आउटसोर्स कर्मचारियों का प्रदर्शन अब 30 अप्रैल को:3 से 8 हजार पाने वाले अस्थायी, ठेका श्रमिक कर्मचारियों का आंदोलन भोपाल में होगा
भोपाल में अस्थायी, ठेका और आउटसोर्स कर्मचारियों का प्रस्तावित सांकेतिक सामूहिक आत्मदाह आंदोलन अब 28 की बजाय 30 अप्रैल को होगा। भोपाल पुलिस कमिश्नर द्वारा अनुमति नहीं दिए जाने के चलते आंदोलन की तारीख बदली गई है। कर्मचारी अब नीलम पार्क में प्रदर्शन कर सरकार के सामने अपनी मांगें रखेंगे। यह आंदोलन सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम मजदूरी 12,425 से बढ़ाकर 16,769 रुपए प्रति माह लागू करने और इसका सख्ती से पालन सुनिश्चित कराने की मांग को लेकर किया जा रहा है। कर्मचारियों का आरोप है कि केंद्र सरकार के तय मानकों के बावजूद राज्य के कई विभागों में 3 से 5 हजार रुपए महीने में काम कराया जा रहा है। कर्मचारियों की मांग है कि सरकार न्यूनतम वेतन की गारंटी ले और इसे बढ़ाकर 26 हजार रुपए प्रति माह किया जाए। अस्थायी, आउटसोर्स कर्मचारी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष वासुदेव शर्मा ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को पत्र लिखकर आंदोलन की सूचना दे दी है। 50 हजार आवेदन के बाद भी सुनवाई नहीं कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें सरकार तक पहुंचा रहे हैं और अब तक 50 हजार से अधिक आवेदन दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद सुनवाई नहीं होने पर उन्होंने आंदोलन का रास्ता चुना है। “घुट-घुटकर जीने को मजबूर” मोर्चा का आरोप है कि ठेकेदारों और अधिकारियों की प्रताड़ना के बीच कर्मचारी घुट-घुटकर जीवन जीने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि ये वही कर्मचारी हैं, जो सरकार की योजनाओं को जमीन पर लागू करते हैं। कर्मचारियों ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को लिखे पत्र में यह भी कहा कि 2023 विधानसभा चुनाव में पार्टी को मिले वोटों में उनका भी योगदान है, इसलिए अब वे अपने “वोट का हिसाब” मांगने भाजपा कार्यालय के सामने पहुंचेंगे। कई विभागों में न्यूनतम वेतन से भी कम वेतन अस्थायी और आउटसोर्स कर्मचारियों ने बताया कि अलग-अलग विभागों में उन्हें न्यूनतम वेतन से भी काफी कम भुगतान किया जा रहा है। इसके अलावा औद्योगिक क्षेत्रों, पावर प्लांट और सीमेंट उद्योगों में भी ठेका श्रमिकों को पूरी न्यूनतम मजदूरी नहीं मिलने का आरोप है।
भोपाल में अस्थायी, ठेका और आउटसोर्स कर्मचारियों का प्रस्तावित सांकेतिक सामूहिक आत्मदाह आंदोलन अब 28 की बजाय 30 अप्रैल को होगा। भोपाल पुलिस कमिश्नर द्वारा अनुमति नहीं दिए जाने के चलते आंदोलन की तारीख बदली गई है। कर्मचारी अब नीलम पार्क में प्रदर्शन कर सरकार के सामने अपनी मांगें रखेंगे। यह आंदोलन सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम मजदूरी 12,425 से बढ़ाकर 16,769 रुपए प्रति माह लागू करने और इसका सख्ती से पालन सुनिश्चित कराने की मांग को लेकर किया जा रहा है। कर्मचारियों का आरोप है कि केंद्र सरकार के तय मानकों के बावजूद राज्य के कई विभागों में 3 से 5 हजार रुपए महीने में काम कराया जा रहा है। कर्मचारियों की मांग है कि सरकार न्यूनतम वेतन की गारंटी ले और इसे बढ़ाकर 26 हजार रुपए प्रति माह किया जाए। अस्थायी, आउटसोर्स कर्मचारी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष वासुदेव शर्मा ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को पत्र लिखकर आंदोलन की सूचना दे दी है। 50 हजार आवेदन के बाद भी सुनवाई नहीं कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें सरकार तक पहुंचा रहे हैं और अब तक 50 हजार से अधिक आवेदन दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद सुनवाई नहीं होने पर उन्होंने आंदोलन का रास्ता चुना है। “घुट-घुटकर जीने को मजबूर” मोर्चा का आरोप है कि ठेकेदारों और अधिकारियों की प्रताड़ना के बीच कर्मचारी घुट-घुटकर जीवन जीने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि ये वही कर्मचारी हैं, जो सरकार की योजनाओं को जमीन पर लागू करते हैं। कर्मचारियों ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को लिखे पत्र में यह भी कहा कि 2023 विधानसभा चुनाव में पार्टी को मिले वोटों में उनका भी योगदान है, इसलिए अब वे अपने “वोट का हिसाब” मांगने भाजपा कार्यालय के सामने पहुंचेंगे। कई विभागों में न्यूनतम वेतन से भी कम वेतन अस्थायी और आउटसोर्स कर्मचारियों ने बताया कि अलग-अलग विभागों में उन्हें न्यूनतम वेतन से भी काफी कम भुगतान किया जा रहा है। इसके अलावा औद्योगिक क्षेत्रों, पावर प्लांट और सीमेंट उद्योगों में भी ठेका श्रमिकों को पूरी न्यूनतम मजदूरी नहीं मिलने का आरोप है।