मडिया बांध प्रभावितों ने मुआवजे और विस्थापन की मांग की:रायसेन में बोले- जमीनें डूबने से बेरोजगार हो गए

रायसेन जिले के बेगमगंज क्षेत्र अंतर्गत खजुरिया बरामद गढ़ी के दर्जनों किसानों और रहवासियों ने शुक्रवार को मड़िया बांध के डूब क्षेत्र में अपनी कृषि भूमि डूब जाने के बाद मुआवजे और विस्थापन की मांग की। इन प्रभावितों ने अपनी मांगों को लेकर एसडीएम को एक ज्ञापन सौंपा। यह किसान बीना बहुउद्देशीय सिंचाई परियोजना के तहत बनाए गए मड़िया बांध से प्रभावित हुए हैं। ज्ञापन के अनुसार, उनकी 85 से 100 प्रतिशत तक कृषि भूमि बांध के डूब क्षेत्र में आ गई है, जिससे वे बेरोजगार हो गए हैं। प्रभावितों ने बताया कि उनकी कृषि भूमि पूरी तरह से अधिगृहित कर ली गई है और अब उनके पास आय का कोई साधन नहीं बचा है। उनके मकान भी बांध में पानी भरने के बाद डूबने की आशंका है। बोले- जीवनयापन का कोई साधन नहीं रहवासियों के पास कृषि ही आय का एकमात्र स्रोत था। भूमि अधिग्रहण के बाद उनके पास जीवनयापन का कोई साधन नहीं है। यहां तक कि कृषि मजदूरी पर निर्भर लोग भी अब काम नहीं मिलने के कारण बेरोजगार हो गए हैं। ज्ञापन में कहा गया है कि वे सभी विस्थापन के लिए मजबूर हैं। उन्होंने शासन से मांग की कि खजुरिया बरामद गढ़ी के सभी रहवासियों का विस्थापन कराया जाए, उन्हें मकानों का मुआवजा दिया जाए और नए मकान बनाने के लिए जमीन उपलब्ध कराई जाए, ताकि उनकी आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित हो सके। इस संबंध में जाहर सिंह लोधी ने जानकारी दी।

मडिया बांध प्रभावितों ने मुआवजे और विस्थापन की मांग की:रायसेन में बोले- जमीनें डूबने से बेरोजगार हो गए
रायसेन जिले के बेगमगंज क्षेत्र अंतर्गत खजुरिया बरामद गढ़ी के दर्जनों किसानों और रहवासियों ने शुक्रवार को मड़िया बांध के डूब क्षेत्र में अपनी कृषि भूमि डूब जाने के बाद मुआवजे और विस्थापन की मांग की। इन प्रभावितों ने अपनी मांगों को लेकर एसडीएम को एक ज्ञापन सौंपा। यह किसान बीना बहुउद्देशीय सिंचाई परियोजना के तहत बनाए गए मड़िया बांध से प्रभावित हुए हैं। ज्ञापन के अनुसार, उनकी 85 से 100 प्रतिशत तक कृषि भूमि बांध के डूब क्षेत्र में आ गई है, जिससे वे बेरोजगार हो गए हैं। प्रभावितों ने बताया कि उनकी कृषि भूमि पूरी तरह से अधिगृहित कर ली गई है और अब उनके पास आय का कोई साधन नहीं बचा है। उनके मकान भी बांध में पानी भरने के बाद डूबने की आशंका है। बोले- जीवनयापन का कोई साधन नहीं रहवासियों के पास कृषि ही आय का एकमात्र स्रोत था। भूमि अधिग्रहण के बाद उनके पास जीवनयापन का कोई साधन नहीं है। यहां तक कि कृषि मजदूरी पर निर्भर लोग भी अब काम नहीं मिलने के कारण बेरोजगार हो गए हैं। ज्ञापन में कहा गया है कि वे सभी विस्थापन के लिए मजबूर हैं। उन्होंने शासन से मांग की कि खजुरिया बरामद गढ़ी के सभी रहवासियों का विस्थापन कराया जाए, उन्हें मकानों का मुआवजा दिया जाए और नए मकान बनाने के लिए जमीन उपलब्ध कराई जाए, ताकि उनकी आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित हो सके। इस संबंध में जाहर सिंह लोधी ने जानकारी दी।