रीवा आई थी 'शोमैन' राज कपूर की बारात:पुण्यतिथि आज; विंध्य नगरी में हुआ था विवाह, पत्नी के नाम पर बना है ऑडिटोरियम
भारतीय सिनेमा के महान अभिनेता, निर्माता और निर्देशक राज कपूर की पुण्यतिथि पर आज पूरा देश उन्हें श्रद्धांजलि दे रहा है। हिंदी सिनेमा को वैश्विक पहचान देने वाले "शोमैन" राज कपूर का मध्य प्रदेश के रीवा शहर से एक बेहद खास और ऐतिहासिक रिश्ता रहा है। बहुत कम लोग जानते हैं कि मई 1946 में राज कपूर की बारात रीवा आई थी और इसी विंध्य नगरी में उनका विवाह संपन्न हुआ था, जो उनके जीवन की सबसे महत्वपूर्ण यादों में शुमार रहा। आईजी के सरकारी बंगले में हुआ था विवाह समारोह
ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, मई 1946 में राज कपूर का विवाह कृष्णा मल्होत्रा से हुआ था, जो शादी के बाद कृष्णा राज कपूर के नाम से जानी गईं। उस समय उनके पिता करतार नाथ मल्होत्रा विंध्य क्षेत्र में पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) के पद पर पदस्थ थे और उनकी पोस्टिंग रीवा में ही थी। इसी वजह से इस हाई-प्रोफाइल विवाह समारोह का आयोजन रीवा स्थित तत्कालीन सरकारी बंगले में किया गया था। यह भव्य आयोजन उस दौर में पूरे शहर की सबसे चर्चित घटनाओं में से एक था। स्मृतियों को सहेजने के लिए बना 'कृष्णा राज कपूर ऑडिटोरियम'
रीवा और कपूर परिवार के इस अटूट रिश्ते की चर्चा कई दशकों बाद भी लगातार होती रही। साल 2020 में जब दिग्गज अभिनेता ऋषि कपूर का निधन हुआ, तब राष्ट्रीय मीडिया ने भी रीवा और इस परिवार के ऐतिहासिक संबंधों को प्रमुखता से रेखांकित किया था। कपूर परिवार की इन अनमोल स्मृतियों को सम्मान देने के लिए बाद में रीवा में 'कृष्णा राज कपूर' के नाम पर एक भव्य ऑडिटोरियम का निर्माण कराया गया। आज यह ऑडिटोरियम रीवा की मुख्य पहचान बन चुका है, जहां बड़े सांस्कृतिक, सामाजिक, शासकीय और औद्योगिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं। रीवा शहर के नाम पर ही रखा बेटी 'रीमा' का नाम!
स्थानीय स्तर पर वर्षों से एक और बेहद रोचक किस्सा चर्चा में रहा है। बताया जाता है कि राज कपूर और कृष्णा कपूर ने रीवा शहर के प्रति अपनी अटूट आस्था और लगाव के कारण ही अपनी बेटी का नाम 'रीमा जैन' रखा था। यह दिलचस्प कहानी आज भी रीवा के लोगों के बीच कपूर परिवार के साथ उनके गहरे जुड़ाव की याद के रूप में बड़े चाव से सुनी और सुनाई जाती है। वैश्विक पहचान के बीच विंध्य नगरी का गौरव
रीवा वैसे तो अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, राजघराने और सफेद बाघों (व्हाइट टाइगर) के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है, लेकिन राज कपूर से जुड़ा यह अध्याय शहर की ऐतिहासिक पहचान को एक अलग और अनूठा आयाम देता है। राज कपूर ने 'आवारा', 'श्री 420', 'बरसात', 'संगम', 'जिस देश में गंगा बहती है' और 'मेरा नाम जोकर' जैसी कालजयी फिल्मों के जरिए आम आदमी के संघर्ष को परदे पर उतारा और हिंदी सिनेमा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित किया। रूस सहित कई देशों में आज भी उनके गीतों को बेहद पसंद किया जाता है। ऐसे महान शोमैन के स्वर्णिम इतिहास से जुड़ना रीवा के लिए हमेशा गर्व की बात रहेगी।
