वी- वॉयर टेक्नोलॉजी:जलस्तर बढ़ाने 70 निकायों में 19 करोड़ के 302 इंजेक्शन वेल बनेंगे
वी- वॉयर टेक्नोलॉजी:जलस्तर बढ़ाने 70 निकायों में 19 करोड़ के 302 इंजेक्शन वेल बनेंगे
छत्तीसगढ़ के शहरों में लगातार घटते जल स्तर को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने वॉटर लेवल सुधारने के लिए बड़ा प्लान तैयार किया है। इसके तहत प्रदेश के 14 नगर निगम और 56 नगर पालिकाओं में वी वायर टेक्नालॉजी से 302 इंजेक्शन वेल बनाए जाएंगे। इनको बनाने में 18.78 करोड़ रुपए खर्च होंगे। बताया गया है कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय भू-जल संवर्धन मिशन (शहरी) के तहत प्रदेश के नगरीय निकायों में यह इनोवेटिव इंजेक्शन वेल स्थापित किए जाएंगे। इन संरचनाओं के जरिए बारिश के पानी को फिल्टर कर सीधे जमीन के भीतर पहुंचाया जाएगा, जिससे पेयजल बोरवेल और भूमिगत जल भंडार का स्तर बेहतर होगा। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के दिशा-निर्देशों के बाद संचालनालय द्वारा तकनीकी स्वीकृति जारी की जा चुकी है। प्रत्येक यूनिट के लिए 6.22 लाख रुपए का बजट बनाया गया है। सभी नगर निगमों व नगरपालिकाओं को तीन दिन के भीतर स्थान चयन सहित प्रस्ताव भेजने के लिए कहा गया है। निकायों को प्रस्ताव भेजते समय चयनित स्थल का विवरण, अक्षांश-देशांतर, क्षेत्रफल, अतिक्रमण मुक्त प्रमाण पत्र, पर्याप्त वर्षाजल भराव संबंधी प्रमाण तथा एमआईसी या प्रेसिडेंट इन काउंसिल की संकल्प प्रति अनिवार्य रूप से भेजना होगा। यह मिशन शहरी जल संकट से निपटने की दिशा में राज्य का एक बड़ा संरचनात्मक कदम माना जा रहा है। समय पर कार्य शुरू होने पर आगामी मानसून से ही शहरों में भू-जल रिचार्ज व्यवस्था का असर दिखने लगेगा। प्रदेश के 5 ब्लॉक क्रिटिकल तो 21 ब्लाॅक सेमीक्रिटिकल जोन में छत्तीसगढ़ के प्रमुख शहरों में गर्मी की आहट के साथ ही जल संकट के आसार भी नजर आने लगे हैं। केंद्रीय भूजल बोर्ड की ताज़ा रिपोर्ट और राज्य जल संसाधन विभाग के आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश के बड़े शहरों में वाटर लेवल काफी डाउन हो गया है। राजधानी रायपुर के कई इलाकों में वाटर टेबल खतरनाक रूप से नीचे चला गया है। मानसून पूर्व की स्थिति देखें तो रायपुर जिले में जलस्तर 1.9 मीटर से लेकर 18.54 मीटर की गहराई तक दर्ज किया गया है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि शहरी बस्तियों में अंधाधुंध बोरिंग के कारण पानी 800 फीट से भी नीचे पहुंच गया है। प्रदेश के 5 ब्लॉक क्रिटिकल और 21 सेमी-क्रिटिकल जोन में है। बिलासपुर व दुर्ग की स्थिति गंभीर
न्यायधानी बिलासपुर के बिल्हा और तखतपुर जैसे क्षेत्रों को ‘सेमी-क्रिटिकल’ श्रेणी में रखा गया है। यहां भूजल का दोहन उसकी रीचार्ज क्षमता से कहीं अधिक हो रहा है। वहीं दुर्ग जिले में भी स्थिति बेहतर नहीं है, जहां जल संसाधनों का 70% से अधिक उपयोग हो चुका है। वॉटर रिसोर्स डिपार्टमेंट की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के 146 ब्लॉकों में से अब 26 ब्लॉक सुरक्षित श्रेणी से बाहर हो चुके हैं। प्रमुख आंकड़े एक नजर में यहां इतने बनेंगे इंजेक्शन वेल
रायपुर नगर निगम- 30 {बिलासपुर- 20 {कोरबा- 15 {रायगढ़, भिलाई, दुर्ग- 10-10 {जगदलपुर- 12 {धमतरी, राजनांदगांव, भिलाई-चरोदा, रिसाली- 7-7 {बीरगांव, चिरमिरी, अंबिकापुर- 5-5 {56 नगरपालिका परिषदों में- 168 यूनिट {कुल प्रस्तावित यूनिट 302। क्या है वी वायर टेक्नालॉजी
‘वी’ वायर टेक्नोलॉजी एक आधुनिक फिल्ट्रेशन प्रणाली है, जिसमें विशेष स्टेनलेस स्टील स्क्रीन के माध्यम से बारिश के पानी को साफ कर भूमिगत जल स्रोतों तक पहुंचाया जाता है। इससे मिट्टी और ठोस कण रुकते हैं तथा स्वच्छ पानी नीचे जाता है।
