सांभर को लाड़-दुलार करने पर एसटीआर अधिकारी निलंबित:पोहा खाते सांभर को सहला रहे थे, खुद ने वीडियो किया था शेयर
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के बोरी सहायक संचालक (एसडीओ) विनोद वर्मा को सांभर हिरण के बच्चे के साथ अनुचित व्यवहार करने के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें वे सांभर के बच्चे को सहलाते हुए और उसके पास भोजन की प्लेट रखे दिखाई दे रहे थे। 24 जून को वीडियो सामने आने के बाद सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा ने तत्काल कार्रवाई करते हुए निलंबन के आदेश जारी किए। वीडियो वायरल होने के बाद हुई कार्रवाई विनोद वर्मा सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के बोरी अनुभाग में सहायक संचालक के पद पर पदस्थ हैं। कुछ दिन पहले उन्होंने खुद ही अपना वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया था। वीडियो वायरल होने के बाद उनके आचरण पर सवाल उठे, जिसके बाद विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। आदेश में घोर लापरवाही और असंवेदनशीलता का उल्लेख फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा की ओर से जारी निलंबन आदेश में कहा गया है कि विनोद वर्मा को एक जंगली जानवर यानी सांभर हिरण के साथ अनुचित व्यवहार करते हुए देखा गया। आदेश के अनुसार उनका आचरण सरकारी अधिकारी के रूप में कर्तव्यों के निर्वहन में घोर लापरवाही और असंवेदनशीलता को दर्शाता है। इसे मध्य प्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम-3 का उल्लंघन माना गया है। निलंबन अवधि में पिपरिया रहेगा मुख्यालय आदेश में मध्य प्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के नियम 9(1) के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए विनोद वर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के सहायक निदेशक कार्यालय, पिपरिया रहेगा। साथ ही उन्हें फील्ड डायरेक्टर की पूर्व अनुमति के बिना मुख्यालय छोड़ने की अनुमति नहीं होगी। वीडियो में क्या दिखाई दिया वायरल वीडियो में विनोद वर्मा चूरना वन रेंज के अंदर कुर्सी पर बैठकर पोहा खाते हुए नजर आ रहे हैं। इसी दौरान एक सांभर का बच्चा उनके पास आ जाता है। वीडियो में वे सांभर को सहलाते और दुलार करते दिखाई देते हैं। साथ ही सांभर का मुंह उनकी पोहे की प्लेट के पास तक पहुंचता हुआ भी दिखाई देता है। इसी वीडियो को लेकर विवाद खड़ा हुआ। वन्यजीव विशेषज्ञ ने उठाए सवाल वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट अजय दुबे ने इस घटना की आलोचना करते हुए कहा कि किसी भी जंगली जानवर को अनावश्यक रूप से खाना खिलाना या उसे छूना नहीं चाहिए। उनका कहना है कि लगातार मानव संपर्क से जंगली जानवर इंसानों पर निर्भर होने लगते हैं और उनका प्राकृतिक भय खत्म होने लगता है। इससे वे भोजन की तलाश में गांवों और सड़कों तक पहुंच सकते हैं, जहां दुर्घटना, शिकार और मानव-वन्यजीव संघर्ष का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि मानव भोजन और निकट संपर्क वन्यजीवों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई की मांग अजय दुबे ने सवाल उठाया कि क्या इस मामले में विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई के अलावा वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत भी कार्रवाई की जानी चाहिए। उनका कहना है कि इस तरह की घटनाओं को गंभीरता से लिया जाना जरूरी है, ताकि वन्यजीवों के प्राकृतिक व्यवहार पर प्रतिकूल असर न पड़े। एसडीओ बोले- मैं सांभर को पोहा नहीं खिला रहा था मामले पर सहायक संचालक विनोद वर्मा ने अपना पक्ष भी रखा है। उनका कहना है कि वे सांभर को पोहा नहीं खिला रहे थे, बल्कि खुद पोहा खा रहे थे। उनके अनुसार वे केवल सांभर के बच्चे को दुलार कर रहे थे। इसी दौरान सांभर का मुंह उनकी पोहे की प्लेट तक पहुंच गया था, लेकिन उसने पोहा नहीं खाया।
