मलेरिया रोकथाम के लिए हॉट स्पॉट चिन्हित करने पर जोर:बुरहानपुर में ग्राम पंचायतों को पानी की टेस्टिंग नियमित रूप से करने की ताकीद
स्टॉप डायरिया अभियान के तहत शुक्रवार को खकनार जनपद पंचायत में एक बैठक सह कार्यशाला का आयोजन किया गया। सीईओ सुनीता बघेल की अध्यक्षता में हुई इस कार्यशाला में जलजनित बीमारियों की रोकथाम और मलेरिया के हॉट स्पॉट चिन्हित करने पर जोर दिया गया। कार्यशाला में खकनार और नेपानगर क्षेत्र की ग्राम पंचायतों के सरपंच, सचिव, जनपद उपयंत्री, रोजगार सहायक सहित स्वास्थ्य और पीएचई विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। पीएचई विभाग के जिला समन्वयक राजेश ठाकुर ने अभियान के उद्देश्यों और जलजनित बीमारियों की रोकथाम पर जानकारी दी। ठाकुर ने बताया कि प्रत्येक ग्राम में नल-जल योजनाओं के पेयजल स्रोतों के आसपास स्वच्छता बनाए रखना, नियमित क्लोरीनेशन करना और पाइपलाइन लीकेज की तत्काल मरम्मत करना आवश्यक है। उन्होंने विशेष रूप से क्षतिग्रस्त या बिना टोंटी वाले नल कनेक्शनों को तुरंत ठीक करने और टोंटी लगाने पर जोर दिया, ताकि वर्षा ऋतु में दूषित पानी पाइपलाइन में प्रवेश न कर सके। पेयजल गुणवत्ता की जांच करने के निर्देश
ग्राम पंचायतों को फील्ड टेस्टिंग किट के माध्यम से नियमित रूप से पेयजल गुणवत्ता की जांच करने के निर्देश दिए गए। पेयजल नलकूपों, कुओं, उच्च स्तरीय टंकियों और सम्पवेल सहित सभी पेयजल स्रोतों की साफ-सफाई सुनिश्चित करने को कहा गया। साथ ही, प्रत्येक ग्राम पंचायत को आपात स्थिति के लिए ब्लीचिंग पाउडर का पर्याप्त भंडारण रखने के निर्देश दिए गए। ग्रामीणों को व्यक्तिगत स्वच्छता, घरों की स्वच्छता और सुरक्षित पेयजल के प्रति जागरूक करने का भी आह्वान किया गया। स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रभारी मलेरिया शाखा राजेश दोर्वेकर ने बताया कि जिले के कई मजदूर काम के लिए सूरत, गुजरात जाते हैं और लौटने पर मलेरिया से पीड़ित होते हैं। उन्होंने मलेरिया के हॉट स्पॉट चिन्हित करने की आवश्यकता पर बल दिया। दोर्वेकर ने बताया कि स्टॉप डायरिया अभियान 14 जुलाई से 31 अगस्त 2026 तक संचालित किया जा रहा है। इस अभियान के तहत आशा, आंगनवाड़ी और महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता घर-घर जाकर 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों वाले परिवारों को ओआरएस, जिंक की गोलियां, विटामिन ए घोल और आयरन की दवा उपलब्ध कराएंगी, साथ ही उनके उपयोग की जानकारी भी देंगी। जनजागरूकता गतिविधियां संचालित होंगी
साथ ही निमोनिया की पहचान, कुपोषित बच्चों का चिन्हांकन, वृद्धि, विकास की निगरानी, जनजागरूकता गतिविधियां भी संचालित की जाएंगी। उन्होंने बताया कि डायरिया, निमोनिया पांच वर्ष तक के बच्चों में मृत्यु के प्रमुख कारण हैं, जिन्हें समय पर उपचार एवं जागरूकता से रोका जा सकता है। बरसात के मौसम में डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया की रोकथाम के लिए ग्रामों में नियमित साफ सफाई, नालियों की सफाई, जलभराव रोकने पर विशेष ध्यान देने, बीमारी की सूचना तत्काल स्वास्थ्य विभाग, पीएचई विभाग को देने के निर्देश भी दिए गए। उनके द्वारा डायरिया, मलेरिया, डेंगू के कारणों लक्षणों व उसके बचाव की जानकारी देकर जागरूक किया गया। सुरक्षित पेयजल के महत्व पर जानकारी दी
