भोपाल में पहली बार ट्रांसजेंडर महिला की जेंडर-अफर्मिंग बॉटम सर्जरी:8 घंटे चला ऑपरेशन, प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में पहली बार ऐसी सर्जरी
एम्स भोपाल में ट्रांसजेंडर महिला की जेंडर-अफर्मिंग बॉटम सर्जरी सफलतापूर्वक की गई है। संस्थान के अनुसार, मध्यप्रदेश के शासकीय अस्पतालों में इस तरह की यह पहली सर्जरी है। करीब आठ घंटे चली इस जटिल सर्जरी में जननांग क्षेत्र की शल्य चिकित्सा के जरिए मरीज के शरीर को उनकी लैंगिक पहचान के अनुरूप बनाने की प्रक्रिया की गई। मरीज की सहमति और अनुरोध पर यह ऑपरेशन किया गया। सर्जरी के बाद उन्हें संतोषजनक स्थिति में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। आठ घंटे तक चली जटिल सर्जरी एम्स के बर्न्स एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. मनाल खान और सहायक प्राध्यापक डॉ. अभिनव सिंह ने रेजिडेंट डॉक्टरों के साथ मिलकर सर्जरी की। इस दौरान मरीज की जरूरतों के मुताबिक सर्जिकल प्लानिंग और रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी की विशेषज्ञता का इस्तेमाल किया गया। प्रक्रिया में एनेस्थीसिया, प्रसूति एवं स्त्री रोग और यूरोलॉजी विभाग की टीमों ने भी समन्वय के साथ काम किया। तीन विभागों के डॉक्टरों की अहम भूमिका सर्जरी के दौरान एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. अनुज जैन, प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग के डॉ. अरुण कुमार डोरा और यूरोलॉजी विभाग के डॉ. देवाशीष कौशल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अलग-अलग विशेषज्ञताओं के डॉक्टरों के सहयोग से इस संवेदनशील और जटिल प्रक्रिया को पूरा किया गया। सर्जरी के परिणाम से संतुष्ट मरीज एम्स के मुताबिक, सर्जरी के बाद मरीज ने प्रक्रिया और उसके परिणाम पर प्रसन्नता व्यक्त की। जेंडर-अफर्मिंग सर्जरी का उद्देश्य व्यक्ति की शारीरिक संरचना को उसकी लैंगिक पहचान के अनुरूप बनाने में मदद करना है। इसके परिणाम व्यक्ति की जरूरतों और की गई सर्जरी के प्रकार पर निर्भर करते हैं। ट्रांसजेंडर क्लिनिक में मिलती हैं स्वास्थ्य सेवाएं एम्स भोपाल में समर्पित ट्रांसजेंडर क्लिनिक भी संचालित है। यहां ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को जांच, उपचार और जरूरत के अनुसार स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। इस तरह की सर्जरी के लिए संबंधित विशेषज्ञों की टीम मरीज की जरूरत, सहमति और चिकित्सकीय स्थिति के आधार पर प्रक्रिया की योजना बनाती है। उन्नत चिकित्सा क्षमता का प्रमाण : कार्यपालक निदेशक एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ.) नरेंद्र कोतवाल (रिटायर्ड) ने कहा, "यह सर्जरी एम्स भोपाल की उन्नत चिकित्सा क्षमता और समावेशी, संवेदनशील स्वास्थ्य सेवा के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रमाण है। प्रदेश के शासकीय अस्पतालों में पहली बार यह सफलता मिलना गर्व की बात है।"
एम्स भोपाल में ट्रांसजेंडर महिला की जेंडर-अफर्मिंग बॉटम सर्जरी सफलतापूर्वक की गई है। संस्थान के अनुसार, मध्यप्रदेश के शासकीय अस्पतालों में इस तरह की यह पहली सर्जरी है। करीब आठ घंटे चली इस जटिल सर्जरी में जननांग क्षेत्र की शल्य चिकित्सा के जरिए मरीज के शरीर को उनकी लैंगिक पहचान के अनुरूप बनाने की प्रक्रिया की गई। मरीज की सहमति और अनुरोध पर यह ऑपरेशन किया गया। सर्जरी के बाद उन्हें संतोषजनक स्थिति में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। आठ घंटे तक चली जटिल सर्जरी एम्स के बर्न्स एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. मनाल खान और सहायक प्राध्यापक डॉ. अभिनव सिंह ने रेजिडेंट डॉक्टरों के साथ मिलकर सर्जरी की। इस दौरान मरीज की जरूरतों के मुताबिक सर्जिकल प्लानिंग और रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी की विशेषज्ञता का इस्तेमाल किया गया। प्रक्रिया में एनेस्थीसिया, प्रसूति एवं स्त्री रोग और यूरोलॉजी विभाग की टीमों ने भी समन्वय के साथ काम किया। तीन विभागों के डॉक्टरों की अहम भूमिका सर्जरी के दौरान एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. अनुज जैन, प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग के डॉ. अरुण कुमार डोरा और यूरोलॉजी विभाग के डॉ. देवाशीष कौशल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अलग-अलग विशेषज्ञताओं के डॉक्टरों के सहयोग से इस संवेदनशील और जटिल प्रक्रिया को पूरा किया गया। सर्जरी के परिणाम से संतुष्ट मरीज एम्स के मुताबिक, सर्जरी के बाद मरीज ने प्रक्रिया और उसके परिणाम पर प्रसन्नता व्यक्त की। जेंडर-अफर्मिंग सर्जरी का उद्देश्य व्यक्ति की शारीरिक संरचना को उसकी लैंगिक पहचान के अनुरूप बनाने में मदद करना है। इसके परिणाम व्यक्ति की जरूरतों और की गई सर्जरी के प्रकार पर निर्भर करते हैं। ट्रांसजेंडर क्लिनिक में मिलती हैं स्वास्थ्य सेवाएं एम्स भोपाल में समर्पित ट्रांसजेंडर क्लिनिक भी संचालित है। यहां ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को जांच, उपचार और जरूरत के अनुसार स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। इस तरह की सर्जरी के लिए संबंधित विशेषज्ञों की टीम मरीज की जरूरत, सहमति और चिकित्सकीय स्थिति के आधार पर प्रक्रिया की योजना बनाती है। उन्नत चिकित्सा क्षमता का प्रमाण : कार्यपालक निदेशक एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ.) नरेंद्र कोतवाल (रिटायर्ड) ने कहा, "यह सर्जरी एम्स भोपाल की उन्नत चिकित्सा क्षमता और समावेशी, संवेदनशील स्वास्थ्य सेवा के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रमाण है। प्रदेश के शासकीय अस्पतालों में पहली बार यह सफलता मिलना गर्व की बात है।"