एसटीआर में ऑपरेशन बायसन:पहले दिन 5 बायसन भेजे, आज सुबह से रेस्क्यू शुरू
एसटीआर में ऑपरेशन बायसन:पहले दिन 5 बायसन भेजे, आज सुबह से रेस्क्यू शुरू
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (एसटीआर) के चूरना और बोरी-चूर्णा वन क्षेत्र में गुरुवार से ऑपरेशन बायसन की शुरुआत हो गई। एसटीआर और वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट देहरादून की संयुक्त टीम ने पहले ही दिन एक नर और चार मादा सहित कुल पांच बायसन को सफलतापूर्वक पकड़कर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के लिए रवाना किया। बायसन को ले जा रहे विशेष वाहन रात करीब 8 बजे भौंरा क्षेत्र में देखे गए। पूरी शिफ्टिंग प्रक्रिया की जीपीएस के जरिए मिनट-टू-मिनट मॉनिटरिंग की जा रही है, ताकि किसी भी तरह की समस्या पर तुरंत कार्रवाई की जा सके। ट्रेंकुलाइज कर किया गया स्वास्थ्य परीक्षण
चिकित्सकों की टीम ने पहले बायसन को ट्रेंकुलाइज कर बेहोश किया। इसके बाद मौके पर ही उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। सभी आवश्यक जांच पूरी होने के बाद बायसन को स्ट्रेचर पर रखा गया। कंधों पर स्ट्रेचर उठाकर वाहन तक पहुंचाया
आधा दर्जन से अधिक वनकर्मियों की टीम ने स्ट्रेचर को कंधों पर उठाकर बायसन को वाहन तक पहुंचाया। इसके बाद उन्हें सुरक्षित और हाईटेक वाहनों में रखकर बांधवगढ़ के लिए रवाना किया गया। बायसन के साथ वन्यजीव चिकित्सक और फॉरेस्ट स्टाफ की टीम भी मौजूद है। 394 किलोमीटर का सफर, हर 50-60 किमी पर स्टॉपेज
एसटीआर से बांधवगढ़ की दूरी करीब 394 किलोमीटर है। तय रूट चार्ट के अनुसार वाहनों को हर 50 से 60 किलोमीटर पर रोका जाएगा। स्टॉपेज से पहले संबंधित क्षेत्र के वन अमले को सूचना दी जा रही है। हर पड़ाव पर होगी स्वास्थ्य जांच
वाहन रुकते ही चिकित्सक दल बायसन के स्वास्थ्य की जांच करेगा। उनके चारे और पानी की स्थिति पर भी विशेष ध्यान रखा जाएगा, ताकि पूरे सफर के दौरान बायसन पूरी तरह सुरक्षित रहें।
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (एसटीआर) के चूरना और बोरी-चूर्णा वन क्षेत्र में गुरुवार से ऑपरेशन बायसन की शुरुआत हो गई। एसटीआर और वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट देहरादून की संयुक्त टीम ने पहले ही दिन एक नर और चार मादा सहित कुल पांच बायसन को सफलतापूर्वक पकड़कर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के लिए रवाना किया। बायसन को ले जा रहे विशेष वाहन रात करीब 8 बजे भौंरा क्षेत्र में देखे गए। पूरी शिफ्टिंग प्रक्रिया की जीपीएस के जरिए मिनट-टू-मिनट मॉनिटरिंग की जा रही है, ताकि किसी भी तरह की समस्या पर तुरंत कार्रवाई की जा सके। ट्रेंकुलाइज कर किया गया स्वास्थ्य परीक्षण
चिकित्सकों की टीम ने पहले बायसन को ट्रेंकुलाइज कर बेहोश किया। इसके बाद मौके पर ही उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। सभी आवश्यक जांच पूरी होने के बाद बायसन को स्ट्रेचर पर रखा गया। कंधों पर स्ट्रेचर उठाकर वाहन तक पहुंचाया
आधा दर्जन से अधिक वनकर्मियों की टीम ने स्ट्रेचर को कंधों पर उठाकर बायसन को वाहन तक पहुंचाया। इसके बाद उन्हें सुरक्षित और हाईटेक वाहनों में रखकर बांधवगढ़ के लिए रवाना किया गया। बायसन के साथ वन्यजीव चिकित्सक और फॉरेस्ट स्टाफ की टीम भी मौजूद है। 394 किलोमीटर का सफर, हर 50-60 किमी पर स्टॉपेज
एसटीआर से बांधवगढ़ की दूरी करीब 394 किलोमीटर है। तय रूट चार्ट के अनुसार वाहनों को हर 50 से 60 किलोमीटर पर रोका जाएगा। स्टॉपेज से पहले संबंधित क्षेत्र के वन अमले को सूचना दी जा रही है। हर पड़ाव पर होगी स्वास्थ्य जांच
वाहन रुकते ही चिकित्सक दल बायसन के स्वास्थ्य की जांच करेगा। उनके चारे और पानी की स्थिति पर भी विशेष ध्यान रखा जाएगा, ताकि पूरे सफर के दौरान बायसन पूरी तरह सुरक्षित रहें।