तप में सुख-भोग में नहीं, यही सनातन संस्कृति का संदेश:प्रेमभूषण महाराज ने सुनाई श्रीराम कथा; केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह भी शामिल हुए
तप में सुख-भोग में नहीं, यही सनातन संस्कृति का संदेश:प्रेमभूषण महाराज ने सुनाई श्रीराम कथा; केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह भी शामिल हुए
दुनिया में केवल सनातन धर्म ही तप करने की उचित प्रेरणा देता है। हमारे लगभग सभी सद्ग्रंथ यही बताते हैं कि बिना तप के कुछ भी प्राप्त नहीं होता है। हमारी संस्कृति यह सिखाती है कि तप करने में ही सुख है, भोग में नहीं। मनुष्य की योनि तप करने के लिए ही है। जीव की बाकी की सभी योनियां भोग योनि कही जाती हैं। यह बातें सागर के रुद्राक्ष धाम में आयोजित सप्त दिवसीय श्रीराम कथा में पंडित प्रेमभूषण महाराज ने व्यासपीठ से कथा वाचन करते हुए कहीं। कथा के आखिरी दिन शुक्रवार को विशाल भंडारे का आयोजन किया गया है। साथ ही कथा में शामिल होने के लिए मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान सागर पहुंचे हैं। श्रीराम कथा में पंडित प्रेमभूषण महाराज ने कहा कि श्रद्धा में अर्पण और समर्पण हो तो श्रद्धा अवश्य फल प्रदान करती है। हम जो करते हैं उस पर हमें ही विश्वास नहीं होता है तो फिर कैसे भगवान का दर्शन होगा। खटपट मिटे तो झटपट दर्शन होगा। लाख कोई समझाए भटकना नहीं है जो इष्ट हैं उनमें केवट भैया और शबरी मैया की तरह से निष्ठ रहना है। सुग्रीव जी की तरह नहीं बनाना है। भगवान से मिलने के बाद भी संसार में लिपट कर भगवान को ही भूल गए।
मनुष्य अपनी बुद्धि को धर्म में लगाए
उन्होंने आगे कहा कि जीव को मानव शरीर स्वयं की पहचान करने और भगवान का भजन करने के लिए मिला होता है। जैसे-जैसे भगवान के भजन की ओर मनुष्य बढ़ता जाता है, संसार का भौतिक सुख उससे अपने आप दूर होता चला जाता है। वास्तव में संसार के भौतिक सुख का कोई मतलब नहीं होता है। यह बात मनुष्य को तब समाझ आती है जब उसका अपना शरीर अक्षम और रुग्ण हो चुका होता है। इसलिए मनुष्य का यह कर्तव्य बनता है कि वह अपनी बुद्धि को धर्म में लगाए। धर्म सम्मत जीवन जिए। भगवान ने स्वयं कहा है कि निर्मल मन जन सो मोहि पावा, मोहि कपट छल छिद्र न भावा, जिसका अर्थ है, मुझे (भगवान को) कपट, धोखा, छल और दूसरों में छिद्र (दोष/बुराई) खोजना पसंद नहीं है
कथा सबके भाग्य में नहीं होती है
उन्होंने कहा कि कथा सबके भाग्य में नहीं होती है। कथा तो मनुष्य के अपने-अपने पुण्य का परिणाम होती है। जो मनुष्य विषयों से स्वयं को दूर ले जाकर भगवान की ओर ले जाने का प्रयास करता है, वही पुण्य एकत्रित करने में सफल हो पाता है। स्नेहा समर्पण से प्राप्त होता है। जिसका जितना अधिक समर्पण होता है भगवान भी उसे उतना ही स्नेह करते हैं। जब हमारे स्वयं के समर्पण में कमी आती है तो हम किसी से भी स्नेह की अपेक्षा कैसे कर सकते हैं। ढाना हवाई पट्टी पर केंद्रीय मंत्री का स्वागत
श्रीराम कथा में शामिल होने के लिए शुक्रवार दोपहर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान सागर पहुंचे। वे ढाना हवाई पट्टी पर उतरे। जहां सागर विधायक शैलेंद्र जैन, देवरी विधायक बृजबिहारी पटेरिया, नरयावली विधायक प्रदीप लारिया समेत अन्य भाजपा के पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। जिसके बाद वे सड़क मार्ग से होते हुए रुद्राक्ष धाम पहुंचे और भगवान के दर्शन कर कथा में शामिल हुए।