छत्तीसगढ़ के शहरों में लगातार घटते जल स्तर को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने वॉटर लेवल सुधारने के लिए बड़ा प्लान तैयार किया है। इसके तहत प्रदेश के 14 नगर निगम और 56 नगर पालिकाओं में वी वायर टेक्नालॉजी से 302 इंजेक्शन वेल बनाए जाएंगे। इनको बनाने में 18.78 करोड़ रुपए खर्च होंगे। बताया गया है कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय भू-जल संवर्धन मिशन (शहरी) के तहत प्रदेश के नगरीय निकायों में यह इनोवेटिव इंजेक्शन वेल स्थापित किए जाएंगे। इन संरचनाओं के जरिए बारिश के पानी को फिल्टर कर सीधे जमीन के भीतर पहुंचाया जाएगा, जिससे पेयजल बोरवेल और भूमिगत जल भंडार का स्तर बेहतर होगा। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के दिशा-निर्देशों के बाद संचालनालय द्वारा तकनीकी स्वीकृति जारी की जा चुकी है। प्रत्येक यूनिट के लिए 6.22 लाख रुपए का बजट बनाया गया है। सभी नगर निगमों व नगरपालिकाओं को तीन दिन के भीतर स्थान चयन सहित प्रस्ताव भेजने के लिए कहा गया है। निकायों को प्रस्ताव भेजते समय चयनित स्थल का विवरण, अक्षांश-देशांतर, क्षेत्रफल, अतिक्रमण मुक्त प्रमाण पत्र, पर्याप्त वर्षाजल भराव संबंधी प्रमाण तथा एमआईसी या प्रेसिडेंट इन काउंसिल की संकल्प प्रति अनिवार्य रूप से भेजना होगा। यह मिशन शहरी जल संकट से निपटने की दिशा में राज्य का एक बड़ा संरचनात्मक कदम माना जा रहा है। समय पर कार्य शुरू होने पर आगामी मानसून से ही शहरों में भू-जल रिचार्ज व्यवस्था का असर दिखने लगेगा। प्रदेश के 5 ब्लॉक क्रिटिकल तो 21 ब्लाॅक सेमीक्रिटिकल जोन में छत्तीसगढ़ के प्रमुख शहरों में गर्मी की आहट के साथ ही जल संकट के आसार भी नजर आने लगे हैं। केंद्रीय भूजल बोर्ड की ताज़ा रिपोर्ट और राज्य जल संसाधन विभाग के आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश के बड़े शहरों में वाटर लेवल काफी डाउन हो गया है। राजधानी रायपुर के कई इलाकों में वाटर टेबल खतरनाक रूप से नीचे चला गया है। मानसून पूर्व की स्थिति देखें तो रायपुर जिले में जलस्तर 1.9 मीटर से लेकर 18.54 मीटर की गहराई तक दर्ज किया गया है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि शहरी बस्तियों में अंधाधुंध बोरिंग के कारण पानी 800 फीट से भी नीचे पहुंच गया है। प्रदेश के 5 ब्लॉक क्रिटिकल और 21 सेमी-क्रिटिकल जोन में है। बिलासपुर व दुर्ग की स्थिति गंभीर
न्यायधानी बिलासपुर के बिल्हा और तखतपुर जैसे क्षेत्रों को ‘सेमी-क्रिटिकल’ श्रेणी में रखा गया है। यहां भूजल का दोहन उसकी रीचार्ज क्षमता से कहीं अधिक हो रहा है। वहीं दुर्ग जिले में भी स्थिति बेहतर नहीं है, जहां जल संसाधनों का 70% से अधिक उपयोग हो चुका है। वॉटर रिसोर्स डिपार्टमेंट की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के 146 ब्लॉकों में से अब 26 ब्लॉक सुरक्षित श्रेणी से बाहर हो चुके हैं। प्रमुख आंकड़े एक नजर में यहां इतने बनेंगे इंजेक्शन वेल
रायपुर नगर निगम- 30 {बिलासपुर- 20 {कोरबा- 15 {रायगढ़, भिलाई, दुर्ग- 10-10 {जगदलपुर- 12 {धमतरी, राजनांदगांव, भिलाई-चरोदा, रिसाली- 7-7 {बीरगांव, चिरमिरी, अंबिकापुर- 5-5 {56 नगरपालिका परिषदों में- 168 यूनिट {कुल प्रस्तावित यूनिट 302। क्या है वी वायर टेक्नालॉजी
‘वी’ वायर टेक्नोलॉजी एक आधुनिक फिल्ट्रेशन प्रणाली है, जिसमें विशेष स्टेनलेस स्टील स्क्रीन के माध्यम से बारिश के पानी को साफ कर भूमिगत जल स्रोतों तक पहुंचाया जाता है। इससे मिट्टी और ठोस कण रुकते हैं तथा स्वच्छ पानी नीचे जाता है।