मां सरस्वती पर आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद प्रोफेसर की वापसी:सात साल बाद प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस में लौटे, एबीवीपी ने समझौते का रास्ता अपनाया
मां सरस्वती पर आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद प्रोफेसर की वापसी:सात साल बाद प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस में लौटे, एबीवीपी ने समझौते का रास्ता अपनाया
मां सरस्वती पर आपत्तिजनक और अभद्र टिप्पणी के कारण पद से हटाए गए प्रो. एसएस गौतम की सात साल बाद हुई वापसी सम्मान की बहाली से अधिक एक मजबूरी भरी सफाई जैसी नजर आई। दो माह की डिप्लॉयमेंट पर भेजे गए गौतम गुरुवार को जब प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस पहुंचे, तो माहौल पहले से ही उनके विरोध के लिए तैयार था। विरोध की आहट को भांपते हुए प्रो. गौतम ने सीधे टकराव के बजाय समझौते का रास्ता चुना। उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की कार्यकारिणी से बातचीत की, जहां स्पष्ट शर्त रखी गई—पहले मां सरस्वती की शरण में जाना होगा। इसके बाद अभाविप कार्यकर्ता उन्हें सरस्वती माता के मंदिर तक ले गए। प्रोफेसर ने की पूजा- अर्चना
मंदिर परिसर में वह दृश्य देखने को मिला, जिसने इस वापसी की पूरी तस्वीर साफ कर दी। प्रो. गौतम ने पूजा-अर्चना की, मां सरस्वती के चरणों में तीन बार मत्था टेका और सार्वजनिक रूप से अपने पुराने बयान से तौबा करते दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि वे मां सरस्वती के भक्त हैं और उन्हीं की कृपा से संस्कृत के प्रोफेसर बने। साथ ही जोड़ा कि यदि उनके बयान से किसी की भावनाओं को ठेस पहुंची हो, तो वे क्षमा चाहते हैं। एबीवीपी ने विरोध के बजाय समझौते का रास्ता अपनाया अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) गुरुवार को अपने पूर्व घोषित रुख से पीछे हटती नजर आई। एबीवीपी के विभाग संयोजक अभिषेक गुर्जर ने एक दिन पहले बयान जारी कर कहा था कि प्रोफेसर गौतम को कॉलेज में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा, तालाबंदी की जाएगी और जोरदार विरोध प्रदर्शन होगा। हालांकि गुरुवार को हालात बदले हुए दिखाई दिए। घोषित कार्यक्रम के विपरीत न तो तालाबंदी की गई और न ही कोई विरोध प्रदर्शन हुआ। विद्यार्थी परिषद ने टकराव की बजाय समझौते का रास्ता चुनते हुए शांतिपूर्ण रुख अपनाया।
मां सरस्वती पर आपत्तिजनक और अभद्र टिप्पणी के कारण पद से हटाए गए प्रो. एसएस गौतम की सात साल बाद हुई वापसी सम्मान की बहाली से अधिक एक मजबूरी भरी सफाई जैसी नजर आई। दो माह की डिप्लॉयमेंट पर भेजे गए गौतम गुरुवार को जब प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस पहुंचे, तो माहौल पहले से ही उनके विरोध के लिए तैयार था। विरोध की आहट को भांपते हुए प्रो. गौतम ने सीधे टकराव के बजाय समझौते का रास्ता चुना। उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की कार्यकारिणी से बातचीत की, जहां स्पष्ट शर्त रखी गई—पहले मां सरस्वती की शरण में जाना होगा। इसके बाद अभाविप कार्यकर्ता उन्हें सरस्वती माता के मंदिर तक ले गए। प्रोफेसर ने की पूजा- अर्चना
मंदिर परिसर में वह दृश्य देखने को मिला, जिसने इस वापसी की पूरी तस्वीर साफ कर दी। प्रो. गौतम ने पूजा-अर्चना की, मां सरस्वती के चरणों में तीन बार मत्था टेका और सार्वजनिक रूप से अपने पुराने बयान से तौबा करते दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि वे मां सरस्वती के भक्त हैं और उन्हीं की कृपा से संस्कृत के प्रोफेसर बने। साथ ही जोड़ा कि यदि उनके बयान से किसी की भावनाओं को ठेस पहुंची हो, तो वे क्षमा चाहते हैं। एबीवीपी ने विरोध के बजाय समझौते का रास्ता अपनाया अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) गुरुवार को अपने पूर्व घोषित रुख से पीछे हटती नजर आई। एबीवीपी के विभाग संयोजक अभिषेक गुर्जर ने एक दिन पहले बयान जारी कर कहा था कि प्रोफेसर गौतम को कॉलेज में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा, तालाबंदी की जाएगी और जोरदार विरोध प्रदर्शन होगा। हालांकि गुरुवार को हालात बदले हुए दिखाई दिए। घोषित कार्यक्रम के विपरीत न तो तालाबंदी की गई और न ही कोई विरोध प्रदर्शन हुआ। विद्यार्थी परिषद ने टकराव की बजाय समझौते का रास्ता चुनते हुए शांतिपूर्ण रुख अपनाया।