ताजिया निर्माण अनुमति विवाद पर हाई कोर्ट में सुनवाई:सरकारी ताजिया समिति की सदस्यता के दस्तावेज मांगे; 25 जून को अगली सुनवाई
धार के हटवाड़ा स्थित सरकारी इमामबाड़े में मोहर्रम के दौरान ताजिया निर्माण की अनुमति से जुड़ी याचिका पर मंगलवार को इंदौर हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से सरकारी ताजिया समिति की सदस्यता के दस्तावेज पेश करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 25 जून को होगी। याचिका आय्या अंसारी उर्फ जेबरान अंसारी और बाब्बू चाचा उर्फ जाकिर मोहम्मद ने दायर की। इसमें हटवाड़ा के सरकारी इमामबाड़े में मोहर्रम के अवसर पर हर साल 70 दिनों के लिए ताजिया निर्माण की अस्थायी अनुमति देने और परंपरागत किराया या अस्थायी उपयोग शुल्क स्वीकार करने की मांग की गई है। एक अन्य याचिका सिद्दीक द्वारा दायर की गई है। इसमें एसडीओ धार द्वारा मध्यप्रदेश लोक परिसर बेदखली अधिनियम, 1974 के तहत पारित आदेश और आयुक्त इंदौर संभाग द्वारा अपील निरस्त किए जाने के आदेश को चुनौती दी गई। राज्य शासन ने सुनवाई के दौरान बताया कि सक्षम प्राधिकारी पहले ही याचिकाकर्ताओं का आवेदन निरस्त कर चुका है। शासन का तर्क था कि किसी व्यक्ति को किसी विशेष स्थान पर ताजिया निर्माण की अनुमति मांगने का अधिकार नहीं है। साथ ही, संबंधित स्थल के स्वामित्व और कब्जे से जुड़े मामलों में पूर्व में निर्णय हो चुके हैं और बेदखली की कार्रवाई भी की जा चुकी है। शासन ने कोर्ट को यह भी बताया कि 17 जुलाई 2025 के आदेश के अनुसार, उक्त स्थल पर ताजिया निर्माण की अनुमति नहीं दी जा सकती। हालांकि, मोहर्रम के आयोजन के लिए छोटा इमामबाड़ा और जमातखाना को वैकल्पिक स्थल के रूप में उपलब्ध कराया गया है। न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने खुद को सरकारी ताजिया समिति का सदस्य बताया है, लेकिन इसके समर्थन में कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया। कोर्ट ने उन्हें सदस्यता और अधिकारिता संबंधी प्रमाण पेश करने का अवसर देते हुए मामले की सुनवाई 25 जून तक स्थगित कर दी।
धार के हटवाड़ा स्थित सरकारी इमामबाड़े में मोहर्रम के दौरान ताजिया निर्माण की अनुमति से जुड़ी याचिका पर मंगलवार को इंदौर हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से सरकारी ताजिया समिति की सदस्यता के दस्तावेज पेश करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 25 जून को होगी। याचिका आय्या अंसारी उर्फ जेबरान अंसारी और बाब्बू चाचा उर्फ जाकिर मोहम्मद ने दायर की। इसमें हटवाड़ा के सरकारी इमामबाड़े में मोहर्रम के अवसर पर हर साल 70 दिनों के लिए ताजिया निर्माण की अस्थायी अनुमति देने और परंपरागत किराया या अस्थायी उपयोग शुल्क स्वीकार करने की मांग की गई है। एक अन्य याचिका सिद्दीक द्वारा दायर की गई है। इसमें एसडीओ धार द्वारा मध्यप्रदेश लोक परिसर बेदखली अधिनियम, 1974 के तहत पारित आदेश और आयुक्त इंदौर संभाग द्वारा अपील निरस्त किए जाने के आदेश को चुनौती दी गई। राज्य शासन ने सुनवाई के दौरान बताया कि सक्षम प्राधिकारी पहले ही याचिकाकर्ताओं का आवेदन निरस्त कर चुका है। शासन का तर्क था कि किसी व्यक्ति को किसी विशेष स्थान पर ताजिया निर्माण की अनुमति मांगने का अधिकार नहीं है। साथ ही, संबंधित स्थल के स्वामित्व और कब्जे से जुड़े मामलों में पूर्व में निर्णय हो चुके हैं और बेदखली की कार्रवाई भी की जा चुकी है। शासन ने कोर्ट को यह भी बताया कि 17 जुलाई 2025 के आदेश के अनुसार, उक्त स्थल पर ताजिया निर्माण की अनुमति नहीं दी जा सकती। हालांकि, मोहर्रम के आयोजन के लिए छोटा इमामबाड़ा और जमातखाना को वैकल्पिक स्थल के रूप में उपलब्ध कराया गया है। न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने खुद को सरकारी ताजिया समिति का सदस्य बताया है, लेकिन इसके समर्थन में कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया। कोर्ट ने उन्हें सदस्यता और अधिकारिता संबंधी प्रमाण पेश करने का अवसर देते हुए मामले की सुनवाई 25 जून तक स्थगित कर दी।