सांसद और विधायक के साथ मिलकर 500 पाैध लगाए:ज्ञानेश्वर पाटिल बोले- पेड़ मानव जीवन का आधार, मां के सम्मान में इनकी देखभाल करें
बुरहानपुर। नेपानगर क्षेत्र की ग्राम पंचायत घाघरला में 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत 500 पौधे लगाए गए। इस कार्यक्रम का आयोजन मां पोहरा देवी वूमेन एंड चिल्ड्रन वेल्फेयर सोसायटी, वन विभाग और ग्राम पंचायत ने मिलकर किया। खंडवा संसदीय क्षेत्र के सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल और नेपानगर विधायक मंजू राजेंद्र दादू ने इस वृक्षारोपण अभियान में हिस्सा लिया। उन्होंने जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और ग्रामीणों के साथ मिलकर पौधे लगाए और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने कहा कि पेड़ प्रकृति की धरोहर और मानव जीवन का आधार हैं। उन्होंने कोरोना काल में ऑक्सीजन की कमी का जिक्र करते हुए पेड़ों के महत्व पर जोर दिया। पाटिल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान को जनआंदोलन बताया और सभी से मां के सम्मान में एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल करने का संकल्प लेने की अपील की। उन्होंने केंद्र और राज्य की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी दी। विधायक मंजू दादू ने स्थानीय कोरकू भाषा में ग्रामीणों से संवाद किया और उन्हें पेड़ों का महत्व समझाया। उनके संदेश से ग्रामीणों में उत्साह दिखा और सभी ने इस अभियान को सफल बनाने का संकल्प लिया।
बुरहानपुर। नेपानगर क्षेत्र की ग्राम पंचायत घाघरला में 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत 500 पौधे लगाए गए। इस कार्यक्रम का आयोजन मां पोहरा देवी वूमेन एंड चिल्ड्रन वेल्फेयर सोसायटी, वन विभाग और ग्राम पंचायत ने मिलकर किया। खंडवा संसदीय क्षेत्र के सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल और नेपानगर विधायक मंजू राजेंद्र दादू ने इस वृक्षारोपण अभियान में हिस्सा लिया। उन्होंने जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और ग्रामीणों के साथ मिलकर पौधे लगाए और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने कहा कि पेड़ प्रकृति की धरोहर और मानव जीवन का आधार हैं। उन्होंने कोरोना काल में ऑक्सीजन की कमी का जिक्र करते हुए पेड़ों के महत्व पर जोर दिया। पाटिल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान को जनआंदोलन बताया और सभी से मां के सम्मान में एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल करने का संकल्प लेने की अपील की। उन्होंने केंद्र और राज्य की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी दी। विधायक मंजू दादू ने स्थानीय कोरकू भाषा में ग्रामीणों से संवाद किया और उन्हें पेड़ों का महत्व समझाया। उनके संदेश से ग्रामीणों में उत्साह दिखा और सभी ने इस अभियान को सफल बनाने का संकल्प लिया।