पुंगनूर बछड़े के जबड़े की सफल सर्जरी:जन्म के समय टूटा था जबड़ा, अब स्थिति में सुधार, ढाई लाख में आती है गाय
खरगोन जिले के बोरावां स्थित सरकारी पशु चिकित्सालय में पुंगनूर नस्ल के एक नर बछड़े के जबड़े की सफल सर्जरी की गई है। जन्म के समय जबड़ा टूट जाने के कारण पशु शल्य चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. संतोष मंडलोई ने 24 घंटे के भीतर यह ऑपरेशन किया। पांच दिन की निगरानी के बाद बछड़ा अब अपनी मां का दूध पीने लगा है। खरगोन के पशुपालक त्रिलोक डंडीर की पुंगनूर गाय पहली बार प्रसव कर रही थी। बछड़ा गर्भाशय में फंसा होने के कारण सामान्य प्रसव में कठिनाई हुई। बछड़े को खींचकर बाहर निकालने के प्रयास में उसके निचले जबड़े की हड्डी टूट गई, जिससे उसका जबड़ा लटक गया था। गंभीर हालत में बछड़े को खरगोन से बोरावां अस्पताल लाया गया। पशु शल्य चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. संतोष मंडलोई ने जांच के बाद सर्जरी का निर्णय लिया। सर्जरी के बाद स्थिति में सुधार
डॉ. मंडलोई ने बताया कि दो घंटे की जटिल सर्जरी के दौरान बछड़े के जबड़े की हड्डी में पिनिंग की गई। सर्जरी के बाद पांच दिनों तक उसके मुंह पर सॉफ्ट पट्टा बांधकर निगरानी रखी गई और उसे बोतल से बाहरी दूध पिलाया गया। अब बछड़ा पूरी तरह स्वस्थ है। इस जटिल सर्जरी में सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी पूजा धार्वे और चेतन पटेल की टीम ने सहयोग किया। डॉक्टरों के अनुसार, गाय के प्रसव के मामलों में बछड़े के शरीर को सिर के साथ सही स्थिति में लाकर ही गर्भाशय से बाहर निकालना चाहिए। इस बछड़े का शरीर नाजुक होने के कारण खींचने पर उसका जबड़ा टूट गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश में विलुप्त हो रही पुंगनूर गाय के संरक्षण की अपील कर चुके हैं। इसी से प्रेरित होकर पशुपालक त्रिलोक डंडीर दो साल पहले इस नस्ल का एक नर और एक मादा जोड़ा लेकर आए थे। मध्य प्रदेश में इंदौर के अलावा खरगोन में यह इकलौता जोड़ा है। आंध्र प्रदेश में पाई जाती है नस्ल
आंध्र प्रदेश के चित्तूर में पाई जाने वाली पुंगनूर नस्ल की गायों की संख्या घटने के कारण वहां की सरकार इनके नस्ल संवर्धन पर काम कर रही है। दिखने में सुंदर और मनमोहक इस गाय की ऊंचाई दो से ढाई फीट होती है। इसके दूध में वसा (फैट) की मात्रा सर्वाधिक होती है। लगभग 2.50 लाख रुपये कीमत की यह गाय एक स्टेटस सिंबल भी मानी जाती है।
खरगोन जिले के बोरावां स्थित सरकारी पशु चिकित्सालय में पुंगनूर नस्ल के एक नर बछड़े के जबड़े की सफल सर्जरी की गई है। जन्म के समय जबड़ा टूट जाने के कारण पशु शल्य चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. संतोष मंडलोई ने 24 घंटे के भीतर यह ऑपरेशन किया। पांच दिन की निगरानी के बाद बछड़ा अब अपनी मां का दूध पीने लगा है। खरगोन के पशुपालक त्रिलोक डंडीर की पुंगनूर गाय पहली बार प्रसव कर रही थी। बछड़ा गर्भाशय में फंसा होने के कारण सामान्य प्रसव में कठिनाई हुई। बछड़े को खींचकर बाहर निकालने के प्रयास में उसके निचले जबड़े की हड्डी टूट गई, जिससे उसका जबड़ा लटक गया था। गंभीर हालत में बछड़े को खरगोन से बोरावां अस्पताल लाया गया। पशु शल्य चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. संतोष मंडलोई ने जांच के बाद सर्जरी का निर्णय लिया। सर्जरी के बाद स्थिति में सुधार
डॉ. मंडलोई ने बताया कि दो घंटे की जटिल सर्जरी के दौरान बछड़े के जबड़े की हड्डी में पिनिंग की गई। सर्जरी के बाद पांच दिनों तक उसके मुंह पर सॉफ्ट पट्टा बांधकर निगरानी रखी गई और उसे बोतल से बाहरी दूध पिलाया गया। अब बछड़ा पूरी तरह स्वस्थ है। इस जटिल सर्जरी में सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी पूजा धार्वे और चेतन पटेल की टीम ने सहयोग किया। डॉक्टरों के अनुसार, गाय के प्रसव के मामलों में बछड़े के शरीर को सिर के साथ सही स्थिति में लाकर ही गर्भाशय से बाहर निकालना चाहिए। इस बछड़े का शरीर नाजुक होने के कारण खींचने पर उसका जबड़ा टूट गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश में विलुप्त हो रही पुंगनूर गाय के संरक्षण की अपील कर चुके हैं। इसी से प्रेरित होकर पशुपालक त्रिलोक डंडीर दो साल पहले इस नस्ल का एक नर और एक मादा जोड़ा लेकर आए थे। मध्य प्रदेश में इंदौर के अलावा खरगोन में यह इकलौता जोड़ा है। आंध्र प्रदेश में पाई जाती है नस्ल
आंध्र प्रदेश के चित्तूर में पाई जाने वाली पुंगनूर नस्ल की गायों की संख्या घटने के कारण वहां की सरकार इनके नस्ल संवर्धन पर काम कर रही है। दिखने में सुंदर और मनमोहक इस गाय की ऊंचाई दो से ढाई फीट होती है। इसके दूध में वसा (फैट) की मात्रा सर्वाधिक होती है। लगभग 2.50 लाख रुपये कीमत की यह गाय एक स्टेटस सिंबल भी मानी जाती है।