मानसिक अस्वस्थ युवती 10 दिन बाद परिजनों से मिली:अनूपपुर पुलिस ने छत्तीसगढ़ से आए परिवार को सौंपा, हाथ पर गोदवाया नाम
मानसिक अस्वस्थ युवती 10 दिन बाद परिजनों से मिली:अनूपपुर पुलिस ने छत्तीसगढ़ से आए परिवार को सौंपा, हाथ पर गोदवाया नाम
अनूपपुर कोतवाली पुलिस ने सूझबूझ और सोशल मीडिया की मदद से एक मानसिक रूप से अस्वस्थ युवती को उसके परिवार से मिलवा दिया है। छत्तीसगढ़ के मरवाही से 10 दिन पहले भटकी यह युवती शुक्रवार को सही-सलामत अपने माता-पिता के पास पहुंच गई। थाना प्रभारी अरविंद जैन ने बताया कि गुरुवार (5 फरवरी) की रात डायल 112 को सूचना मिली थी कि अमरकंटक रोड पर जेल बिल्डिंग के पास एक 20 साल की युवती बेहाल हालत में भटक रही है। वह कुछ बोल-बता नहीं पा रही थी। पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और उसे सुरक्षित थाने के महिला डेस्क ले आई, जहां उसके रहने और खाने का इंतजाम किया गया। सोशल मीडिया ने मिलाया परिवार पुलिस ने युवती की फोटो सोशल मीडिया पर डाल दी, जो देखते ही देखते छत्तीसगढ़ के उसाड़ गांव (जिला जीपीएम) में उसके माता-पिता तक पहुंच गई। शुक्रवार को युवती के पिता शिवकुमार पाव थाने पहुंचे। उन्होंने बताया कि रामकली जन्म से ही बोल-सुन नहीं पाती है और 26 जनवरी से घर से लापता थी। घरवालों ने उसे हर जगह ढूंढा पर उसका कुछ पता नहीं चल रहा था। भविष्य के लिए उठाया खास कदम पुलिस अधीक्षक मोती उर रहमान ने युवती की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक अनोखी पहल की। उन्होंने युवती के हाथ पर उसका नाम, पता और घरवालों का मोबाइल नंबर गुदवा (टैटू बनवा) दिया है। पुलिस का मानना है कि अगर भविष्य में वह कभी दोबारा रास्ता भटकती है, तो कोई भी उसे देखकर तुरंत उसके परिवार से संपर्क कर सकेगा।
अनूपपुर कोतवाली पुलिस ने सूझबूझ और सोशल मीडिया की मदद से एक मानसिक रूप से अस्वस्थ युवती को उसके परिवार से मिलवा दिया है। छत्तीसगढ़ के मरवाही से 10 दिन पहले भटकी यह युवती शुक्रवार को सही-सलामत अपने माता-पिता के पास पहुंच गई। थाना प्रभारी अरविंद जैन ने बताया कि गुरुवार (5 फरवरी) की रात डायल 112 को सूचना मिली थी कि अमरकंटक रोड पर जेल बिल्डिंग के पास एक 20 साल की युवती बेहाल हालत में भटक रही है। वह कुछ बोल-बता नहीं पा रही थी। पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और उसे सुरक्षित थाने के महिला डेस्क ले आई, जहां उसके रहने और खाने का इंतजाम किया गया। सोशल मीडिया ने मिलाया परिवार पुलिस ने युवती की फोटो सोशल मीडिया पर डाल दी, जो देखते ही देखते छत्तीसगढ़ के उसाड़ गांव (जिला जीपीएम) में उसके माता-पिता तक पहुंच गई। शुक्रवार को युवती के पिता शिवकुमार पाव थाने पहुंचे। उन्होंने बताया कि रामकली जन्म से ही बोल-सुन नहीं पाती है और 26 जनवरी से घर से लापता थी। घरवालों ने उसे हर जगह ढूंढा पर उसका कुछ पता नहीं चल रहा था। भविष्य के लिए उठाया खास कदम पुलिस अधीक्षक मोती उर रहमान ने युवती की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक अनोखी पहल की। उन्होंने युवती के हाथ पर उसका नाम, पता और घरवालों का मोबाइल नंबर गुदवा (टैटू बनवा) दिया है। पुलिस का मानना है कि अगर भविष्य में वह कभी दोबारा रास्ता भटकती है, तो कोई भी उसे देखकर तुरंत उसके परिवार से संपर्क कर सकेगा।