सीधी जेल में पॉक्सो एक्ट के कैदी की संदिग्ध मौत:अधीक्षक बोले-पहले से खराब थी तबीयत; डॉक्टर बोले-अस्पताल लाने से 8 घंटे पहले हो चुकी थी मौत
सीधी जिला जेल में पॉक्सो एक्ट के तहत बंद कैदी रजनीश दुबे की शुक्रवार को संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। इस घटना के बाद जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं, खासकर मौत के समय को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। जेल प्रशासन बोला-पहले से कैदी की तबीयत खराब थई जेल अधीक्षक रविशंकर सिंह के अनुसार, कैदी रजनीश दुबे की तबीयत पहले से खराब थी और जेल में ही उसका इलाज चल रहा था। शुक्रवार दोपहर उसकी तबीयत बिगड़ी और रात करीब 9 बजे हालत गंभीर होने पर उसे जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। डॉक्टर बोले-अस्पताल लाने से करीब 8 घंटे पहले ही हो चुकी मौत जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. एस.बी. खरे के बयान ने मामले को नया मोड़ दे दिया है। उन्होंने बताया कि कैदी की मौत अस्पताल लाने से करीब 8 घंटे पहले ही हो चुकी थी। इस खुलासे के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं। अब यह सवाल उठ रहा है कि अगर कैदी की मौत पहले ही हो गई थी, तो उसे समय पर अस्पताल क्यों नहीं पहुंचाया गया। क्या इलाज में लापरवाही हुई या फिर घटना को छिपाने की कोशिश की गई। न्यायिक जांच के आदेश मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायिक जांच के आदेश दे दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही मौत के असली कारणों का खुलासा हो सकेगा। इस घटना के बाद जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। अब सभी की नजरें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे सच्चाई सामने आने की उम्मीद है।
सीधी जिला जेल में पॉक्सो एक्ट के तहत बंद कैदी रजनीश दुबे की शुक्रवार को संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। इस घटना के बाद जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं, खासकर मौत के समय को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। जेल प्रशासन बोला-पहले से कैदी की तबीयत खराब थई जेल अधीक्षक रविशंकर सिंह के अनुसार, कैदी रजनीश दुबे की तबीयत पहले से खराब थी और जेल में ही उसका इलाज चल रहा था। शुक्रवार दोपहर उसकी तबीयत बिगड़ी और रात करीब 9 बजे हालत गंभीर होने पर उसे जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। डॉक्टर बोले-अस्पताल लाने से करीब 8 घंटे पहले ही हो चुकी मौत जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. एस.बी. खरे के बयान ने मामले को नया मोड़ दे दिया है। उन्होंने बताया कि कैदी की मौत अस्पताल लाने से करीब 8 घंटे पहले ही हो चुकी थी। इस खुलासे के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं। अब यह सवाल उठ रहा है कि अगर कैदी की मौत पहले ही हो गई थी, तो उसे समय पर अस्पताल क्यों नहीं पहुंचाया गया। क्या इलाज में लापरवाही हुई या फिर घटना को छिपाने की कोशिश की गई। न्यायिक जांच के आदेश मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायिक जांच के आदेश दे दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही मौत के असली कारणों का खुलासा हो सकेगा। इस घटना के बाद जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। अब सभी की नजरें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे सच्चाई सामने आने की उम्मीद है।