पन्ना में 5वें दिन भी चिताओं पर लेटे विस्थापित ग्रामीण:बोले- न्याय दो या मार दो; प्रशासन का दावा-1889 पात्र परिवारों को राहत राशि का भुगतान

मध्य प्रदेश के पन्ना जिले के अजयगढ़ इलाके में केन-बेतवा लिंक परियोजना, मझगाय बांध, रुंझ बांध और सिंगरौली-ललितपुर रेलवे लाइन के निर्माण से सैकड़ों परिवार विस्थापित हुए हैं। इन परियोजनाओं के कारण जलस्तर बढ़ने से कई गांव जलमग्न हो गए हैं। यहां लोग पानी में लकड़ी के ढांचों पर लेटकर जल-सत्याग्रह कर रहे हैं और न्याय की मांग कर रहे हैं। तीन दिन से बिजली बंद होने का आरोप आंदोलनकारियों का आरोप है कि आंदोलन को दबाने के लिए तीन दिन से क्षेत्र की बिजली बंद कर दी गई है। इससे सरकारी दावों, वादों और आंकड़ों पर सवाल उठ रहे हैं। अजयगढ़ के डूब क्षेत्र में 'चिता आंदोलन' आज बुधवार को पांचवें दिन भी जारी है। तेज धूप और पानी की लहरों के बीच आदिवासी महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग पानी में रखी लकड़ी की चिताओं पर लेटे हैं। कई महिलाएं और पुरुष गले में सांकेतिक फंदा लगाकर न्याय दो या मार दो के नारे लगा रहे हैं। कई मकान ढह गए और खेती बर्बाद हो चुकी जय किसान संगठन के नेता अमित भटनागर ने आरोप लगाया है कि विकास के नाम पर आदिवासियों और किसानों के अधिकारों को अनदेखा किया गया है। कुंवरपुर, बालूपुर, बनेहरी और विश्रामगंज गांव डूब गए हैं। कई मकान ढह गए हैं और खेती बर्बाद हो चुकी है। ग्रामसभा की सहमति बिना जमीन लेने का आरोप किसानों का आरोप है कि ग्रामसभा की सहमति के बिना उनकी जमीनों पर कब्जा किया गया। विरोध करने पर धारा 163 के तहत कार्रवाई और मुकदमे दर्ज किए गए। उनका यह भी आरोप है कि राजस्व रिकॉर्ड में उपजाऊ सिंचित जमीन को असिंचित दर्ज किया गया, जिससे मुआवजे में उन्हें करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ। ₹12.50 लाख के पुनर्वास पैकेज पर विवाद आंदोलनकारियों का सबसे बड़ा सवाल पुनर्वास राशि को लेकर है। उनका कहना है कि छतरपुर जिले के कुपी गांव में जुलाई में हुए विरोध के बाद सरकार ने पुनर्वास पैकेज ₹5 लाख से बढ़ाकर ₹12.50 लाख प्रति परिवार करने की घोषणा की थी। इसके बावजूद कई परिवारों को ₹12.50 लाख का नया पैकेज नहीं मिला है। 3 तस्वीरें देखिए… प्रशासन बोला- ₹5 लाख प्रति परिवार दिए जा चुके अजयगढ़ प्रशासन का कहना है कि पात्र विस्थापित परिवारों को नियमानुसार पुनर्वास राशि का भुगतान किया जा चुका है। एसडीएम के अनुसार रुंझ सिंचाई परियोजना के तहत विश्रामगंज के 670 विस्थापित परिवारों को ₹5 लाख प्रति परिवार दिए जा चुके हैं। वहीं, मझगाय मध्यम सिंचाई परियोजना के तहत बालूपुर, कुंवरपुर और बनेहरी के 1219 विस्थापित परिवारों को पात्रता के अनुसार भुगतान किया गया है। प्रशासन के मुताबिक अब तक कुल 1889 पात्र परिवारों के खातों में राहत राशि भेजी जा चुकी है। ₹5 लाख पाने वालों को मिलेंगे अतिरिक्त ₹7.50 लाख अजयगढ़ एसडीएम आलोक मार्को के अनुसार जिन विस्थापितों को पहले ₹5 लाख दिए जा चुके हैं, उन्हें नए नियम के तहत अतिरिक्त ₹7.50 लाख का अंतर भुगतान किया जा रहा है। इसके लिए कुंवरपुर, झगराहा और विश्रामगंज में विशेष प्रशासनिक कैंप लगाए जा रहे हैं। एसडीएम के मुताबिक पात्र ग्रामीणों को शपथ पत्र, लिखित सहमति और संयुक्त बैंक खाते की जानकारी जमा करनी होगी। इसके बाद राशि सीधे उनके बैंक खाते में भेजी जाएगी। रिकॉर्ड और वास्तविक पात्रता को लेकर उठ रहे सवाल एक तरफ प्रशासन 1889 परिवारों को भुगतान का दावा कर रहा है, वहीं आंदोलनकारी परिवार अब भी पानी में उतरकर विरोध कर रहे हैं। विस्थापितों का कहना है कि सरकारी दावों और जमीन पर उनकी स्थिति में अंतर है। आंदोलन का केंद्र अब पुनर्वास राशि, जमीन के रिकॉर्ड और वास्तविक पात्रता को लेकर उठ रहे सवाल हैं।

Sep 16, 2026 - 07:34
