आगर में जैन साध्वियों का चातुर्मास के लिए मंगल प्रवेश:बैंड-बाजे के साथ निकला चल समारोह; चातुर्मास आत्मशुद्धि, संयम, तप का अवसर
आगर मालवा में चातुर्मास के लिए जैन साध्वी भगवंत सौम्यवंदना श्रीजी महाराज आदि ठाणा-5 का शुक्रवार को मंगल प्रवेश हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में जैन समाजजन शामिल हुए। साध्वियों का चल समारोह कोटा रोड स्थित वासुपूज्य तारक धाम जैन मंदिर से सुबह 10 बजे शुरू हुआ। बैंड-बाजे के साथ निकला यह चल समारोह विभिन्न मार्गों से होते हुए इमली गली स्थित उपाश्रय पहुंचा। जुलूस हॉस्पिटल चौराहा, रानीसती मार्ग, सरकार बाड़ा, नाना बाजार और अहीर मोहल्ला से गुजरा। इसमें पांचों साध्वी भगवंत के साथ बड़ी संख्या में समाजजन मौजूद रहे, जिनमें महिलाएं सिर पर कलश लेकर चल रही थीं। मार्ग में कई स्थानों पर समाजजनों ने साध्वी भगवंत के समक्ष गऊली कर उनका स्वागत किया। चातुर्मास आत्मशुद्धि, संयम, तप का अवसर उपाश्रय में आयोजित धर्मसभा में साध्वी भगवंत सौम्यवंदना श्रीजी ने चातुर्मास के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जैन धर्म में चातुर्मास केवल चार महीने तक एक स्थान पर ठहरने की परंपरा नहीं है, बल्कि यह आत्मशुद्धि, संयम, तप, स्वाध्याय और धर्म साधना का विशेष अवसर है। साध्वी श्रीजी ने बताया कि वर्षा ऋतु में जीव-जंतुओं की उत्पत्ति अधिक होने के कारण साधु-साध्वियां विहार रोककर एक ही स्थान पर रहते हैं। इससे सूक्ष्म जीवों की हिंसा से बचाव होता है और अधिक से अधिक समय धर्म आराधना में लगाया जा सकता है। जीवन को धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ाने की प्रेरणा उन्होंने यह भी कहा कि चातुर्मास के दौरान श्रद्धालुओं को भी अपने जीवन में संयम, अहिंसा, तप, त्याग और स्वाध्याय को अपनाने का अवसर मिलता है। इन चार महीने तक होने वाले प्रवचन और धार्मिक आयोजनों से व्यक्ति को आत्मचिंतन करने और जीवन को धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ाने की प्रेरणा मिलती है। धर्मसभा के बाद जैन ओसवाल भवन में समाजजनों के लिए स्वामी वात्सल्य का आयोजन किया गया। साध्वी भगवंत सौम्यवंदना श्रीजी महाराज आदि ठाणा-5 कार्तिक पूर्णिमा तक आगर में विराजमान रहेंगी। इस अवधि में प्रतिदिन प्रवचन सहित विभिन्न धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
आगर मालवा में चातुर्मास के लिए जैन साध्वी भगवंत सौम्यवंदना श्रीजी महाराज आदि ठाणा-5 का शुक्रवार को मंगल प्रवेश हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में जैन समाजजन शामिल हुए। साध्वियों का चल समारोह कोटा रोड स्थित वासुपूज्य तारक धाम जैन मंदिर से सुबह 10 बजे शुरू हुआ। बैंड-बाजे के साथ निकला यह चल समारोह विभिन्न मार्गों से होते हुए इमली गली स्थित उपाश्रय पहुंचा। जुलूस हॉस्पिटल चौराहा, रानीसती मार्ग, सरकार बाड़ा, नाना बाजार और अहीर मोहल्ला से गुजरा। इसमें पांचों साध्वी भगवंत के साथ बड़ी संख्या में समाजजन मौजूद रहे, जिनमें महिलाएं सिर पर कलश लेकर चल रही थीं। मार्ग में कई स्थानों पर समाजजनों ने साध्वी भगवंत के समक्ष गऊली कर उनका स्वागत किया। चातुर्मास आत्मशुद्धि, संयम, तप का अवसर उपाश्रय में आयोजित धर्मसभा में साध्वी भगवंत सौम्यवंदना श्रीजी ने चातुर्मास के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जैन धर्म में चातुर्मास केवल चार महीने तक एक स्थान पर ठहरने की परंपरा नहीं है, बल्कि यह आत्मशुद्धि, संयम, तप, स्वाध्याय और धर्म साधना का विशेष अवसर है। साध्वी श्रीजी ने बताया कि वर्षा ऋतु में जीव-जंतुओं की उत्पत्ति अधिक होने के कारण साधु-साध्वियां विहार रोककर एक ही स्थान पर रहते हैं। इससे सूक्ष्म जीवों की हिंसा से बचाव होता है और अधिक से अधिक समय धर्म आराधना में लगाया जा सकता है। जीवन को धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ाने की प्रेरणा उन्होंने यह भी कहा कि चातुर्मास के दौरान श्रद्धालुओं को भी अपने जीवन में संयम, अहिंसा, तप, त्याग और स्वाध्याय को अपनाने का अवसर मिलता है। इन चार महीने तक होने वाले प्रवचन और धार्मिक आयोजनों से व्यक्ति को आत्मचिंतन करने और जीवन को धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ाने की प्रेरणा मिलती है। धर्मसभा के बाद जैन ओसवाल भवन में समाजजनों के लिए स्वामी वात्सल्य का आयोजन किया गया। साध्वी भगवंत सौम्यवंदना श्रीजी महाराज आदि ठाणा-5 कार्तिक पूर्णिमा तक आगर में विराजमान रहेंगी। इस अवधि में प्रतिदिन प्रवचन सहित विभिन्न धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।