जिला मलेरिया अधिकारी सुनील कुमार रोमडे़ ने डायरिया, मलेरिया डेंगू के तकनीकी पहलु पर जानकारी देकर जागरूक किया। कार्यशाला में पीएचई विभाग के विकासखंड समन्वयक नीलेश बोर्डे ने फील्ड टेस्टिंग किट के माध्यम से विभिन्न ग्राम पंचायतों से लाए गए जल नमूनों की जांच कर पेयजल गुणवत्ता के विभिन्न मानकों, सुरक्षित पेयजल के महत्व पर जानकारी दी। मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुनीता बघेल ने सभी ग्राम पंचायतों को निर्देशित किया कि डायरिया से बचाव के लिए आवश्यक सभी कदम गंभीरता से उठाए जाएं। नियमित रूप से पेयजल की गुणवत्ता की जांच कराई जाए। पेयजल स्रोतों के आसपास स्वच्छता बनाए रखी जाए। किसी भी बीमारी की आशंका होने पर तत्काल स्वास्थ्य विभाग, पीएचई विभाग को सूचना दी जाए। उन्होंने कहा कि यह कार्यशाला ग्राम पंचायतों के लिए अत्यंत उपयोगी रही है। इससे प्राप्त मार्गदर्शन के माध्यम से डायरिया, अन्य जलजनित बीमारियों की प्रभावी रोकथाम में महत्वपूर्ण सहयोग मिलेगा। बैठक में सभी ग्राम पंचायतों के सरपंच, सचिव, जनपद उपयंत्री, रोजगार सहायक, संबंधित विभागों के अधिकारी, कर्मचारी उपस्थित रहे।
स्टॉप डायरिया अभियान के तहत शुक्रवार को खकनार जनपद पंचायत में एक बैठक सह कार्यशाला का आयोजन किया गया। सीईओ सुनीता बघेल की अध्यक्षता में हुई इस कार्यशाला में जलजनित बीमारियों की रोकथाम और मलेरिया के हॉट स्पॉट चिन्हित करने पर जोर दिया गया। कार्यशाला में खकनार और नेपानगर क्षेत्र की ग्राम पंचायतों के सरपंच, सचिव, जनपद उपयंत्री, रोजगार सहायक सहित स्वास्थ्य और पीएचई विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। पीएचई विभाग के जिला समन्वयक राजेश ठाकुर ने अभियान के उद्देश्यों और जलजनित बीमारियों की रोकथाम पर जानकारी दी। ठाकुर ने बताया कि प्रत्येक ग्राम में नल-जल योजनाओं के पेयजल स्रोतों के आसपास स्वच्छता बनाए रखना, नियमित क्लोरीनेशन करना और पाइपलाइन लीकेज की तत्काल मरम्मत करना आवश्यक है। उन्होंने विशेष रूप से क्षतिग्रस्त या बिना टोंटी वाले नल कनेक्शनों को तुरंत ठीक करने और टोंटी लगाने पर जोर दिया, ताकि वर्षा ऋतु में दूषित पानी पाइपलाइन में प्रवेश न कर सके। पेयजल गुणवत्ता की जांच करने के निर्देश