भारतीय सिनेमा के महान अभिनेता, निर्माता और निर्देशक राज कपूर की पुण्यतिथि पर आज पूरा देश उन्हें श्रद्धांजलि दे रहा है। हिंदी सिनेमा को वैश्विक पहचान देने वाले "शोमैन" राज कपूर का मध्य प्रदेश के रीवा शहर से एक बेहद खास और ऐतिहासिक रिश्ता रहा है। बहुत कम लोग जानते हैं कि मई 1946 में राज कपूर की बारात रीवा आई थी और इसी विंध्य नगरी में उनका विवाह संपन्न हुआ था, जो उनके जीवन की सबसे महत्वपूर्ण यादों में शुमार रहा। आईजी के सरकारी बंगले में हुआ था विवाह समारोह
ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, मई 1946 में राज कपूर का विवाह कृष्णा मल्होत्रा से हुआ था, जो शादी के बाद कृष्णा राज कपूर के नाम से जानी गईं। उस समय उनके पिता करतार नाथ मल्होत्रा विंध्य क्षेत्र में पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) के पद पर पदस्थ थे और उनकी पोस्टिंग रीवा में ही थी। इसी वजह से इस हाई-प्रोफाइल विवाह समारोह का आयोजन रीवा स्थित तत्कालीन सरकारी बंगले में किया गया था। यह भव्य आयोजन उस दौर में पूरे शहर की सबसे चर्चित घटनाओं में से एक था। स्मृतियों को सहेजने के लिए बना 'कृष्णा राज कपूर ऑडिटोरियम'
रीवा और कपूर परिवार के इस अटूट रिश्ते की चर्चा कई दशकों बाद भी लगातार होती रही। साल 2020 में जब दिग्गज अभिनेता ऋषि कपूर का निधन हुआ, तब राष्ट्रीय मीडिया ने भी रीवा और इस परिवार के ऐतिहासिक संबंधों को प्रमुखता से रेखांकित किया था। कपूर परिवार की इन अनमोल स्मृतियों को सम्मान देने के लिए बाद में रीवा में 'कृष्णा राज कपूर' के नाम पर एक भव्य ऑडिटोरियम का निर्माण कराया गया। आज यह ऑडिटोरियम रीवा की मुख्य पहचान बन चुका है, जहां बड़े सांस्कृतिक, सामाजिक, शासकीय और औद्योगिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं। रीवा शहर के नाम पर ही रखा बेटी 'रीमा' का नाम!
स्थानीय स्तर पर वर्षों से एक और बेहद रोचक किस्सा चर्चा में रहा है। बताया जाता है कि राज कपूर और कृष्णा कपूर ने रीवा शहर के प्रति अपनी अटूट आस्था और लगाव के कारण ही अपनी बेटी का नाम 'रीमा जैन' रखा था। यह दिलचस्प कहानी आज भी रीवा के लोगों के बीच कपूर परिवार के साथ उनके गहरे जुड़ाव की याद के रूप में बड़े चाव से सुनी और सुनाई जाती है। वैश्विक पहचान के बीच विंध्य नगरी का गौरव
रीवा वैसे तो अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, राजघराने और सफेद बाघों (व्हाइट टाइगर) के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है, लेकिन राज कपूर से जुड़ा यह अध्याय शहर की ऐतिहासिक पहचान को एक अलग और अनूठा आयाम देता है। राज कपूर ने 'आवारा', 'श्री 420', 'बरसात', 'संगम', 'जिस देश में गंगा बहती है' और 'मेरा नाम जोकर' जैसी कालजयी फिल्मों के जरिए आम आदमी के संघर्ष को परदे पर उतारा और हिंदी सिनेमा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित किया। रूस सहित कई देशों में आज भी उनके गीतों को बेहद पसंद किया जाता है। ऐसे महान शोमैन के स्वर्णिम इतिहास से जुड़ना रीवा के लिए हमेशा गर्व की बात रहेगी।