विशेषज्ञों ने हाथी-मानव द्वंद्व रोकने पर मंथन किया:मुखिया हाथी को कॉलर, निगरानी और त्वरित मुआवजे पर जोर

उमरिया। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में जंगली हाथियों की बढ़ती गतिविधियों और मानव-हाथी द्वंद्व की घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इसमें विशेषज्ञों और वन अधिकारियों ने सुरक्षित सह-अस्तित्व, नुकसान की रोकथाम और प्रभावी निगरानी पर मंथन किया। यह बैठक बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के साथ-साथ शहडोल, अनूपपुर और छत्तीसगढ़ से लगे जंगलों में हाथियों की बढ़ती मौजूदगी के मद्देनजर बुलाई गई थी। बैठक में प्रधान मुख्य वन संरक्षक समिता राजोरा, तमिलनाडु, देहरादून, संजय टाइगर रिजर्व और बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के अधिकारियों, वन्यजीव चिकित्सकों तथा विशेषज्ञों ने भाग लिया। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि हाथियों द्वारा फसल, मकान या अन्य संपत्ति को हुए नुकसान का सही आकलन कर प्रभावित ग्रामीणों को त्वरित मुआवजा दिया जाए। इससे वन विभाग और स्थानीय ग्रामीणों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा। विशेषज्ञों ने हाथियों के पारंपरिक आवागमन मार्गों में किसी भी प्रकार का अवरोध न करने पर जोर दिया। जिन क्षेत्रों में हाथियों का नियमित विचरण होता है, वहां निगरानी दलों की तैनाती और सतत मॉनिटरिंग की व्यवस्था मजबूत करने का सुझाव दिया गया। एक महत्वपूर्ण सुझाव यह भी था कि हाथियों के झुंड की पहचान कर उसके मुखिया हाथी को रेडियो कॉलर पहनाया जाए। रेडियो कॉलर से हाथियों की वास्तविक समय की लोकेशन और मूवमेंट पर नजर रखी जा सकेगी। इससे समय रहते ग्रामीणों को हाथियों की मौजूदगी के बारे में सतर्क किया जा सकेगा, जिससे मानव-हाथी द्वंद्व की घटनाओं को कम करने में मदद मिलेगी। बैठक में हाथियों के आवागमन वाले क्षेत्रों से उन गतिविधियों और बाधाओं को दूर करने पर भी बल दिया गया, जिनसे उन्हें परेशानी होती है। राष्ट्रीय राजमार्ग, रेलवे लाइन और अन्य विकास परियोजनाओं की योजना बनाते समय हाथियों के गलियारों (कॉरिडोर) और उनके प्राकृतिक विचरण क्षेत्र का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी गई। बैठक के समापन के बाद, शनिवार सुबह प्रधान मुख्य वन संरक्षक और अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी जंगल भ्रमण के लिए रवाना हुए। इस दौरान वे हाथियों की गतिविधियों का जायजा लेंगे और क्षेत्रीय अधिकारियों से मानव-हाथी द्वंद्व की वर्तमान स्थिति तथा किए जा रहे प्रबंधन उपायों के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे।

Jul 18, 2026 - 08:31
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विशेषज्ञों ने हाथी-मानव द्वंद्व रोकने पर मंथन किया:मुखिया हाथी को कॉलर, निगरानी और त्वरित मुआवजे पर जोर
उमरिया। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में जंगली हाथियों की बढ़ती गतिविधियों और मानव-हाथी द्वंद्व की घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इसमें विशेषज्ञों और वन अधिकारियों ने सुरक्षित सह-अस्तित्व, नुकसान की रोकथाम और प्रभावी निगरानी पर मंथन किया। यह बैठक बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के साथ-साथ शहडोल, अनूपपुर और छत्तीसगढ़ से लगे जंगलों में हाथियों की बढ़ती मौजूदगी के मद्देनजर बुलाई गई थी। बैठक में प्रधान मुख्य वन संरक्षक समिता राजोरा, तमिलनाडु, देहरादून, संजय टाइगर रिजर्व और बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के अधिकारियों, वन्यजीव चिकित्सकों तथा विशेषज्ञों ने भाग लिया। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि हाथियों द्वारा फसल, मकान या अन्य संपत्ति को हुए नुकसान का सही आकलन कर प्रभावित ग्रामीणों को त्वरित मुआवजा दिया जाए। इससे वन विभाग और स्थानीय ग्रामीणों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा। विशेषज्ञों ने हाथियों के पारंपरिक आवागमन मार्गों में किसी भी प्रकार का अवरोध न करने पर जोर दिया। जिन क्षेत्रों में हाथियों का नियमित विचरण होता है, वहां निगरानी दलों की तैनाती और सतत मॉनिटरिंग की व्यवस्था मजबूत करने का सुझाव दिया गया। एक महत्वपूर्ण सुझाव यह भी था कि हाथियों के झुंड की पहचान कर उसके मुखिया हाथी को रेडियो कॉलर पहनाया जाए। रेडियो कॉलर से हाथियों की वास्तविक समय की लोकेशन और मूवमेंट पर नजर रखी जा सकेगी। इससे समय रहते ग्रामीणों को हाथियों की मौजूदगी के बारे में सतर्क किया जा सकेगा, जिससे मानव-हाथी द्वंद्व की घटनाओं को कम करने में मदद मिलेगी। बैठक में हाथियों के आवागमन वाले क्षेत्रों से उन गतिविधियों और बाधाओं को दूर करने पर भी बल दिया गया, जिनसे उन्हें परेशानी होती है। राष्ट्रीय राजमार्ग, रेलवे लाइन और अन्य विकास परियोजनाओं की योजना बनाते समय हाथियों के गलियारों (कॉरिडोर) और उनके प्राकृतिक विचरण क्षेत्र का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी गई। बैठक के समापन के बाद, शनिवार सुबह प्रधान मुख्य वन संरक्षक और अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी जंगल भ्रमण के लिए रवाना हुए। इस दौरान वे हाथियों की गतिविधियों का जायजा लेंगे और क्षेत्रीय अधिकारियों से मानव-हाथी द्वंद्व की वर्तमान स्थिति तथा किए जा रहे प्रबंधन उपायों के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे।