मानसून में 3 महीने बंद रहेगा सतपुड़ा का कोर एरिया:मढ़ई-चूरना में जंगल सफारी पर रोक; 500 कर्मचारी नाव और हाथियों से करेंगे पेट्रोलिंग
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (STR) का कोर क्षेत्र 1 जुलाई से पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया है। मानसून के कारण मढ़ई और चूरना कोर क्षेत्र में 30 सितंबर तक जंगल सफारी पर पूरी तरह रोक रहेगी। 30 जून को इस सीजन की आखिरी सफारी हुई, जिसके बाद गेट बंद कर दिए गए। अब 1 अक्टूबर से पर्यटक एक बार फिर कोर क्षेत्र में सफारी का आनंद ले सकेंगे। बारिश के इन तीन महीनों के दौरान बाघों और अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए निगरानी व्यवस्था पहले से ज्यादा मजबूत की गई है। जिन डूब क्षेत्रों में बारिश का पानी भर जाता है, वहां वन विभाग की टीम नाव के जरिए पेट्रोलिंग करेगी। इसके अलावा, जंगल के हर हिस्से पर नजर रखने के लिए हाथियों की मदद से भी नियमित गश्त की जाएगी। 500 कर्मचारी करेंगे निगरानी, लगेंगे कैमरे एसटीआर की डिप्टी डायरेक्टर ऋषिभा नेताम ने बताया कि 500 से अधिक अधिकारी और कर्मचारी जंगल में गश्त करेंगे। सभी बीटों में पैदल गश्ती बढ़ाई जाएगी। जिन संवेदनशील क्षेत्रों में बाघों की आवाजाही ज्यादा रहती है, वहां विशेष निगरानी रखी जाएगी और जरूरत पड़ने पर सीसीटीवी कैमरे भी लगाए जाएंगे। आखिरी सफारी में बाघ न दिखने से मायूस हुए पर्यटक सीजन के आखिरी दिन 30 जून को जंगल सफारी करने गए पर्यटकों को बाघ के दीदार नहीं हुए, जिससे वे मायूस होकर लौटे। हालांकि, उन्हें बायसन, सांभर, चीतल और भालू दिखाई दिए। शाम 6:30 बजे सफारी से लौटे इन पर्यटकों को कामती रेंजर राहुल उपाध्याय, मढ़ई प्रभारी अनिल मालवीय और स्टाफ ने माला पहनाकर विदा किया। बफर जोन में चालू रहेगी नाइट सफारी कोर क्षेत्र बंद रहने के बावजूद एसटीआर के बफर क्षेत्र में पूरे साल पर्यटन जारी रहेगा। यहां पर्यटक जंगल सफारी के साथ-साथ नाइट सफारी का भी लुत्फ उठा सकेंगे। वर्तमान में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व 70 से अधिक बाघों का बसेरा है, इसके अलावा यहां पैंथर, नीलगाय और बारहसिंगा जैसे कई अन्य वन्यजीव भी मौजूद हैं।
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (STR) का कोर क्षेत्र 1 जुलाई से पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया है। मानसून के कारण मढ़ई और चूरना कोर क्षेत्र में 30 सितंबर तक जंगल सफारी पर पूरी तरह रोक रहेगी। 30 जून को इस सीजन की आखिरी सफारी हुई, जिसके बाद गेट बंद कर दिए गए। अब 1 अक्टूबर से पर्यटक एक बार फिर कोर क्षेत्र में सफारी का आनंद ले सकेंगे। बारिश के इन तीन महीनों के दौरान बाघों और अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए निगरानी व्यवस्था पहले से ज्यादा मजबूत की गई है। जिन डूब क्षेत्रों में बारिश का पानी भर जाता है, वहां वन विभाग की टीम नाव के जरिए पेट्रोलिंग करेगी। इसके अलावा, जंगल के हर हिस्से पर नजर रखने के लिए हाथियों की मदद से भी नियमित गश्त की जाएगी। 500 कर्मचारी करेंगे निगरानी, लगेंगे कैमरे एसटीआर की डिप्टी डायरेक्टर ऋषिभा नेताम ने बताया कि 500 से अधिक अधिकारी और कर्मचारी जंगल में गश्त करेंगे। सभी बीटों में पैदल गश्ती बढ़ाई जाएगी। जिन संवेदनशील क्षेत्रों में बाघों की आवाजाही ज्यादा रहती है, वहां विशेष निगरानी रखी जाएगी और जरूरत पड़ने पर सीसीटीवी कैमरे भी लगाए जाएंगे। आखिरी सफारी में बाघ न दिखने से मायूस हुए पर्यटक सीजन के आखिरी दिन 30 जून को जंगल सफारी करने गए पर्यटकों को बाघ के दीदार नहीं हुए, जिससे वे मायूस होकर लौटे। हालांकि, उन्हें बायसन, सांभर, चीतल और भालू दिखाई दिए। शाम 6:30 बजे सफारी से लौटे इन पर्यटकों को कामती रेंजर राहुल उपाध्याय, मढ़ई प्रभारी अनिल मालवीय और स्टाफ ने माला पहनाकर विदा किया। बफर जोन में चालू रहेगी नाइट सफारी कोर क्षेत्र बंद रहने के बावजूद एसटीआर के बफर क्षेत्र में पूरे साल पर्यटन जारी रहेगा। यहां पर्यटक जंगल सफारी के साथ-साथ नाइट सफारी का भी लुत्फ उठा सकेंगे। वर्तमान में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व 70 से अधिक बाघों का बसेरा है, इसके अलावा यहां पैंथर, नीलगाय और बारहसिंगा जैसे कई अन्य वन्यजीव भी मौजूद हैं।