बड़ा तालाब की 50 मीटर परिधि पर विवाद:निगम के दो सहायक यंत्रियों पर गिरी गाज, आयुक्त ने जारी किया कारण बताओ नोटिस
भोजवेटलैंड क्षेत्र में 50 मीटर परिधि के सीमांकन को लेकर नगर निगम ने अपने ही दो अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने भवन अनुज्ञा शाखा के सहायक यंत्री प्रदीप कुमार जड़िया और झील संरक्षण प्रकोष्ठ के तत्कालीन सहायक यंत्री आदित्य खरे को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। दोनों अधिकारियों पर आरोप है कि सीमांकन के दौरान तैयार पंचनामे में रिकॉर्ड से अलग तथ्य होने के बावजूद उन्होंने कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई और उस पर हस्ताक्षर कर दिए। एनजीटी आदेशों की समीक्षा में सामने आई लापरवाही मंगलवार को नगर निगम आयुक्त ने एनजीटी के आदेशों के अनुपालन की समीक्षा की। बैठक में बड़ा तालाब के 50 मीटर दायरे में अतिक्रमण और अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई का आकलन किया गया। समीक्षा में सामने आया कि 4 जून 2026 को प्रस्तावित कार्रवाई संबंधित पक्ष की पुनः सीमांकन की मांग के कारण रोक दी गई थी। इसके बाद 18 जून को राजस्व अमले की मौजूदगी में दोबारा सीमांकन किया गया, जिसमें नगर निगम के दोनों सहायक यंत्री भी शामिल थे। रिकॉर्ड से नहीं मिले पंचनामे के तथ्य जांच में पाया गया कि सीमांकन के बाद तैयार पंचनामे में दर्ज कई तथ्य झील संरक्षण प्रकोष्ठ के रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते थे। इसके बावजूद दोनों अधिकारियों ने न तो लिखित आपत्ति दर्ज कराई और न ही एनजीटी से जुड़े इस महत्वपूर्ण मामले में नगर निगम का पक्ष रखा। निगम प्रशासन ने इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही और शासकीय दायित्वों की अनदेखी माना है। आचरण नियमों के उल्लंघन का आरोप नगर निगम आयुक्त ने नोटिस में कहा है कि दोनों अधिकारियों का यह कृत्य मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के विपरीत है। इससे उनके पदीय दायित्वों के प्रति घोर लापरवाही परिलक्षित होती है। दो दिन में जवाब, नहीं तो विभागीय कार्रवाई दोनों अधिकारियों को दो दिन के भीतर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना जवाब देने के निर्देश दिए गए हैं। आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि यदि तय समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के तहत विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
भोजवेटलैंड क्षेत्र में 50 मीटर परिधि के सीमांकन को लेकर नगर निगम ने अपने ही दो अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने भवन अनुज्ञा शाखा के सहायक यंत्री प्रदीप कुमार जड़िया और झील संरक्षण प्रकोष्ठ के तत्कालीन सहायक यंत्री आदित्य खरे को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। दोनों अधिकारियों पर आरोप है कि सीमांकन के दौरान तैयार पंचनामे में रिकॉर्ड से अलग तथ्य होने के बावजूद उन्होंने कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई और उस पर हस्ताक्षर कर दिए। एनजीटी आदेशों की समीक्षा में सामने आई लापरवाही मंगलवार को नगर निगम आयुक्त ने एनजीटी के आदेशों के अनुपालन की समीक्षा की। बैठक में बड़ा तालाब के 50 मीटर दायरे में अतिक्रमण और अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई का आकलन किया गया। समीक्षा में सामने आया कि 4 जून 2026 को प्रस्तावित कार्रवाई संबंधित पक्ष की पुनः सीमांकन की मांग के कारण रोक दी गई थी। इसके बाद 18 जून को राजस्व अमले की मौजूदगी में दोबारा सीमांकन किया गया, जिसमें नगर निगम के दोनों सहायक यंत्री भी शामिल थे। रिकॉर्ड से नहीं मिले पंचनामे के तथ्य जांच में पाया गया कि सीमांकन के बाद तैयार पंचनामे में दर्ज कई तथ्य झील संरक्षण प्रकोष्ठ के रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते थे। इसके बावजूद दोनों अधिकारियों ने न तो लिखित आपत्ति दर्ज कराई और न ही एनजीटी से जुड़े इस महत्वपूर्ण मामले में नगर निगम का पक्ष रखा। निगम प्रशासन ने इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही और शासकीय दायित्वों की अनदेखी माना है। आचरण नियमों के उल्लंघन का आरोप नगर निगम आयुक्त ने नोटिस में कहा है कि दोनों अधिकारियों का यह कृत्य मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के विपरीत है। इससे उनके पदीय दायित्वों के प्रति घोर लापरवाही परिलक्षित होती है। दो दिन में जवाब, नहीं तो विभागीय कार्रवाई दोनों अधिकारियों को दो दिन के भीतर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना जवाब देने के निर्देश दिए गए हैं। आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि यदि तय समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के तहत विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।