मोहर्रम की 7 तारीख को निकला मातमी जुलूस:मौलाना जाफर रजा बोले- कर्बला का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का उद्देश्य
जबलपुर के सदर क्षेत्र से शिया समुदाय का मातमी जुलूस निकाला गया। दोपहर दो बजे सदर आला डॉक्टर बटालिया के सामने स्थित मरहूम बाबा जाफरी साहब के इमामबाड़े में मजलिस का आयोजन किया गया। मजलिस की शुरुआत 'मर्सिया' से हुई, जिसके बाद नाईब रिज़वी ने बारगाहे हुसैनी में 'सलाम' पढ़ा। मुरादाबाद से आए शिया आलिम-ए-दीन मौलाना जाफर रजा ने मजलिस को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि मोहर्रम पर निकाले जाने वाले मातमी जुलूस का मकसद सिर्फ शोक मनाना नहीं, बल्कि कर्बला के सार्वभौमिक संदेश को जन-जन तक पहुंचाना है। मौलाना जाफर रजा ने बताया कि यह जुलूस याद दिलाता है कि अन्याय, अत्याचार और झूठ के सामने कभी सिर नहीं झुकाना चाहिए। इमाम हुसैन ने किसी सत्ता या सांसारिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि उस दौर के 'सुपर पावर' यज़ीद के आतंक से मानवता, न्याय और धर्म की रक्षा के लिए अपने पूरे परिवार और साथियों का बलिदान दिया था। मजलिस के बाद दोपहर तीन बजे बाबा जाफरी के इमामबाड़े से मातमी जुलूस रवाना हुआ। यह जुलूस अपने पारंपरिक रास्तों घंटाघर और बड़ी ओमती से होता हुआ गलगला स्थित शिया इमामबाड़ा पहुंचा। जुलूस के दौरान पूरा माहौल गमगीन रहा।
जबलपुर के सदर क्षेत्र से शिया समुदाय का मातमी जुलूस निकाला गया। दोपहर दो बजे सदर आला डॉक्टर बटालिया के सामने स्थित मरहूम बाबा जाफरी साहब के इमामबाड़े में मजलिस का आयोजन किया गया। मजलिस की शुरुआत 'मर्सिया' से हुई, जिसके बाद नाईब रिज़वी ने बारगाहे हुसैनी में 'सलाम' पढ़ा। मुरादाबाद से आए शिया आलिम-ए-दीन मौलाना जाफर रजा ने मजलिस को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि मोहर्रम पर निकाले जाने वाले मातमी जुलूस का मकसद सिर्फ शोक मनाना नहीं, बल्कि कर्बला के सार्वभौमिक संदेश को जन-जन तक पहुंचाना है। मौलाना जाफर रजा ने बताया कि यह जुलूस याद दिलाता है कि अन्याय, अत्याचार और झूठ के सामने कभी सिर नहीं झुकाना चाहिए। इमाम हुसैन ने किसी सत्ता या सांसारिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि उस दौर के 'सुपर पावर' यज़ीद के आतंक से मानवता, न्याय और धर्म की रक्षा के लिए अपने पूरे परिवार और साथियों का बलिदान दिया था। मजलिस के बाद दोपहर तीन बजे बाबा जाफरी के इमामबाड़े से मातमी जुलूस रवाना हुआ। यह जुलूस अपने पारंपरिक रास्तों घंटाघर और बड़ी ओमती से होता हुआ गलगला स्थित शिया इमामबाड़ा पहुंचा। जुलूस के दौरान पूरा माहौल गमगीन रहा।