सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया मैनेजर को 4 साल की सजा:पद पर रहते हुए 44 लाख से अधिक का किया था गबन; कोर्ट ने भेजा जेल

रतलाम जिले के बड़ावदा में स्थित सेंट्रल बैक ऑफ इंडिया की बड़ावदा ब्रांच में 44 लाख रुपए से अधिक के गबन के मामले में कोर्ट ने फैसला सुनाया है। कोर्ट ने मुख्य आरोपी पूर्व बैंक मैनेजर (शाखा प्रबंधक) नेविल कावराना निवासी मुंबई को 4 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। सजा सुनाने के बाद मंगलवार शाम उसे जेल भेज दिया है। 6 आरोपियों को दोष मुक्त कर दिया है। जबकि 2 की पूर्व में मौत हो चुकी है। फैसला विशेष न्यायालय भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के विशेष न्यायाधीश संजीव कटारे ने दिया। अभियोजन विभाग की प्रभारी उपनिदेशक व सहायक निदेशक आशा शाक्यवार ने बताया कि सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की बड़ावदा शाखा में वर्ष 2012 से 2014 के बीच 44 लाख 46 हजार 717 हजार रुपए का गबन हुआ था। गबन का खुलासा प्रकरण के मुख्य आरोपी नेविल कावराना के अन्य स्थान पर स्थानांतरण होने के बाद हुआ। बैंक के बडावदा शाखा में पदस्थ हुए नए शाखा मैनेजर सुमित जैन द्वारा विस्तृत जांच रिपोर्ट व शिकायत बैंक के वरिष्ठ कार्यालय व ईओडब्ल्यू उज्जैन को भेजने पर हुआ था। बैंक मैनेजर ने वर्ष 2014 में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ इकाई उज्जैन को शिकायत की थी। बताया कि पूर्व प्रबंधक मुख्य आरोपी नेविल कावराना ने बड़ावदा शाखा में पदस्थ रहते हुए अपने पद का दुरुपयो किया। बैंक में जमा राशि का गबन कर स्वयं के बैंक अकाउंट, परिजनों के अकाउंट व बिजनेस फैसिलेटर देवेंद्र कुमार सांड तथा उसके परिजनों के खातों में राशि पहुंचाकर अवैध लाभ प्राप्त किया है। जांच में पाया कि यह कृत्य में पूर्व बैंक मैनेजर नेविल कावराना व बैंक के बिजनेस फेसिलीटेटर आरोपी देवेन्द्र सांड सहित कुल नौ सह-आरोपियों ने मिलीभगत कर बैंक के वित्तीय सॉफ्टवेयर और दस्तावेजों में हेरफेर कर किया। बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक सुमित जैन ने आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ उज्जैन को विस्तृत तथ्यात्मक रिपोर्ट सौंपीष इसके बाद आरोपियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज कराया था। इस तरह किया गबन मुख्य आरोपी नेविल कावराना द्वारा क्षेत्र के किसानों की सहमति और जानकारी के बिना उनके किसान क्रेडिट कार्ड व अन्य खातों से अवैध रूप से राशियां डेबिट (काट) ली जाती थीं। जिसे अपने स्वयं के एवं अन्य सहआरोपीगणों के बैंक खातों में जमा कर दी जाती। कृषकों एवं खाताधारकों के खातो से काटी गई राशियों से फसल बीमा कंपनियों (जैसे चोलामंडलम, एमएस. इंश्योरेंस, एलआईसी ऑफ इंडिया) तथा शासकीय राजस्व मद (वसूली हेतु तहसीलदार) के नाम पर डिमांड ड्राफ्ट तैयार किए जाते थे। उक्त डिमांड ड्राफ्ट्स को संबंधित बीमा कंपनियों या विभागों को न भेजते हुए, मुख्य आरोपी नेविल कावराना द्वारा स्वयं ही उन्हें सिस्टम में निरस्त कर दिया जाता था। निरस्त की गई राशि को वह अन्य सहआरोपीगण अपनी पत्नी खुर्शीद खोखरी