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के बोरी सहायक संचालक (एसडीओ) विनोद वर्मा को सांभर हिरण के बच्चे के साथ अनुचित व्यवहार करने के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें वे सांभर के बच्चे को सहलाते हुए और उसके पास भोजन की प्लेट रखे दिखाई दे रहे थे। 24 जून को वीडियो सामने आने के बाद सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा ने तत्काल कार्रवाई करते हुए निलंबन के आदेश जारी किए। वीडियो वायरल होने के बाद हुई कार्रवाई विनोद वर्मा सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के बोरी अनुभाग में सहायक संचालक के पद पर पदस्थ हैं। कुछ दिन पहले उन्होंने खुद ही अपना वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया था। वीडियो वायरल होने के बाद उनके आचरण पर सवाल उठे, जिसके बाद विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। आदेश में घोर लापरवाही और असंवेदनशीलता का उल्लेख फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा की ओर से जारी निलंबन आदेश में कहा गया है कि विनोद वर्मा को एक जंगली जानवर यानी सांभर हिरण के साथ अनुचित व्यवहार करते हुए देखा गया। आदेश के अनुसार उनका आचरण सरकारी अधिकारी के रूप में कर्तव्यों के निर्वहन में घोर लापरवाही और असंवेदनशीलता को दर्शाता है। इसे मध्य प्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम-3 का उल्लंघन माना गया है। निलंबन अवधि में पिपरिया रहेगा मुख्यालय आदेश में मध्य प्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के नियम 9(1) के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए विनोद वर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के सहायक निदेशक कार्यालय, पिपरिया रहेगा। साथ ही उन्हें फील्ड डायरेक्टर की पूर्व अनुमति के बिना मुख्यालय छोड़ने की अनुमति नहीं होगी। वीडियो में क्या दिखाई दिया वायरल वीडियो में विनोद वर्मा चूरना वन रेंज के अंदर कुर्सी पर बैठकर पोहा खाते हुए नजर आ रहे हैं। इसी दौरान एक सांभर का बच्चा उनके पास आ जाता है। वीडियो में वे सांभर को सहलाते और दुलार करते दिखाई देते हैं। साथ ही सांभर का मुंह उनकी पोहे की प्लेट के पास तक पहुंचता हुआ भी दिखाई देता है। इसी वीडियो को लेकर विवाद खड़ा हुआ। वन्यजीव विशेषज्ञ ने उठाए सवाल वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट अजय दुबे ने इस घटना की आलोचना करते हुए कहा कि किसी भी जंगली जानवर को अनावश्यक रूप से खाना खिलाना या उसे छूना नहीं चाहिए। उनका कहना है कि लगातार मानव संपर्क से जंगली जानवर इंसानों पर निर्भर होने लगते हैं और उनका प्राकृतिक भय खत्म होने लगता है। इससे वे भोजन की तलाश में गांवों और सड़कों तक पहुंच सकते हैं, जहां दुर्घटना, शिकार और मानव-वन्यजीव संघर्ष का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि मानव भोजन और निकट संपर्क वन्यजीवों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई की मांग अजय दुबे ने सवाल उठाया कि क्या इस मामले में विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई के अलावा वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत भी कार्रवाई की जानी चाहिए। उनका कहना है कि इस तरह की घटनाओं को गंभीरता से लिया जाना जरूरी है, ताकि वन्यजीवों के प्राकृतिक व्यवहार पर प्रतिकूल असर न पड़े। एसडीओ बोले- मैं सांभर को पोहा नहीं खिला रहा था मामले पर सहायक संचालक विनोद वर्मा ने अपना पक्ष भी रखा है। उनका कहना है कि वे सांभर को पोहा नहीं खिला रहे थे, बल्कि खुद पोहा खा रहे थे। उनके अनुसार वे केवल सांभर के बच्चे को दुलार कर रहे थे। इसी दौरान सांभर का मुंह उनकी पोहे की प्लेट तक पहुंच गया था, लेकिन उसने पोहा नहीं खाया।