टीईटी अनिवार्यता पर बेसिक शिक्षकों का प्रदर्शन:केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी का पुतला फूंका, वादाखिलाफी का आरोप
टीईटी अनिवार्यता पर बेसिक शिक्षकों का प्रदर्शन:केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी का पुतला फूंका, वादाखिलाफी का आरोप
गाजीपुर में बेसिक शिक्षकों ने बुधवार को टीईटी अनिवार्यता के विरोध में प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी कार्यालय के सामने उनका पुतला फूंका और नारेबाजी की। यह विरोध सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर 2025 के आदेश के बाद हो रहा है, जिसके अनुसार बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षक के रूप में नियुक्ति के लिए टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) पास करना अनिवार्य होगा। इस आदेश के तहत, जिन शिक्षकों की सेवा में पांच वर्ष से अधिक समय शेष है, उन्हें दो वर्ष के भीतर टीईटी उत्तीर्ण करनी होगी। वहीं, जिन शिक्षकों की सेवा पांच वर्ष से कम बची है, उन्हें टीईटी पास किए बिना सेवानिवृत्ति तक सेवा में बने रहने की छूट दी गई है। हालांकि, ऐसे शिक्षक पदोन्नति के पात्र नहीं होंगे। शिक्षकों का आरोप है कि मंत्री ने संगठन के प्रतिनिधियों के साथ हुई वार्ता में उनके हित में सकारात्मक निर्णय लेने का आश्वासन दिया था। हालांकि, 9 फरवरी 2026 को सदन में एक प्रश्न के उत्तर में मंत्री ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला दिया, जिससे शिक्षकों में भारी नाराजगी फैल गई। इसी के विरोध में शिक्षकों ने जुलूस निकाला, जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया और पुतला दहन कर अपना आक्रोश व्यक्त किया।
गाजीपुर में बेसिक शिक्षकों ने बुधवार को टीईटी अनिवार्यता के विरोध में प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी कार्यालय के सामने उनका पुतला फूंका और नारेबाजी की। यह विरोध सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर 2025 के आदेश के बाद हो रहा है, जिसके अनुसार बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षक के रूप में नियुक्ति के लिए टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) पास करना अनिवार्य होगा। इस आदेश के तहत, जिन शिक्षकों की सेवा में पांच वर्ष से अधिक समय शेष है, उन्हें दो वर्ष के भीतर टीईटी उत्तीर्ण करनी होगी। वहीं, जिन शिक्षकों की सेवा पांच वर्ष से कम बची है, उन्हें टीईटी पास किए बिना सेवानिवृत्ति तक सेवा में बने रहने की छूट दी गई है। हालांकि, ऐसे शिक्षक पदोन्नति के पात्र नहीं होंगे। शिक्षकों का आरोप है कि मंत्री ने संगठन के प्रतिनिधियों के साथ हुई वार्ता में उनके हित में सकारात्मक निर्णय लेने का आश्वासन दिया था। हालांकि, 9 फरवरी 2026 को सदन में एक प्रश्न के उत्तर में मंत्री ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला दिया, जिससे शिक्षकों में भारी नाराजगी फैल गई। इसी के विरोध में शिक्षकों ने जुलूस निकाला, जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया और पुतला दहन कर अपना आक्रोश व्यक्त किया।