कावराना, अन्य रिश्तेदारों जिजी कावराना, जिमी खोखरी, गुलनाज कावराना मेहता, शहजाद मेहता, यास्मीन कावराना तथा बिजनेस फेसिलीटेटर देवेन्द्र सांड व उसकी पत्नी प्रीति सांड के संयुक्त एवं निजी खातों में ट्रांसफर कर अवैध रूप से आहरित कर लेता था। मुख्य आरोपी नेविल कावराना द्वारा न केवल खाताधारकों, बल्कि बैंक के सेंड्री क्रेडिटर खातों तथा लाभ-हानि मद से भी अवैध रूप से राशियां को निकालकर कर स्वयं के एवं अन्य सहआरोपीगणों के खातों में जमा कराई गईं थी। दो की हो चुकी है मौत. 6 दोषमुक्त आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ उज्जैन ने विवेचना के बाद मुख्य आरोपी पूर्व बैक प्रबंधक नेविल कावराना, इसकी पत्नी खुर्शीद कावराना निवासी मुंबई (महाराष्ट्र), रिश्तेदार यास्मीन कावराना निवासी मुंबई, गुलनार कावराना व शहजाद मेहता दोनों निवासी सुथान फलिया जिला सूरत (गुजरात), जीमी खोखरी निवासी नवसारी सूरत (गुजरात), बैंक के सर्विस प्रोपाइडर देवेंद्र सांड, कांता सांड व प्रीति सुधा सांड तीनों निवासी बड़ावदा के खिलाफ न्यायालय में चालान पेश किया था। न्यायालय ने मुख्य आरोपी नेविल कारवाना को दोषी पाकर सजा सुनाई। आरोपी देवेंद्र कुमार सांड व कांता सांड की मौत हो चुकी है। शेष 6 आरोपियों खुर्शीद खोखरी कावराना, जिमी कावराना, यास्मीन कारवाना, जिजी कावराना, गुलनाज कावराना मेहता, शहजाद मेहता तथा प्रीति सांड को आरोप प्रमाणित नहीं होने पर दोषमुक्त कर दिया। प्रकरण में शासन की तरफ से पैरवी विशेष लोक अभियोजक कृष्णकांत चौहान ने की

Jul 1, 2026 - 06:30
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सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया मैनेजर को 4 साल की सजा:पद पर रहते हुए 44 लाख से अधिक का किया था गबन; कोर्ट ने भेजा जेल
रतलाम जिले के बड़ावदा में स्थित सेंट्रल बैक ऑफ इंडिया की बड़ावदा ब्रांच में 44 लाख रुपए से अधिक के गबन के मामले में कोर्ट ने फैसला सुनाया है। कोर्ट ने मुख्य आरोपी पूर्व बैंक मैनेजर (शाखा प्रबंधक) नेविल कावराना निवासी मुंबई को 4 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। सजा सुनाने के बाद मंगलवार शाम उसे जेल भेज दिया है। 6 आरोपियों को दोष मुक्त कर दिया है। जबकि 2 की पूर्व में मौत हो चुकी है। फैसला विशेष न्यायालय भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के विशेष न्यायाधीश संजीव कटारे ने दिया। अभियोजन विभाग की प्रभारी उपनिदेशक व सहायक निदेशक आशा शाक्यवार ने बताया कि सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की बड़ावदा शाखा में वर्ष 2012 से 2014 के बीच 44 लाख 46 हजार 717 हजार रुपए का गबन हुआ था। गबन का खुलासा प्रकरण के मुख्य आरोपी नेविल कावराना के अन्य स्थान पर स्थानांतरण होने के बाद हुआ। बैंक के बडावदा शाखा में पदस्थ हुए नए शाखा मैनेजर सुमित जैन द्वारा विस्तृत जांच रिपोर्ट व शिकायत बैंक के वरिष्ठ कार्यालय व ईओडब्ल्यू उज्जैन को भेजने पर हुआ था। बैंक मैनेजर ने वर्ष 2014 में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ इकाई उज्जैन को शिकायत की थी। बताया कि पूर्व प्रबंधक मुख्य आरोपी नेविल कावराना ने बड़ावदा