छिंदवाड़ा में बारिश की कमी से बढ़ी चिंता:कन्हरगांव जलाशय सिर्फ 7% भरा, पेयजल और सिंचाई पर संकट के संकेत

छिंदवाड़ा में मानसून सीजन शुरू हुए करीब एक महीना बीत चुका है, लेकिन जिले में अब तक अपेक्षित बारिश नहीं हो सकी है। इसका सीधा असर जलाशयों के जलस्तर पर दिखाई देने लगा है। शहर की पेयजल आपूर्ति का मुख्य स्रोत कन्हरगांव जलाशय अभी तक अपनी कुल क्षमता का केवल 7 प्रतिशत ही भर पाया है। ऐसे में आने वाले दिनों में पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो पेयजल और सिंचाई दोनों पर संकट गहराने की आशंका बढ़ गई है। LSL से ऊपर पहुंचा जलस्तर, लेकिन स्थिति अभी भी चिंताजनक जल संसाधन विभाग के अनुसार, कन्हरगांव जलाशय का जलस्तर फिलहाल लोएस्ट स्टोरेज लेवल (LSL) से ऊपर पहुंच चुका है, जिससे तत्काल पेयजल आपूर्ति पर खतरा नहीं है। हालांकि, जलाशय अभी भी अपनी क्षमता से काफी पीछे है और पर्याप्त जलभराव के लिए अच्छी बारिश की जरूरत बनी हुई है। शहर की पेयजल व्यवस्था इसी जलाशय पर निर्भर कन्हरगांव जलाशय से छिंदवाड़ा शहर के हजारों लोगों को पेयजल उपलब्ध कराया जाता है। इसके अलावा जिले की कई समूह जल प्रदाय योजनाएं भी विभिन्न जलाशयों पर निर्भर हैं। जलस्तर कम रहने से भविष्य में जलापूर्ति प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। सिंचाई परियोजनाओं पर भी दिखने लगा असर बारिश की कमी का असर केवल पेयजल तक सीमित नहीं है। जिले में सिंचाई के लिए उपयोग किए जाने वाले 144 जलाशयों में से अधिकांश का जलस्तर अभी भी LSL से नीचे बना हुआ है। इससे खरीफ सीजन की फसलों, विशेषकर धान, मक्का और सोयाबीन की खेती प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। पिछले साल से 150 मिमी कम बारिश मौसम के आंकड़ों के अनुसार, जिले में अब तक 295 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गई है। यह पिछले वर्ष इसी अवधि में हुई बारिश की तुलना में करीब 150 मिमी कम है। लगातार कम वर्षा के कारण जलाशयों में अपेक्षित जलभराव नहीं हो सका है। अच्छी बारिश का इंतजार प्रशासन, किसान और आम नागरिकों की निगाहें अब आने वाले दिनों की बारिश पर टिकी हैं। मौसम अनुकूल रहा और अच्छी वर्षा हुई तो जलाशयों का जलस्तर सुधर सकता है। वहीं यदि बारिश का सिलसिला कमजोर रहा, तो आने वाले महीनों में पेयजल आपूर्ति, सिंचाई व्यवस्था और जल प्रबंधन बड़ी चुनौती बन सकते हैं।

Jul 18, 2026 - 08:31
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छिंदवाड़ा में बारिश की कमी से बढ़ी चिंता:कन्हरगांव जलाशय सिर्फ 7% भरा, पेयजल और सिंचाई पर संकट के संकेत
छिंदवाड़ा में मानसून सीजन शुरू हुए करीब एक महीना बीत चुका है, लेकिन जिले में अब तक अपेक्षित बारिश नहीं हो सकी है। इसका सीधा असर जलाशयों के जलस्तर पर दिखाई देने लगा है। शहर की पेयजल आपूर्ति का मुख्य स्रोत कन्हरगांव जलाशय अभी तक अपनी कुल क्षमता का केवल 7 प्रतिशत ही भर पाया है। ऐसे में आने वाले दिनों में पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो पेयजल और सिंचाई दोनों पर संकट गहराने की आशंका बढ़ गई है। LSL से ऊपर पहुंचा जलस्तर, लेकिन स्थिति अभी भी चिंताजनक जल संसाधन विभाग के अनुसार, कन्हरगांव जलाशय का जलस्तर फिलहाल लोएस्ट स्टोरेज लेवल (LSL) से ऊपर पहुंच चुका है, जिससे तत्काल पेयजल आपूर्ति पर खतरा नहीं है। हालांकि, जलाशय अभी भी अपनी क्षमता से काफी पीछे है और पर्याप्त जलभराव के लिए अच्छी बारिश की जरूरत बनी हुई है। शहर की पेयजल व्यवस्था इसी जलाशय पर निर्भर कन्हरगांव जलाशय से छिंदवाड़ा शहर के हजारों लोगों को पेयजल उपलब्ध कराया जाता है। इसके अलावा जिले की कई समूह जल प्रदाय योजनाएं भी विभिन्न जलाशयों पर निर्भर हैं। जलस्तर कम रहने से भविष्य में जलापूर्ति प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। सिंचाई परियोजनाओं पर भी दिखने लगा असर बारिश की कमी का असर केवल पेयजल तक सीमित नहीं है। जिले में सिंचाई के लिए उपयोग किए जाने वाले 144 जलाशयों में से अधिकांश का जलस्तर अभी भी LSL से नीचे बना हुआ है। इससे खरीफ सीजन की फसलों, विशेषकर धान, मक्का और सोयाबीन की खेती प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। पिछले साल से 150 मिमी कम बारिश मौसम के आंकड़ों के अनुसार, जिले में अब तक 295 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गई है। यह पिछले वर्ष इसी अवधि में हुई बारिश की तुलना में करीब 150 मिमी कम है। लगातार कम वर्षा के कारण जलाशयों में अपेक्षित जलभराव नहीं हो सका है। अच्छी बारिश का इंतजार प्रशासन, किसान और आम नागरिकों की निगाहें अब आने वाले दिनों की बारिश पर टिकी हैं। मौसम अनुकूल रहा और अच्छी वर्षा हुई तो जलाशयों का जलस्तर सुधर सकता है। वहीं यदि बारिश का सिलसिला कमजोर रहा, तो आने वाले महीनों में पेयजल आपूर्ति, सिंचाई व्यवस्था और जल प्रबंधन बड़ी चुनौती बन सकते हैं।