दुर्ग में अधिवक्ता पर धोखाधड़ी का FIR दर्ज:प्रीमियम माफी का झांसा देकर बुजुर्ग से 4 लाख ठगे, कमिश्नर से पहचान बताकर ऐंठे रकम

दुर्ग नगर निगम में प्रीमियम राशि माफ कराने का झांसा देकर लाखों रुपये लेने के आरोप में एक अधिवक्ता के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी न्यायालय के निर्देश पर मोहन नगर थाना पुलिस ने अधिवक्ता मयंक सिंह राजपूत के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामले के परिवादी 71 वर्षीय दिलीप बावनकर, निवासी पुष्पवाटिका रोड, दुर्ग हैं। उन्होंने न्यायालय में प्रस्तुत परिवाद में बताया कि अगस्त 2025 में इंदिरा मार्केट स्थित अपनी दुकान से जुड़े मामले में कानूनी सलाह लेने के लिए उनकी मुलाकात अधिवक्ता मयंक सिंह राजपूत से हुई थी। दुकान के मामले में ली थी कानूनी सलाह नगर निगम उनकी दुकान के लिए करीब 12.70 लाख रुपये प्रीमियम राशि और मासिक किराया जमा करने की मांग कर रहा था। इसी समस्या के समाधान के लिए उन्होंने अधिवक्ता से संपर्क किया था। कमिश्नर से पहचान बताकर मांगे 4 लाख परिवाद के अनुसार, अधिवक्ता ने दावा किया कि उनकी नगर निगम आयुक्त से अच्छी पहचान है और वे प्रीमियम राशि माफ करवा सकते हैं। आरोप है कि बाद में उन्होंने परिवादी को अपने कार्यालय बुलाकर कहा कि इस काम के लिए कमिश्नर की ओर से 4 लाख रुपये मांगे गए हैं। बावनकर ने अधिवक्ता की बातों पर विश्वास करते हुए 4 लाख रुपये नकद दिए। इसके अलावा 20 हजार रुपये अधिवक्ता फीस के रूप में भी भुगतान किए। निगम पहुंचने पर खुली हकीकत कुछ समय बीत जाने के बाद भी कोई प्रगति नहीं होने पर दिलीप बावनकर नगर निगम पहुंचे। वहां उन्हें जानकारी मिली कि प्रीमियम राशि माफ करने का कोई प्रावधान नहीं है और आयुक्त के पास भी ऐसी राशि माफ करने का अधिकार नहीं है। इसके बाद उन्होंने अधिवक्ता से जवाब और अपनी रकम वापस मांगी। 2 लाख लौटाए, बाकी देने से इंकार परिवादी का आरोप है कि अधिवक्ता ने कुल 4 लाख रुपये में से केवल 2 लाख रुपये वापस किए। शेष 2 लाख रुपये लौटाने से इंकार कर दिया। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि आरोपी ने अपने प्रभावशाली और आपराधिक संपर्कों का हवाला देकर उन्हें धमकाया। पुलिस कार्रवाई नहीं होने पर कोर्ट पहुंचे दिलीप बावनकर के मुताबिक उन्होंने 19 अक्टूबर 2025 को मोहन नगर थाने में शिकायत दी थी। बाद में 24 अक्टूबर को पुलिस अधीक्षक दुर्ग को भी आवेदन सौंपा गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने न्यायालय में मजिस्ट्रेट के समक्ष शिकायत दायर किया। कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुई FIR न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी दुर्ग के आदेश के बाद मोहन नगर थाना पुलिस ने अधिवक्ता मयंक सिंह राजपूत के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। पुलिस अब दस्तावेजों, गवाहों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच कर रही है। गवाहों के बयान होंगे महत्वपूर्ण मामले में परिवादी के अलावा मायाराम साहू और सतीश देवांगन को भी गवाह बनाया गया है। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान इनके बयान महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उधर, आरोपों को लेकर अधिवक्ता मयंक सिंह राजपूत से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

Jun 16, 2026 - 18:33
