा और विस्थापितों को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक यह संघर्ष शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहेगा।