गौ सम्मान आह्वान के तहत साधु-संतों ने निकाली रैली:गौ वधशाला लाइसेंस रद्द करने; गौ हत्या पर प्रतिबंध की मांग पर दिया ज्ञापन
टीकमगढ़ में सोमवार को 'गौ सम्मान आह्वान अभियान' के तहत साधु-संतों और गौ सेवकों ने एक रैली निकाली। प्रदर्शनकारियों ने कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचकर प्रधानमंत्री के नाम एक ज्ञापन दिया। इसमें देश में गौ वध पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है। इस दौरान, 6 सूत्रीय मांगों को लेकर तहसीलदार सत्येंद्र सिंह गुर्जर को भी एक ज्ञापन दिया गया। ज्ञापन में विशेष रूप से सभी गौ वधशालाओं के लाइसेंस रद्द करने और उन पर कठोर कार्रवाई करने की मांग की गई है। गौरक्षा के लिए कानून बनाने की मांग अभियान के जिला प्रभारी सुदीप मिश्रा ने बताया कि पूरे भारत में अखिल वेदलक्षणा गोमाता की विधिवत सेवा, पूर्ण सुरक्षा और राष्ट्रीय सम्मान सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय कानून बनाने की मांग की जा रही है। इसके साथ ही, एक गौ पालन मंत्रालय स्थापित करने की भी अपील की गई है। ज्ञापन के माध्यम से केंद्र सरकार से संविधान के अनुच्छेद 48 में आवश्यक संशोधन कर 'केंद्रीय गौ सेवा एवं संरक्षण अधिनियम' लागू करने की अपील की गई है। इसमें एक स्वतंत्र 'केंद्रीय गौ सेवा मंत्रालय' और स्पेशल टास्क फोर्स के गठन का भी प्रस्ताव शामिल है। गोवंश को 'राष्ट्रमाता' दिलाने के नाम पर दिया ज्ञापन देशी गोवंश को 'राष्ट्रमाता' या 'राष्ट्र आराध्या' के रूप में संवैधानिक मान्यता प्रदान कर विशेष राष्ट्रीय संरक्षण देने की मांग भी की गई है। गौ तस्करी और गौ वध को संज्ञेय एवं गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में रखकर आजीवन कारावास तथा दोषियों की संपत्ति कुर्क करने जैसे कठोर विधिक प्रावधानों की मांग भी ज्ञापन में शामिल है। इसके अलावा, देशी गोवंश को प्राकृतिक कृषि के लिए जैविक खाद, कीटनाशक और औषधि के रूप में सरकारी खरीद तंत्र से जोड़ने की मांग भी की गई है। स्कूलों के 'मिड-डे मील' और मंदिरों के 'प्रसाद' में केवल देशी गौ-घृत व दुग्ध का उपयोग अनिवार्य करने की अपील भी की गई है। जिला स्तर पर न्यूनतम एक 'आदर्श गौ अभ्यारण्य' या 'वृहद् गौशाला' की स्थापना अनिवार्य करने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है। 'गो-वाहिनी एम्बुलेंस' व्यवस्था की मांग राष्ट्रीय व राजमार्गों पर प्रति 50 से 100 किमी पर 'गो-वाहिनी एम्बुलेंस' और 150 से 200 किमी के अंतराल पर आधुनिक ट्रॉमा सेंटरों की व्यवस्था हो। ताकि दुर्घटनाग्रस्त गोवंश को तत्काल उपचार मिल सकें।
स्कूली पाठ्यक्रमों में 'गो-विज्ञान' को अनिवार्य विषय के रूप में शामिल किया जाए। ताकि भावी पीढ़ी गोवंश के आध्यात्मिक, वैज्ञानिक, औषधीय और आर्थिक महत्व को समझ सके। एक सुदृढ़ 'चारा सुरक्षा कानून बनाकर चारे के औद्योगिक उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगे। चारे के अवैध भण्डारण एवं अनियंत्रित मूल्य वृद्धि को रोका जाए। साथ ही समस्त गोचर, ओरण और वन भूमियों को अतिक्रमण मुक्त कर 'गोचर विकास बोर्ड' के अधीन आरक्षित किया जाए। जिससे गोवंश के वर्षभर गोचारण की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। इस मौके पर संत सुधीर मिश्रा, राजेंद्र तिवारी, नीतू द्विवेदी, संजय नायक, महेंद्र द्विवेदी, राजेंद्र मिश्रा, महेंद्र द्विवेदी, संतोष पटेरिया, संध्या सोनी, राहुल तिवारी सहित बड़ी संख्या में शहर के लोग मौजूद रहे।