ग्राम पंचायतों को फील्ड टेस्टिंग किट के माध्यम से नियमित रूप से पेयजल गुणवत्ता की जांच करने के निर्देश दिए गए। पेयजल नलकूपों, कुओं, उच्च स्तरीय टंकियों और सम्पवेल सहित सभी पेयजल स्रोतों की साफ-सफाई सुनिश्चित करने को कहा गया। साथ ही, प्रत्येक ग्राम पंचायत को आपात स्थिति के लिए ब्लीचिंग पाउडर का पर्याप्त भंडारण रखने के निर्देश दिए गए। ग्रामीणों को व्यक्तिगत स्वच्छता, घरों की स्वच्छता और सुरक्षित पेयजल के प्रति जागरूक करने का भी आह्वान किया गया। स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रभारी मलेरिया शाखा राजेश दोर्वेकर ने बताया कि जिले के कई मजदूर काम के लिए सूरत, गुजरात जाते हैं और लौटने पर मलेरिया से पीड़ित होते हैं। उन्होंने मलेरिया के हॉट स्पॉट चिन्हित करने की आवश्यकता पर बल दिया। दोर्वेकर ने बताया कि स्टॉप डायरिया अभियान 14 जुलाई से 31 अगस्त 2026 तक संचालित किया जा रहा है। इस अभियान के तहत आशा, आंगनवाड़ी और महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता घर-घर जाकर 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों वाले परिवारों को ओआरएस, जिंक की गोलियां, विटामिन ए घोल और आयरन की दवा उपलब्ध कराएंगी, साथ ही उनके उपयोग की जानकारी भी देंगी। जनजागरूकता गतिविधियां संचालित होंगी
साथ ही निमोनिया की पहचान, कुपोषित बच्चों का चिन्हांकन, वृद्धि, विकास की निगरानी, जनजागरूकता गतिविधियां भी संचालित की जाएंगी। उन्होंने बताया कि डायरिया, निमोनिया पांच वर्ष तक के बच्चों में मृत्यु के प्रमुख कारण हैं, जिन्हें समय पर उपचार एवं जागरूकता से रोका जा सकता है। बरसात के मौसम में डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया की रोकथाम के लिए ग्रामों में नियमित साफ सफाई, नालियों की सफाई, जलभराव रोकने पर विशेष ध्यान देने, बीमारी की सूचना तत्काल स्वास्थ्य विभाग, पीएचई विभाग को देने के निर्देश भी दिए गए। उनके द्वारा डायरिया, मलेरिया, डेंगू के कारणों लक्षणों व उसके बचाव की जानकारी देकर जागरूक किया गया। सुरक्षित पेयजल के महत्व पर जानकारी दी
जिला मलेरिया अधिकारी सुनील कुमार रोमडे़ ने डायरिया, मलेरिया डेंगू के तकनीकी पहलु पर जानकारी देकर जागरूक किया। कार्यशाला में पीएचई विभाग के विकासखंड समन्वयक नीलेश बोर्डे ने फील्ड टेस्टिंग किट के माध्यम से विभिन्न ग्राम पंचायतों से लाए गए जल नमूनों की जांच कर पेयजल गुणवत्ता के विभिन्न मानकों, सुरक्षित पेयजल के महत्व पर जानकारी दी। मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुनीता बघेल ने सभी ग्राम पंचायतों को निर्देशित किया कि डायरिया से बचाव के लिए आवश्यक सभी कदम गंभीरता से उठाए जाएं। नियमित रूप से पेयजल की गुणवत्ता की जांच कराई जाए। पेयजल स्रोतों के आसपास स्वच्छता बनाए रखी जाए। किसी भी बीमारी की आशंका होने पर तत्काल स्वास्थ्य विभाग, पीएचई विभाग को सूचना दी जाए। उन्होंने कहा कि यह कार्यशाला ग्राम पंचायतों के लिए अत्यंत उपयोगी रही है। इससे प्राप्त मार्गदर्शन के माध्यम से डायरिया, अन्य जलजनित बीमारियों की प्रभावी रोकथाम में महत्वपूर्ण सहयोग मिलेगा। बैठक में सभी ग्राम पंचायतों के सरपंच, सचिव, जनपद उपयंत्री, रोजगार सहायक, संबंधित विभागों के अधिकारी, कर्मचारी उपस्थित रहे।