 0  0
पन्ना में 5वें दिन भी चिताओं पर लेटे विस्थापित ग्रामीण:बोले- न्याय दो या मार दो; प्रशासन का दावा-1889 पात्र परिवारों को राहत राशि का भुगतान
मध्य प्रदेश के पन्ना जिले के अजयगढ़ इलाके में केन-बेतवा लिंक परियोजना, मझगाय बांध, रुंझ बांध और सिंगरौली-ललितपुर रेलवे लाइन के निर्माण से सैकड़ों परिवार विस्थापित हुए हैं। इन परियोजनाओं के कारण जलस्तर बढ़ने से कई गांव जलमग्न हो गए हैं। यहां लोग पानी में लकड़ी के ढांचों पर लेटकर जल-सत्याग्रह कर रहे हैं और न्याय की मांग कर रहे हैं। तीन दिन से बिजली बंद होने का आरोप आंदोलनकारियों का आरोप है कि आंदोलन को दबाने के लिए तीन दिन से क्षेत्र की बिजली बंद कर दी गई है। इससे सरकारी दावों, वादों और आंकड़ों पर सवाल उठ रहे हैं। अजयगढ़ के डूब क्षेत्र में 'चिता आंदोलन' आज बुधवार को पांचवें दिन भी जारी है। तेज धूप और पानी की लहरों के बीच आदिवासी महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग पानी में रखी लकड़ी की चिताओं पर लेटे हैं। कई महिलाएं और पुरुष गले में सांकेतिक फंदा लगाकर न्याय दो या मार दो के नारे लगा रहे हैं। कई मकान ढह गए और खेती बर्बाद हो चुकी जय किसान संगठन के नेता अमित भटनागर ने आरोप लगाया है कि विकास के नाम पर आदिवासियों और किसानों के अधिकारों को अनदेखा किया गया है। कुंवरपुर, बालूपुर, बनेहरी और विश्रामगंज गांव डूब गए हैं। कई मकान ढह गए हैं और खेती बर्बाद हो चुकी है। ग्रामसभा की सहमति बिना जमीन लेने का आरोप किसानों का आरोप है कि ग्रामसभा की सहमति के बिना उनकी जमीनों पर कब्जा किया गया। विरोध करने पर धारा 163 के तहत कार्रवाई और मुकदमे दर्ज किए गए। उनका यह भी आरोप है कि राजस्व रिकॉर्ड में उपजाऊ सिंचित जमीन को असिंचित दर्ज किया गया, जिससे मुआवजे में उन्हें करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ। ₹12.50 लाख के पुनर्वास पैकेज पर विवाद आंदोलनकारियों का सबसे बड़ा सवाल पुनर्वास राशि को लेकर है। उनका कहना है कि छतरपुर जिले के कुपी गांव में जुलाई में हुए विरोध के बाद सरकार ने पुनर्वास पैकेज ₹5 लाख से बढ़ाकर ₹12.50 लाख प्रति परिवार करने की घोषणा की थी। इसके बावजूद कई परिवारों को ₹12.50 लाख का नया पैकेज नहीं मिला है। 3 तस्वीरें देखिए… प्रशासन बोला- ₹5 लाख प्रति परिवार दिए जा चुके अजयगढ़ प्रशासन का कहना है कि पात्र विस्थापित परिवारों को नियमानुसार पुनर्वास राशि का भुगतान किया जा चुका है। एसडीएम के अनुसार रुंझ सिंचाई परियोजना के तहत विश्रामगंज के 670 विस्थापित परिवारों को ₹5 लाख प्रति परिवार दिए जा चुके हैं। वहीं, मझगाय मध्यम सिंचाई परियोजना के तहत बालूपुर, कुंवरपुर और बनेहरी के 1219 विस्थापित परिवारों को पात्रता के अनुसार भुगतान किया गया है। प्रशासन के मुताबिक अब तक कुल 1889 पात्र परिवारों के खातों में राहत राशि भेजी जा चुकी है। ₹5 लाख पाने वालों को मिलेंगे अतिरिक्त ₹7.50 लाख अजयगढ़ एसडीएम आलोक मार्को के अनुसार जिन विस्थापितों को पहले ₹5 लाख दिए जा चुके हैं, उन्हें नए नियम के तहत अतिरिक्त ₹7.50 लाख का अंतर भुगतान किया जा रहा है। इसके लिए कुंवरपुर, झगराहा और विश्रामगंज में विशेष प्रशासनिक कैंप लगाए जा रहे हैं। एसडीएम के मुताबिक पात्र ग्रामीणों को शपथ पत्र, लिखित सहमति और संयुक्त बैंक खाते की जानकारी जमा करनी होगी। इसके बाद राशि सीधे उनके बैंक खाते में भेजी जाएगी। रिकॉर्ड और वास्तविक पात्रता को लेकर उठ रहे सवाल एक तरफ प्रशासन 1889 परिवारों को भुगतान का दावा कर रहा है, वहीं आंदोलनकारी परिवार अब भी पानी में उतरकर विरोध कर रहे हैं। विस्थापितों का कहना है कि सरकारी दावों और जमीन पर उनकी स्थिति में अंतर है। आंदोलन का केंद्र अब पुनर्वास राशि, जमीन के रिकॉर्ड और वास्तविक पात्रता को लेकर उठ रहे सवाल हैं।