सीतापुर में मनरेगा फर्जीवाड़ा, अवकाश पर 308 मजदूरों की हाजिरी:5 ग्राम पंचायतों में प्रधानों ने ऑनलाइन दर्ज किए फर्जी रिकॉर्ड

सीतापुर के एलिया विकास खंड में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। आरोप है कि ग्राम प्रधानों द्वारा गणतंत्र दिवस जैसे सार्वजनिक अवकाश के दिन भी मजदूरों से काम कराए जाने का फर्जी रिकॉर्ड ऑनलाइन दर्ज किया गया, जबकि मौके पर कोई कार्य होता हुआ नहीं पाया गया। जानकारी के अनुसार एलिया ब्लॉक की पांच ग्राम पंचायतों में कुल 308 मजदूरों की ऑनलाइन हाजिरी लगाई गई। इनमें नरबाहनपुर ग्राम पंचायत में सबसे अधिक 199 मजदूरों की हाजिरी दर्शाई गई है। इसके अलावा कैनपुर ग्राम पंचायत में 45, खटकरी ग्राम पंचायत में 11, नेरी कलां ग्राम पंचायत में 38 और सरौरा कलां ग्राम पंचायत में 15 मजदूरों की हाजिरी ऑनलाइन दर्ज की गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस दिन मजदूरों की हाजिरी दिखाई गई, उस दिन गणतंत्र दिवस का अवकाश था और गांवों में कहीं भी मनरेगा से संबंधित कोई कार्य नहीं हो रहा था। आरोप यह भी है कि फोटो जियो टैगिंग की प्रक्रिया पूरी करने के बाद भी मजदूरों को मौके पर बुलाकर काम नहीं कराया गया, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि केवल कागजों में ही काम दिखाया गया है। मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद अधिकारी जवाबदेही से बचते रहे और मौके पर जाकर जांच करने की जहमत नहीं उठाई गई। इससे ग्राम प्रधानों के हौसले और बुलंद हो गए और मनरेगा जैसी महत्वाकांक्षी योजना में खुलेआम घोटाला किया गया। जब इस पूरे मामले में डीसी मनरेगा चंदन देव पांडेय से बातचीत की गई तो उन्होंने जांच कराने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया। फिलहाल देखना यह होगा कि जांच वास्तव में होती है या यह मामला भी फाइलों में ही दबकर रह जाएगा। ग्रामीणों ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और मनरेगा में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है।

सीतापुर में मनरेगा फर्जीवाड़ा, अवकाश पर 308 मजदूरों की हाजिरी:5 ग्राम पंचायतों में प्रधानों ने ऑनलाइन दर्ज किए फर्जी रिकॉर्ड
सीतापुर के एलिया विकास खंड में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। आरोप है कि ग्राम प्रधानों द्वारा गणतंत्र दिवस जैसे सार्वजनिक अवकाश के दिन भी मजदूरों से काम कराए जाने का फर्जी रिकॉर्ड ऑनलाइन दर्ज किया गया, जबकि मौके पर कोई कार्य होता हुआ नहीं पाया गया। जानकारी के अनुसार एलिया ब्लॉक की पांच ग्राम पंचायतों में कुल 308 मजदूरों की ऑनलाइन हाजिरी लगाई गई। इनमें नरबाहनपुर ग्राम पंचायत में सबसे अधिक 199 मजदूरों की हाजिरी दर्शाई गई है। इसके अलावा कैनपुर ग्राम पंचायत में 45, खटकरी ग्राम पंचायत में 11, नेरी कलां ग्राम पंचायत में 38 और सरौरा कलां ग्राम पंचायत में 15 मजदूरों की हाजिरी ऑनलाइन दर्ज की गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस दिन मजदूरों की हाजिरी दिखाई गई, उस दिन गणतंत्र दिवस का अवकाश था और गांवों में कहीं भी मनरेगा से संबंधित कोई कार्य नहीं हो रहा था। आरोप यह भी है कि फोटो जियो टैगिंग की प्रक्रिया पूरी करने के बाद भी मजदूरों को मौके पर बुलाकर काम नहीं कराया गया, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि केवल कागजों में ही काम दिखाया गया है। मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद अधिकारी जवाबदेही से बचते रहे और मौके पर जाकर जांच करने की जहमत नहीं उठाई गई। इससे ग्राम प्रधानों के हौसले और बुलंद हो गए और मनरेगा जैसी महत्वाकांक्षी योजना में खुलेआम घोटाला किया गया। जब इस पूरे मामले में डीसी मनरेगा चंदन देव पांडेय से बातचीत की गई तो उन्होंने जांच कराने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया। फिलहाल देखना यह होगा कि जांच वास्तव में होती है या यह मामला भी फाइलों में ही दबकर रह जाएगा। ग्रामीणों ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और मनरेगा में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है।