दुनिया में केवल सनातन धर्म ही तप करने की उचित प्रेरणा देता है। हमारे लगभग सभी सद्ग्रंथ यही बताते हैं कि बिना तप के कुछ भी प्राप्त नहीं होता है। हमारी संस्कृति यह सिखाती है कि तप करने में ही सुख है, भोग में नहीं। मनुष्य की योनि तप करने के लिए ही है। जीव की बाकी की सभी योनियां भोग योनि कही जाती हैं। यह बातें सागर के रुद्राक्ष धाम में आयोजित सप्त दिवसीय श्रीराम कथा में पंडित प्रेमभूषण महाराज ने व्यासपीठ से कथा वाचन करते हुए कहीं। कथा के आखिरी दिन शुक्रवार को विशाल भंडारे का आयोजन किया गया है। साथ ही कथा में शामिल होने के लिए मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान सागर पहुंचे हैं। श्रीराम कथा में पंडित प्रेमभूषण महाराज ने कहा कि श्रद्धा में अर्पण और समर्पण हो तो श्रद्धा अवश्य फल प्रदान करती है। हम जो करते हैं उस पर हमें ही विश्वास नहीं होता है तो फिर कैसे भगवान का दर्शन होगा। खटपट मिटे तो झटपट दर्शन होगा। लाख कोई समझाए भटकना नहीं है जो इष्ट हैं उनमें केवट भैया और शबरी मैया की तरह से निष्ठ रहना है। सुग्रीव जी की तरह नहीं बनाना है। भगवान से मिलने के बाद भी संसार में लिपट कर भगवान को ही भूल गए।
मनुष्य अपनी बुद्धि को धर्म में लगाए
उन्होंने आगे कहा कि जीव को मानव शरीर स्वयं की पहचान करने और भगवान का भजन करने के लिए मिला होता है। जैसे-जैसे भगवान के भजन की ओर मनुष्य बढ़ता जाता है, संसार का भौतिक सुख उससे अपने आप दूर होता चला जाता है। वास्तव में संसार के भौतिक सुख का कोई मतलब नहीं होता है। यह बात मनुष्य को तब समाझ आती है जब उसका अपना शरीर अक्षम और रुग्ण हो चुका होता है। इसलिए मनुष्य का यह कर्तव्य बनता है कि वह अपनी बुद्धि को धर्म में लगाए। धर्म सम्मत जीवन जिए। भगवान ने स्वयं कहा है कि निर्मल मन जन सो मोहि पावा, मोहि कपट छल छिद्र न भावा, जिसका अर्थ है, मुझे (भगवान को) कपट, धोखा, छल और दूसरों में छिद्र (दोष/बुराई) खोजना पसंद नहीं है
कथा सबके भाग्य में नहीं होती है
उन्होंने कहा कि कथा सबके भाग्य में नहीं होती है। कथा तो मनुष्य के अपने-अपने पुण्य का परिणाम होती है। जो मनुष्य विषयों से स्वयं को दूर ले जाकर भगवान की ओर ले जाने का प्रयास करता है, वही पुण्य एकत्रित करने में सफल हो पाता है। स्नेहा समर्पण से प्राप्त होता है। जिसका जितना अधिक समर्पण होता है भगवान भी उसे उतना ही स्नेह करते हैं। जब हमारे स्वयं के समर्पण में कमी आती है तो हम किसी से भी स्नेह की अपेक्षा कैसे कर सकते हैं। ढाना हवाई पट्टी पर केंद्रीय मंत्री का स्वागत
श्रीराम कथा में शामिल होने के लिए शुक्रवार दोपहर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान सागर पहुंचे। वे ढाना हवाई पट्टी पर उतरे। जहां सागर विधायक शैलेंद्र जैन, देवरी विधायक बृजबिहारी पटेरिया, नरयावली विधायक प्रदीप लारिया समेत अन्य भाजपा के पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। जिसके बाद वे सड़क मार्ग से होते हुए रुद्राक्ष धाम पहुंचे और भगवान के दर्शन कर कथा में शामिल हुए।