मृत मिले बछड़ा के मामले में मालिक दोषमुक्त:गाय का दूध निकालने मवेशी के अवशेष उपयोग किए थे, अब 'कनछोई' परंपरा बंद

टीकमगढ़ में गौशाला में मृत बछड़े का सिर लटकाने के वीडियो मामले में यादव समाज ने बैठक की। कारस देव मंदिर परिसर में हुई इस पंचायत में समाज के पंचों ने पशु मालिक सतेंद्र यादव को गौ-हत्या के आरोपों से पूरी तरह पाक-साफ (दोषमुक्त) करार दिया है। कुछ दिनों पहले ग्राम परा खास के सतेंद्र यादव का एक वीडियो सामने आया था, जिसके बाद बजरंग दल के विरोध पर पुलिस ने उन पर पशु क्रूरता का केस दर्ज किया था। समाज की बैठक में खुलासा हुआ कि यह गौ-हत्या नहीं, बल्कि बरसों पुरानी 'कनछोई' नामक परंपरा थी। इस प्रथा में गाय का दूध निकालने में मदद के लिए मृत बछड़े के अवशेष का उपयोग किया जाता है। पंचों ने माना कि इस पुरानी रस्म को गलत तरीके से पेश किया गया, जिससे भ्रम फैला। पुरानी परंपरा पर लगी रोक बैठक में समाज के बुजुर्गों और पंचों ने एक बड़ा फैसला लेते हुए इस 'कनछोई' प्रथा को भविष्य के लिए पूरी तरह बंद करने का ऐलान किया है। समाज का कहना है कि बदलते समय और लोगों की भावनाओं को देखते हुए ऐसी प्रथाओं को खत्म करना ही ठीक है, ताकि आगे चलकर कोई विवाद या गलतफहमी पैदा न हो। समाज ने एकजुट होकर लिया फैसला पूर्व सरपंच वृंदावन यादव, ओमप्रकाश यादव और फूलचंद्र यादव समेत समाज के दर्जनों प्रमुख लोगों की मौजूदगी में सतेंद्र यादव को निर्दोष घोषित किया गया। समाज का मानना है कि सतेंद्र ने किसी क्रूरता के इरादे से नहीं, बल्कि केवल पुरानी लोक परंपरा का पालन किया था, जिसे अब समाज ने खुद ही त्यागने का निर्णय लिया है।

मृत मिले बछड़ा के मामले में मालिक दोषमुक्त:गाय का दूध निकालने मवेशी के अवशेष उपयोग किए थे, अब 'कनछोई' परंपरा बंद
टीकमगढ़ में गौशाला में मृत बछड़े का सिर लटकाने के वीडियो मामले में यादव समाज ने बैठक की। कारस देव मंदिर परिसर में हुई इस पंचायत में समाज के पंचों ने पशु मालिक सतेंद्र यादव को गौ-हत्या के आरोपों से पूरी तरह पाक-साफ (दोषमुक्त) करार दिया है। कुछ दिनों पहले ग्राम परा खास के सतेंद्र यादव का एक वीडियो सामने आया था, जिसके बाद बजरंग दल के विरोध पर पुलिस ने उन पर पशु क्रूरता का केस दर्ज किया था। समाज की बैठक में खुलासा हुआ कि यह गौ-हत्या नहीं, बल्कि बरसों पुरानी 'कनछोई' नामक परंपरा थी। इस प्रथा में गाय का दूध निकालने में मदद के लिए मृत बछड़े के अवशेष का उपयोग किया जाता है। पंचों ने माना कि इस पुरानी रस्म को गलत तरीके से पेश किया गया, जिससे भ्रम फैला। पुरानी परंपरा पर लगी रोक बैठक में समाज के बुजुर्गों और पंचों ने एक बड़ा फैसला लेते हुए इस 'कनछोई' प्रथा को भविष्य के लिए पूरी तरह बंद करने का ऐलान किया है। समाज का कहना है कि बदलते समय और लोगों की भावनाओं को देखते हुए ऐसी प्रथाओं को खत्म करना ही ठीक है, ताकि आगे चलकर कोई विवाद या गलतफहमी पैदा न हो। समाज ने एकजुट होकर लिया फैसला पूर्व सरपंच वृंदावन यादव, ओमप्रकाश यादव और फूलचंद्र यादव समेत समाज के दर्जनों प्रमुख लोगों की मौजूदगी में सतेंद्र यादव को निर्दोष घोषित किया गया। समाज का मानना है कि सतेंद्र ने किसी क्रूरता के इरादे से नहीं, बल्कि केवल पुरानी लोक परंपरा का पालन किया था, जिसे अब समाज ने खुद ही त्यागने का निर्णय लिया है।