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दुर्ग में अधिवक्ता पर धोखाधड़ी का FIR दर्ज:प्रीमियम माफी का झांसा देकर बुजुर्ग से 4 लाख ठगे, कमिश्नर से पहचान बताकर ऐंठे रकम
दुर्ग नगर निगम में प्रीमियम राशि माफ कराने का झांसा देकर लाखों रुपये लेने के आरोप में एक अधिवक्ता के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी न्यायालय के निर्देश पर मोहन नगर थाना पुलिस ने अधिवक्ता मयंक सिंह राजपूत के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामले के परिवादी 71 वर्षीय दिलीप बावनकर, निवासी पुष्पवाटिका रोड, दुर्ग हैं। उन्होंने न्यायालय में प्रस्तुत परिवाद में बताया कि अगस्त 2025 में इंदिरा मार्केट स्थित अपनी दुकान से जुड़े मामले में कानूनी सलाह लेने के लिए उनकी मुलाकात अधिवक्ता मयंक सिंह राजपूत से हुई थी। दुकान के मामले में ली थी कानूनी सलाह नगर निगम उनकी दुकान के लिए करीब 12.70 लाख रुपये प्रीमियम राशि और मासिक किराया जमा करने की मांग कर रहा था। इसी समस्या के समाधान के लिए उन्होंने अधिवक्ता से संपर्क किया था। कमिश्नर से पहचान बताकर मांगे 4 लाख परिवाद के अनुसार, अधिवक्ता ने दावा किया कि उनकी नगर निगम आयुक्त से अच्छी पहचान है और वे प्रीमियम राशि माफ करवा सकते हैं। आरोप है कि बाद में उन्होंने परिवादी को अपने कार्यालय बुलाकर कहा कि इस काम के लिए कमिश्नर की ओर से 4 लाख रुपये मांगे गए हैं। बावनकर ने अधिवक्ता की बातों पर विश्वास करते हुए 4 लाख रुपये नकद दिए। इसके अलावा 20 हजार रुपये अधिवक्ता फीस के रूप में भी भुगतान किए। निगम पहुंचने पर खुली हकीकत कुछ समय बीत जाने के बाद भी कोई प्रगति नहीं होने पर दिलीप बावनकर नगर निगम पहुंचे। वहां उन्हें जानकारी मिली कि प्रीमियम राशि माफ करने का कोई प्रावधान नहीं है और आयुक्त के पास भी ऐसी राशि माफ करने का अधिकार नहीं है। इसके बाद उन्होंने अधिवक्ता से जवाब और अपनी रकम वापस मांगी। 2 लाख लौटाए, बाकी देने से इंकार परिवादी का आरोप है कि अधिवक्ता ने कुल 4 लाख रुपये में से केवल 2 लाख रुपये वापस किए। शेष 2 लाख रुपये लौटाने से इंकार कर दिया। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि आरोपी ने अपने प्रभावशाली और आपराधिक संपर्कों का हवाला देकर उन्हें धमकाया। पुलिस कार्रवाई नहीं होने पर कोर्ट पहुंचे दिलीप बावनकर के मुताबिक उन्होंने 19 अक्टूबर 2025 को मोहन नगर थाने में शिकायत दी थी। बाद में 24 अक्टूबर को पुलिस अधीक्षक दुर्ग को भी आवेदन सौंपा गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने न्यायालय में मजिस्ट्रेट के समक्ष शिकायत दायर किया। कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुई FIR न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी दुर्ग के आदेश के बाद मोहन नगर थाना पुलिस ने अधिवक्ता मयंक सिंह राजपूत के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। पुलिस अब दस्तावेजों, गवाहों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच कर रही है। गवाहों के बयान होंगे महत्वपूर्ण मामले में परिवादी के अलावा मायाराम साहू और सतीश देवांगन को भी गवाह बनाया गया है। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान इनके बयान महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उधर, आरोपों को लेकर अधिवक्ता मयंक सिंह राजपूत से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।