जालौन में टीईटी अनिवार्यता पर शिक्षकों का प्रदर्शन:केंद्रीय शिक्षा राज्यमंत्री जयंत चौधरी का किया विरोध, बयान की प्रतियां जलाईं
जालौन में टीईटी अनिवार्यता पर शिक्षकों का प्रदर्शन:केंद्रीय शिक्षा राज्यमंत्री जयंत चौधरी का किया विरोध, बयान की प्रतियां जलाईं
जालौन में केंद्रीय शिक्षा राज्यमंत्री जयंत चौधरी के एक बयान के विरोध में शिक्षकों ने जोरदार प्रदर्शन किया। लोकसभा में राइट टू एजुकेशन (RTE) के तहत सभी शिक्षकों के लिए टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) अनिवार्य करने संबंधी मंत्री के बयान पर शिक्षकों में आक्रोश देखा गया। यह प्रदर्शन उरई के अंबेडकर चौराहे पर हुआ, जहां बड़ी संख्या में एकत्रित शिक्षकों ने मंत्री के बयान की प्रतियां जलाकर अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारी शिक्षकों का कहना था कि वर्ष 2010 से पहले नियुक्त हुए शिक्षकों ने उस समय लागू सभी शैक्षणिक अर्हताओं को पूरा किया था। टीईटी परीक्षा वर्ष 2011 के बाद लागू की गई थी, इसलिए पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर इसे अनिवार्य करना न्यायसंगत नहीं है। शिक्षकों ने आरोप लगाया कि सरकार उन पर जबरन टीईटी पास करने का दबाव बना रही है, जो उनके साथ अन्याय है। शिक्षक नेताओं ने बताया कि राष्ट्रीय अध्यक्ष दिनेश शर्मा के निर्देश पर देशभर में ऐसे विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उनका अनुमान है कि इस निर्णय से देश में लगभग 20 लाख शिक्षक और उनके परिवार प्रभावित होंगे। यदि परिवारों को भी शामिल किया जाए, तो यह संख्या लगभग एक करोड़ तक पहुंच सकती है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से छूट नहीं दी, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि आवश्यकता पड़ने पर शिक्षक संगठन देशव्यापी आंदोलन करेंगे और सरकार के खिलाफ मतदान व अभियान चलाने से भी पीछे नहीं हटेंगे। शिक्षकों ने मांग की कि 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को पूर्व नियमों के तहत ही मान्यता दी जाए और उन्हें टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त रखा जाए। प्रदर्शन के दौरान प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात रहा। शिक्षकों ने स्पष्ट किया कि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय न होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
जालौन में केंद्रीय शिक्षा राज्यमंत्री जयंत चौधरी के एक बयान के विरोध में शिक्षकों ने जोरदार प्रदर्शन किया। लोकसभा में राइट टू एजुकेशन (RTE) के तहत सभी शिक्षकों के लिए टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) अनिवार्य करने संबंधी मंत्री के बयान पर शिक्षकों में आक्रोश देखा गया। यह प्रदर्शन उरई के अंबेडकर चौराहे पर हुआ, जहां बड़ी संख्या में एकत्रित शिक्षकों ने मंत्री के बयान की प्रतियां जलाकर अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारी शिक्षकों का कहना था कि वर्ष 2010 से पहले नियुक्त हुए शिक्षकों ने उस समय लागू सभी शैक्षणिक अर्हताओं को पूरा किया था। टीईटी परीक्षा वर्ष 2011 के बाद लागू की गई थी, इसलिए पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर इसे अनिवार्य करना न्यायसंगत नहीं है। शिक्षकों ने आरोप लगाया कि सरकार उन पर जबरन टीईटी पास करने का दबाव बना रही है, जो उनके साथ अन्याय है। शिक्षक नेताओं ने बताया कि राष्ट्रीय अध्यक्ष दिनेश शर्मा के निर्देश पर देशभर में ऐसे विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उनका अनुमान है कि इस निर्णय से देश में लगभग 20 लाख शिक्षक और उनके परिवार प्रभावित होंगे। यदि परिवारों को भी शामिल किया जाए, तो यह संख्या लगभग एक करोड़ तक पहुंच सकती है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से छूट नहीं दी, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि आवश्यकता पड़ने पर शिक्षक संगठन देशव्यापी आंदोलन करेंगे और सरकार के खिलाफ मतदान व अभियान चलाने से भी पीछे नहीं हटेंगे। शिक्षकों ने मांग की कि 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को पूर्व नियमों के तहत ही मान्यता दी जाए और उन्हें टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त रखा जाए। प्रदर्शन के दौरान प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात रहा। शिक्षकों ने स्पष्ट किया कि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय न होने तक आंदोलन जारी रहेगा।