CSJMU में 'एग्रीफेस्ट 2026' का आगाज:'फागुन की फुलवारी' में दिखेगी ग्रामीण संस्कृति और आधुनिक तकनीक की झलक

छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) के सीनेट लॉन में 13 और 14 फरवरी 2026 को दो दिवसीय 'एग्रीफेस्ट 2026 फागुन की फुलवारी' महोत्सव आयोजित होगा। इसका आयोजन विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ एडवांस्ड एग्रीकल्चर साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी द्वारा किया जा रहा है। महोत्सव की थीम 'माटी से उत्सव तक – Culture, Creativity, Games' है। कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक के मार्गदर्शन में आयोजित इस महोत्सव का मुख्य उद्देश्य भारतीय ग्रामीण परंपराओं को आधुनिक कृषि विज्ञान और प्रौद्योगिकी से जोड़ना है। यह आयोजन युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से परिचित कराने के साथ-साथ नवाचारों के लिए एक मंच भी प्रदान करेगा। महोत्सव में सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक खेलों का संगम देखने को मिलेगा। विश्वविद्यालय परिसर में ग्रामीण परिवेश की झलक दिखाई देगी। रस्साकशी, गिल्ली-डंडा और गोली-कंचा जैसे पारंपरिक खेलों की प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी, जिससे युवा पीढ़ी इन खेलों से जुड़ सकेगी। ग्रामीण संवाद को बढ़ावा देने के लिए 'चौपाल चबूतरा' पर कविता-पाठ और लोकगाथाओं के सत्र होंगे। 'बतरस' कार्यक्रम में हास्य-व्यंग्य और लोकसंवाद के माध्यम से आगंतुकों का मनोरंजन किया जाएगा। सांस्कृतिक कार्यक्रमों की कड़ी में 'फागुनिया थाप' के माध्यम से लोक नृत्य, समूह गायन और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की प्रस्तुतियाँ भी होंगी। संस्थान के निदेशक डॉ. हिमांशु त्रिवेदी ने बताया कि महोत्सव में 'ग्राम दर्पण' प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। इसमें किसानों और शोधार्थियों के लिए विभिन्न आधुनिक कृषि तकनीकें प्रदर्शित होंगी। इनमें बिना मिट्टी के खेती की हाइड्रोपोनिक्स तकनीक, युवाओं द्वारा विकसित कृषि स्टार्टअप मॉडल और पर्यावरण एवं गंगा संरक्षण से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं। महोत्सव में 'हाट जायका जंक्शन' भी स्थापित किया जाएगा। यहां स्थानीय हस्तशिल्प, ग्रामीण उत्पाद और पारंपरिक व्यंजनों के स्टॉल लगेंगे। इससे स्थानीय कारीगरों को प्रोत्साहन मिलेगा और आगंतुकों को ग्रामीण स्वाद व शिल्प का अनुभव प्राप्त होगा।

CSJMU में 'एग्रीफेस्ट 2026' का आगाज:'फागुन की फुलवारी' में दिखेगी ग्रामीण संस्कृति और आधुनिक तकनीक की झलक
छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) के सीनेट लॉन में 13 और 14 फरवरी 2026 को दो दिवसीय 'एग्रीफेस्ट 2026 फागुन की फुलवारी' महोत्सव आयोजित होगा। इसका आयोजन विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ एडवांस्ड एग्रीकल्चर साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी द्वारा किया जा रहा है। महोत्सव की थीम 'माटी से उत्सव तक – Culture, Creativity, Games' है। कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक के मार्गदर्शन में आयोजित इस महोत्सव का मुख्य उद्देश्य भारतीय ग्रामीण परंपराओं को आधुनिक कृषि विज्ञान और प्रौद्योगिकी से जोड़ना है। यह आयोजन युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से परिचित कराने के साथ-साथ नवाचारों के लिए एक मंच भी प्रदान करेगा। महोत्सव में सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक खेलों का संगम देखने को मिलेगा। विश्वविद्यालय परिसर में ग्रामीण परिवेश की झलक दिखाई देगी। रस्साकशी, गिल्ली-डंडा और गोली-कंचा जैसे पारंपरिक खेलों की प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी, जिससे युवा पीढ़ी इन खेलों से जुड़ सकेगी। ग्रामीण संवाद को बढ़ावा देने के लिए 'चौपाल चबूतरा' पर कविता-पाठ और लोकगाथाओं के सत्र होंगे। 'बतरस' कार्यक्रम में हास्य-व्यंग्य और लोकसंवाद के माध्यम से आगंतुकों का मनोरंजन किया जाएगा। सांस्कृतिक कार्यक्रमों की कड़ी में 'फागुनिया थाप' के माध्यम से लोक नृत्य, समूह गायन और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की प्रस्तुतियाँ भी होंगी। संस्थान के निदेशक डॉ. हिमांशु त्रिवेदी ने बताया कि महोत्सव में 'ग्राम दर्पण' प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। इसमें किसानों और शोधार्थियों के लिए विभिन्न आधुनिक कृषि तकनीकें प्रदर्शित होंगी। इनमें बिना मिट्टी के खेती की हाइड्रोपोनिक्स तकनीक, युवाओं द्वारा विकसित कृषि स्टार्टअप मॉडल और पर्यावरण एवं गंगा संरक्षण से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं। महोत्सव में 'हाट जायका जंक्शन' भी स्थापित किया जाएगा। यहां स्थानीय हस्तशिल्प, ग्रामीण उत्पाद और पारंपरिक व्यंजनों के स्टॉल लगेंगे। इससे स्थानीय कारीगरों को प्रोत्साहन मिलेगा और आगंतुकों को ग्रामीण स्वाद व शिल्प का अनुभव प्राप्त होगा।