टीकमगढ़ में सोमवार को 'गौ सम्मान आह्वान अभियान' के तहत साधु-संतों और गौ सेवकों ने एक रैली निकाली। प्रदर्शनकारियों ने कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचकर प्रधानमंत्री के नाम एक ज्ञापन दिया। इसमें देश में गौ वध पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है। इस दौरान, 6 सूत्रीय मांगों को लेकर तहसीलदार सत्येंद्र सिंह गुर्जर को भी एक ज्ञापन दिया गया। ज्ञापन में विशेष रूप से सभी गौ वधशालाओं के लाइसेंस रद्द करने और उन पर कठोर कार्रवाई करने की मांग की गई है। गौरक्षा के लिए कानून बनाने की मांग अभियान के जिला प्रभारी सुदीप मिश्रा ने बताया कि पूरे भारत में अखिल वेदलक्षणा गोमाता की विधिवत सेवा, पूर्ण सुरक्षा और राष्ट्रीय सम्मान सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय कानून बनाने की मांग की जा रही है। इसके साथ ही, एक गौ पालन मंत्रालय स्थापित करने की भी अपील की गई है। ज्ञापन के माध्यम से केंद्र सरकार से संविधान के अनुच्छेद 48 में आवश्यक संशोधन कर 'केंद्रीय गौ सेवा एवं संरक्षण अधिनियम' लागू करने की अपील की गई है। इसमें एक स्वतंत्र 'केंद्रीय गौ सेवा मंत्रालय' और स्पेशल टास्क फोर्स के गठन का भी प्रस्ताव शामिल है। गोवंश को 'राष्ट्रमाता' दिलाने के नाम पर दिया ज्ञापन देशी गोवंश को 'राष्ट्रमाता' या 'राष्ट्र आराध्या' के रूप में संवैधानिक मान्यता प्रदान कर विशेष राष्ट्रीय संरक्षण देने की मांग भी की गई है। गौ तस्करी और गौ वध को संज्ञेय एवं गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में रखकर आजीवन कारावास तथा दोषियों की संपत्ति कुर्क करने जैसे कठोर विधिक प्रावधानों की मांग भी ज्ञापन में शामिल है। इसके अलावा, देशी गोवंश को प्राकृतिक कृषि के लिए जैविक खाद, कीटनाशक और औषधि के रूप में सरकारी खरीद तंत्र से जोड़ने की मांग भी की गई है। स्कूलों के 'मिड-डे मील' और मंदिरों के 'प्रसाद' में केवल देशी गौ-घृत व दुग्ध का उपयोग अनिवार्य करने की अपील भी की गई है। जिला स्तर पर न्यूनतम एक 'आदर्श गौ अभ्यारण्य' या 'वृहद् गौशाला' की स्थापना अनिवार्य करने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है। 'गो-वाहिनी एम्बुलेंस' व्यवस्था की मांग राष्ट्रीय व राजमार्गों पर प्रति 50 से 100 किमी पर 'गो-वाहिनी एम्बुलेंस' और 150 से 200 किमी के अंतराल पर आधुनिक ट्रॉमा सेंटरों की व्यवस्था हो। ताकि दुर्घटनाग्रस्त गोवंश को तत्काल उपचार मिल सकें।
स्कूली पाठ्यक्रमों में 'गो-विज्ञान' को अनिवार्य विषय के रूप में शामिल किया जाए। ताकि भावी पीढ़ी गोवंश के आध्यात्मिक, वैज्ञानिक, औषधीय और आर्थिक महत्व को समझ सके। एक सुदृढ़ 'चारा सुरक्षा कानून बनाकर चारे के औद्योगिक उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगे। चारे के अवैध भण्डारण एवं अनियंत्रित मूल्य वृद्धि को रोका जाए। साथ ही समस्त गोचर, ओरण और वन भूमियों को अतिक्रमण मुक्त कर 'गोचर विकास बोर्ड' के अधीन आरक्षित किया जाए। जिससे गोवंश के वर्षभर गोचारण की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। इस मौके पर संत सुधीर मिश्रा, राजेंद्र तिवारी, नीतू द्विवेदी, संजय नायक, महेंद्र द्विवेदी, राजेंद्र मिश्रा, महेंद्र द्विवेदी, संतोष पटेरिया, संध्या सोनी, राहुल तिवारी सहित बड़ी संख्या में शहर के लोग मौजूद रहे।