पौड़ी रेलवे गेट बंद रखने पर हाईकोर्ट सख्त:रेलवे और एमपीआरडीसी से मांगा जवाब; 2 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर खंडपीठ ने पौड़ी (पउड़ी) रेलवे गेट बंद रखने और शहपुरा के पास क्षतिग्रस्त पुल के निर्माण में हो रही देरी को लेकर रेलवे और मध्यप्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीआरडीसी) को कड़ी फटकार लगाई है। जनहित याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करते हुए अदालत ने सवाल किया कि जब तक पुल का क्षतिग्रस्त हिस्सा ठीक नहीं हो जाता, तब तक आम लोगों की सुविधा के लिए रेलवे गेट क्यों नहीं खोला जा रहा है। सुनवाई के दौरान रेलवे की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सुनील कुमार जैन ने जवाब प्रस्तुत करने के लिए तीन दिन का समय मांगा, जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया। हालांकि हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए कि अगली सुनवाई में रेलवे अधिकारी पूरी तैयारी के साथ उपस्थित हों और रेलवे गेट खोलने को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश व ठोस जानकारी पेश करें। MPRDC से पूछा-कब तक ठीक होगा पुल का टूटा हिस्सा हाईकोर्ट ने एमपीआरडीसी को भी निर्देश दिए हैं कि वह हलफनामा दाखिल कर बताए कि पुल के टूटे हुए हिस्से की मरम्मत का काम कितने समय में पूरा किया जाएगा। कोर्ट ने निर्माण कार्य की समय-सीमा और पूरा शेड्यूल पेश करने के आदेश दिए हैं। इस मामले में याचिकाकर्ता राजेश सिंह की ओर से अधिवक्ता आदित्य सिंह राजपूत ने पैरवी की, जबकि राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता अनुभव जैन ने पक्ष रखा। मामले की अगली सुनवाई 2 जुलाई 2026 को होगी। क्या है मामला राजधानी भोपाल को जबलपुर से जोड़ने वाले एनएच-45 पर शहपुरा के पास बना ब्रिज कुछ महीने पहले क्षतिग्रस्त होकर टूट गया था। रेलवे क्रॉसिंग के ऊपर बने इस पुल के खराब होने के बाद वाहनों का आवागमन प्रभावित हो गया और ट्रैफिक को शहपुरा के अंदर से डायवर्ट किया जाने लगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि वैकल्पिक मार्ग भी जर्जर स्थिति में हैं, जिससे आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसी वजह से क्षेत्रवासियों द्वारा लगातार मांग की जा रही है कि जब तक नया पुल तैयार नहीं होता, तब तक पुराने पौड़ी रेलवे गेट को आम लोगों की सुविधा के लिए दोबारा खोला जाए। हाईकोर्ट की सख्ती के बाद अब रेलवे और एमपीआरडीसी को अगली सुनवाई में यह स्पष्ट करना होगा कि रेलवे गेट खोलने और पुल मरम्मत को लेकर उनकी क्या योजना है।

Jun 27, 2026 - 06:50
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पौड़ी रेलवे गेट बंद रखने पर हाईकोर्ट सख्त:रेलवे और एमपीआरडीसी से मांगा जवाब; 2 जुलाई को होगी अगली सुनवाई
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर खंडपीठ ने पौड़ी (पउड़ी) रेलवे गेट बंद रखने और शहपुरा के पास क्षतिग्रस्त पुल के निर्माण में हो रही देरी को लेकर रेलवे और मध्यप्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीआरडीसी) को कड़ी फटकार लगाई है। जनहित याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करते हुए अदालत ने सवाल किया कि जब तक पुल का क्षतिग्रस्त हिस्सा ठीक नहीं हो जाता, तब तक आम लोगों की सुविधा के लिए रेलवे गेट क्यों नहीं खोला जा रहा है। सुनवाई के दौरान रेलवे की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सुनील कुमार जैन ने जवाब प्रस्तुत करने के लिए तीन दिन का समय मांगा, जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया। हालांकि हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए कि अगली सुनवाई में रेलवे अधिकारी पूरी तैयारी के साथ उपस्थित हों और रेलवे गेट खोलने को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश व ठोस जानकारी पेश करें। MPRDC से पूछा-कब तक ठीक होगा पुल का टूटा हिस्सा हाईकोर्ट ने एमपीआरडीसी को भी निर्देश दिए हैं कि वह हलफनामा दाखिल कर बताए कि पुल के टूटे हुए हिस्से की मरम्मत का काम कितने समय में पूरा किया जाएगा। कोर्ट ने निर्माण कार्य की समय-सीमा और पूरा शेड्यूल पेश करने के आदेश दिए हैं। इस मामले में याचिकाकर्ता राजेश सिंह की ओर से अधिवक्ता आदित्य सिंह राजपूत ने पैरवी की, जबकि राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता अनुभव जैन ने पक्ष रखा। मामले की अगली सुनवाई 2 जुलाई 2026 को होगी। क्या है मामला राजधानी भोपाल को जबलपुर से जोड़ने वाले एनएच-45 पर शहपुरा के पास बना ब्रिज कुछ महीने पहले क्षतिग्रस्त होकर टूट गया था। रेलवे क्रॉसिंग के ऊपर बने इस पुल के खराब होने के बाद वाहनों का आवागमन प्रभावित हो गया और ट्रैफिक को शहपुरा के अंदर से डायवर्ट किया जाने लगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि वैकल्पिक मार्ग भी जर्जर स्थिति में हैं, जिससे आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसी वजह से क्षेत्रवासियों द्वारा लगातार मांग की जा रही है कि जब तक नया पुल तैयार नहीं होता, तब तक पुराने पौड़ी रेलवे गेट को आम लोगों की सुविधा के लिए दोबारा खोला जाए। हाईकोर्ट की सख्ती के बाद अब रेलवे और एमपीआरडीसी को अगली सुनवाई में यह स्पष्ट करना होगा कि रेलवे गेट खोलने और पुल मरम्मत को लेकर उनकी क्या योजना है।