रूचि गोयल नर्मदापुरम ग्रामीण तहसीलदार, अंकित मौर्य बने डोलरिया तहसीलदार:दिव्यांशु, सुनील बने नायब तहसीलदार, माखननगर तहसीलदार के खिलाफ अधिवक्ता संघ ने मोर्चा खोला

नर्मदा जिले में नायब तहसीलदार और तहसीलदारों के तबादलें हुए। अपर कलेक्टर अनिल जैन ने तहसीलदारों के बीच तहसीलों का विभाजन किया। जिसमें ऋषि गोयल को नर्मदापुरम ग्रामीण तहसील में तहसीलदार की जिम्मेदारी दी। नर्मदापुरम प्रभारी ग्रामीण तहसीलदार दिव्यांशु नामदेव अब ग्रामीण तहसील में नायब तहसीलदार का पद संभालेंगे। माखननगर नायब तहसीलदार अंकित मौर्य को डोलरिया तहसीलदार की जिम्मेदारी दी। डोलरिया के प्रभारी तहसीलदार सुनील गढ़वाल का तबादला माखननगर नायब तहसीलदार हुआ। पिपरिया नायब तहसीलदार वैभव बैरागी को तहसीलदार पिपरिया, बनखेड़ी नायब तहसीलदार अंजू लोधी को तहसीलदार की जिम्मेदारी दी गई है। बता दें मप्र शासन राजस्व विभाग द्वारा जिले के नायब तहसीलदारों के प्रभारी तहसीलदार के लिए पदस्थापना किए जाने के आदेश जारी किए। इसी के चलते एडीएम अनिल जैन ने 6 नायब तहसीलदार, तहसीलदारों k तबादले किए। तहसीलदार के खिलाफ अधिवक्ता, हटाने की मांग की माखननगर तहसील के तहसीलदार महेंद्र चौहान से अधिवक्ता संघ परेशान है। उन्होंने नियम विरुद्ध कार्य करने और पक्षकारों सहित अधिवक्ताओं को परेशान करने के आरोपों लगाएं है। अधिवक्ता संघ ने तहसीलदार चौहान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पूर्व में कमिश्नर और कलेक्टर को दिए गए आवेदन पर कार्रवाई न होने से आक्रोशित अधिवक्ता संघ ने बैठक कर संकल्प लिया है कि यदि एक सप्ताह में उचित कदम नहीं उठाए गए, तो वे तहसीलदार न्यायालय का पूर्ण बहिष्कार करेंगे। इस मामले को लेकर अधिवक्ता संघ ने 13 मार्च को भी आयुक्त, कलेक्टर आदि को ज्ञापन सौंपकर तहसीलदार के प्रकरणों की जांच की मांग की थी। अधिकारियों ने आश्वासन तो दिया, लेकिन एक माह बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। यह है विवाद की मुख्य वजह तहसीलदार ने बीते 6 फरवरी को सूचना पटल पर नोटिस चस्पा किया था कि 6 से 16 फरवरी के बीच के सभी प्रकरण अगली तारीखों में यथावत लिए जाएंगे। आरोप है कि 16 फरवरी के बाद रीडर द्वारा पेशी की सही जानकारी नहीं दी गई। इसी बीच आरसीएमएस पोर्टल पर पेंडेंसी कम करने की मंशा से समय सीमा के बाहर हो रहे दर्जनों प्रकरणों की आदेशिकाएं एक ही रात में लिख दी गईं। मूल दस्तावेज न होने या अनुपस्थिति का आधार बताकर कई प्रकरणों को सामूहिक रूप से निरस्त कर दिया गया।

Apr 11, 2026 - 07:10
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रूचि गोयल नर्मदापुरम ग्रामीण तहसीलदार, अंकित मौर्य बने डोलरिया तहसीलदार:दिव्यांशु, सुनील बने नायब तहसीलदार, माखननगर तहसीलदार के खिलाफ अधिवक्ता संघ ने मोर्चा खोला
नर्मदा जिले में नायब तहसीलदार और तहसीलदारों के तबादलें हुए। अपर कलेक्टर अनिल जैन ने तहसीलदारों के बीच तहसीलों का विभाजन किया। जिसमें ऋषि गोयल को नर्मदापुरम ग्रामीण तहसील में तहसीलदार की जिम्मेदारी दी। नर्मदापुरम प्रभारी ग्रामीण तहसीलदार दिव्यांशु नामदेव अब ग्रामीण तहसील में नायब तहसीलदार का पद संभालेंगे। माखननगर नायब तहसीलदार अंकित मौर्य को डोलरिया तहसीलदार की जिम्मेदारी दी। डोलरिया के प्रभारी तहसीलदार सुनील गढ़वाल का तबादला माखननगर नायब तहसीलदार हुआ। पिपरिया नायब तहसीलदार वैभव बैरागी को तहसीलदार पिपरिया, बनखेड़ी नायब तहसीलदार अंजू लोधी को तहसीलदार की जिम्मेदारी दी गई है। बता दें मप्र शासन राजस्व विभाग द्वारा जिले के नायब तहसीलदारों के प्रभारी तहसीलदार के लिए पदस्थापना किए जाने के आदेश जारी किए। इसी के चलते एडीएम अनिल जैन ने 6 नायब तहसीलदार, तहसीलदारों k तबादले किए। तहसीलदार के खिलाफ अधिवक्ता, हटाने की मांग की माखननगर तहसील के तहसीलदार महेंद्र चौहान से अधिवक्ता संघ परेशान है। उन्होंने नियम विरुद्ध कार्य करने और पक्षकारों सहित अधिवक्ताओं को परेशान करने के आरोपों लगाएं है। अधिवक्ता संघ ने तहसीलदार चौहान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पूर्व में कमिश्नर और कलेक्टर को दिए गए आवेदन पर कार्रवाई न होने से आक्रोशित अधिवक्ता संघ ने बैठक कर संकल्प लिया है कि यदि एक सप्ताह में उचित कदम नहीं उठाए गए, तो वे तहसीलदार न्यायालय का पूर्ण बहिष्कार करेंगे। इस मामले को लेकर अधिवक्ता संघ ने 13 मार्च को भी आयुक्त, कलेक्टर आदि को ज्ञापन सौंपकर तहसीलदार के प्रकरणों की जांच की मांग की थी। अधिकारियों ने आश्वासन तो दिया, लेकिन एक माह बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। यह है विवाद की मुख्य वजह तहसीलदार ने बीते 6 फरवरी को सूचना पटल पर नोटिस चस्पा किया था कि 6 से 16 फरवरी के बीच के सभी प्रकरण अगली तारीखों में यथावत लिए जाएंगे। आरोप है कि 16 फरवरी के बाद रीडर द्वारा पेशी की सही जानकारी नहीं दी गई। इसी बीच आरसीएमएस पोर्टल पर पेंडेंसी कम करने की मंशा से समय सीमा के बाहर हो रहे दर्जनों प्रकरणों की आदेशिकाएं एक ही रात में लिख दी गईं। मूल दस्तावेज न होने या अनुपस्थिति का आधार बताकर कई प्रकरणों को सामूहिक रूप से निरस्त कर दिया गया।