शाखा में पदस्थ रहते हुए अपने पद का दुरुपयो किया। बैंक में जमा राशि का गबन कर स्वयं के बैंक अकाउंट, परिजनों के अकाउंट व बिजनेस फैसिलेटर देवेंद्र कुमार सांड तथा उसके परिजनों के खातों में राशि पहुंचाकर अवैध लाभ प्राप्त किया है। जांच में पाया कि यह कृत्य में पूर्व बैंक मैनेजर नेविल कावराना व बैंक के बिजनेस फेसिलीटेटर आरोपी देवेन्द्र सांड सहित कुल नौ सह-आरोपियों ने मिलीभगत कर बैंक के वित्तीय सॉफ्टवेयर और दस्तावेजों में हेरफेर कर किया। बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक सुमित जैन ने आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ उज्जैन को विस्तृत तथ्यात्मक रिपोर्ट सौंपीष इसके बाद आरोपियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज कराया था। इस तरह किया गबन मुख्य आरोपी नेविल कावराना द्वारा क्षेत्र के किसानों की सहमति और जानकारी के बिना उनके किसान क्रेडिट कार्ड व अन्य खातों से अवैध रूप से राशियां डेबिट (काट) ली जाती थीं। जिसे अपने स्वयं के एवं अन्य सहआरोपीगणों के बैंक खातों में जमा कर दी जाती। कृषकों एवं खाताधारकों के खातो से काटी गई राशियों से फसल बीमा कंपनियों (जैसे चोलामंडलम, एमएस. इंश्योरेंस, एलआईसी ऑफ इंडिया) तथा शासकीय राजस्व मद (वसूली हेतु तहसीलदार) के नाम पर डिमांड ड्राफ्ट तैयार किए जाते थे। उक्त डिमांड ड्राफ्ट्स को संबंधित बीमा कंपनियों या विभागों को न भेजते हुए, मुख्य आरोपी नेविल कावराना द्वारा स्वयं ही उन्हें सिस्टम में निरस्त कर दिया जाता था। निरस्त की गई राशि को वह अन्य सहआरोपीगण अपनी पत्नी खुर्शीद खोखरी कावराना, अन्य रिश्तेदारों जिजी कावराना, जिमी खोखरी, गुलनाज कावराना मेहता, शहजाद मेहता, यास्मीन कावराना तथा बिजनेस फेसिलीटेटर देवेन्द्र सांड व उसकी पत्नी प्रीति सांड के संयुक्त एवं निजी खातों में ट्रांसफर कर अवैध रूप से आहरित कर लेता था। मुख्य आरोपी नेविल कावराना द्वारा न केवल खाताधारकों, बल्कि बैंक के सेंड्री क्रेडिटर खातों तथा लाभ-हानि मद से भी अवैध रूप से राशियां को निकालकर कर स्वयं के एवं अन्य सहआरोपीगणों के खातों में जमा कराई गईं थी। दो की हो चुकी है मौत. 6 दोषमुक्त आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ उज्जैन ने विवेचना के बाद मुख्य आरोपी पूर्व बैक प्रबंधक नेविल कावराना, इसकी पत्नी खुर्शीद कावराना निवासी मुंबई (महाराष्ट्र), रिश्तेदार यास्मीन कावराना निवासी मुंबई, गुलनार कावराना व शहजाद मेहता दोनों निवासी सुथान फलिया जिला सूरत (गुजरात), जीमी खोखरी निवासी नवसारी सूरत (गुजरात), बैंक के सर्विस प्रोपाइडर देवेंद्र सांड, कांता सांड व प्रीति सुधा सांड तीनों निवासी बड़ावदा के खिलाफ न्यायालय में चालान पेश किया था। न्यायालय ने मुख्य आरोपी नेविल कारवाना को दोषी पाकर सजा सुनाई। आरोपी देवेंद्र कुमार सांड व कांता सांड की मौत हो चुकी है। शेष 6 आरोपियों खुर्शीद खोखरी कावराना, जिमी कावराना, यास्मीन कारवाना, जिजी कावराना, गुलनाज कावराना मेहता, शहजाद मेहता तथा प्रीति सांड को आरोप प्रमाणित नहीं होने पर दोषमुक्त कर दिया। प्रकरण में शासन की तरफ से पैरवी विशेष लोक अभियोजक कृष्णकांत चौहान ने की