तबादला नहीं हुए तो टूट रहे महिला कर्मचारियों के रिश्ते:MP में अलग-अलग जिलों में नौकरी से महिला रोजगार सहायक दुखी, सरकार से लगाई गुहार
"अगर तबादला नहीं होता तो नौकरी छोड़ दो... मजदूरी कर लेंगे।" यह शब्द सागर जिले में पदस्थ ग्राम रोजगार सहायक मोना राजपूत के पति के हैं। शादी जबलपुर में हुई, लेकिन नौकरी सागर में होने के कारण दोनों अलग-अलग रह रहे हैं। रोज सैकड़ों किलोमीटर की दूरी और बढ़ते पारिवारिक विवाद अब रिश्ते पर भारी पड़ने लगे हैं। मोना अकेली नहीं हैं। प्रदेश में कई महिला ग्राम रोजगार सहायकों का वैवाहिक जीवन तबादला नीति नहीं होने के कारण संकट में है। कुछ का तलाक हो चुका है तो कई परिवार टूटने की कगार पर हैं। अब यह मामला राज्य सरकार तक पहुंच गया है। सबसे पहले जानिए क्या है मामला एमपी में ग्राम रोजगार सहायकों और सहायक सचिवों के तबादले नहीं होने से अब परिवारों का विखंडन शुरू हो गया है। मामला राज्य सरकार तक पहुंच गया है। कर्मचारी कल्याण समिति का कहना है कि कई महिला ग्राम रोजगार सहायकों का वैवाहिक जीवन केवल इसलिए प्रभावित हो रहा है, क्योंकि वे विवाह के बाद भी अपने पति के साथ नहीं रह पा रही हैं। फेसबुक पर भी छलका दर्द आजाद अध्यापक संघ ने कर्मचारी कल्याण समिति का पत्र फेसबुक पर साझा किया। इस पर फेसबुक यूजर मोना प्रशांत गौतम ने टिप्पणी करते हुए लिखा, "हमारा तो तलाक होने वाला है। क्या कर सकते हैं? मुख्यमंत्री ही कुछ कर सकते हैं, जिससे मेरे जैसी कई बहनों की लाइफ बर्बाद होने से बच जाए।" महिला कर्मचारियों की पीड़ा को लेकर एसीएस को लिखा पत्र मध्यप्रदेश राज्य कर्मचारी कल्याण समिति के अध्यक्ष रमेशचंद्र शर्मा ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखकर वीबी-जी-राम-जी योजना के अंतर्गत कार्यरत ग्राम रोजगार सहायकों एवं सहायक सचिवों के अंतरजिला स्थानांतरण और स्थान परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि ग्राम रोजगार सहायक एवं सहायक सचिव संगठन ने 31 जुलाई 2026 को आवेदन देकर विशेष रूप से महिला कर्मचारियों के अन्य जिलों एवं ब्लॉकों में स्थानांतरण की मांग की थी। कर्मचारी कल्याण समिति ने इसे मानवीय और प्रशासनिक दृष्टि से उचित बताते हुए विभाग से आवश्यक कार्रवाई की अनुशंसा की है। समिति ने पत्र में बताया कि 24 जून 2025 को मध्यप्रदेश राज्य रोजगार गारंटी परिषद द्वारा जारी दिशा-निर्देशों में तीन वर्ष से अधिक सेवा देने वाले ग्राम रोजगार सहायकों का उसी जिले की अन्य ग्राम पंचायत में स्थान परिवर्तन किए जाने का प्रावधान है। ऐसे मामलों में पुरानी ग्राम पंचायत से अनुबंध समाप्त कर नई ग्राम पंचायत में नया अनुबंध किया जा सकता है। मानवीय आधार पर महिलाओं की मदद करें पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि मुख्यमंत्री ने 28 जून 2023 को घोषणा की थी कि ग्राम रोजगार सहायकों के स्थानांतरण और नियुक्ति की प्रक्रिया पंचायत सचिवों के समान की जाएगी। समिति का कहना है कि इसी घोषणा के अनुरूप अब अंतरजिला स्थानांतरण की व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। समिति के अनुसार, कई महिला ग्राम रोजगार सहायकों का विवाह दूसरे जिलों में हुआ है, लेकिन स्थानांतरण नहीं होने से उन्हें पारिवारिक और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कुछ मामलों में वैवाहिक जीवन भी टूट गया है। इसलिए मानवीय आधार पर पति या ससुराल वाले जिले में स्थानांतरण की सुविधा उपलब्ध कराई जानी चाहिए। रमेशचंद्र शर्मा ने बताया कि हाल ही में एक महिला ग्राम रोजगार सहायक उनसे मिली थी। उसने बताया कि स्थानांतरण नीति नहीं होने के कारण उसका तलाक हो गया। कई अन्य महिला कर्मचारियों का वैवाहिक जीवन भी इसी वजह से संकट में है। इसके बाद उन्होंने विभाग को पत्र लिखकर निर्णय लेने की मांग की। ये खबर भी पढ़ें… टारगेट पूरा नहीं करने वाले अफसर-कर्मचारियों को हटाया जाएगा मध्यप्रदेश सरकार ने तबादला नीति-2026 जारी कर दी है। नई नीति में बड़ा बदलाव करते हुए सरकार ने तय लक्ष्य पूरे नहीं करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों को प्रशासनिक आधार पर प्राथमिकता से हटाने का प्रावधान किया है। ऐसे कर्मचारी तीन साल की अवधि पूरी होने से पहले भी तबादले की सूची में शामिल किए जा सकेंगे।पूरी खबर पढ़ें
"अगर तबादला नहीं होता तो नौकरी छोड़ दो... मजदूरी कर लेंगे।" यह शब्द सागर जिले में पदस्थ ग्राम रोजगार सहायक मोना राजपूत के पति के हैं। शादी जबलपुर में हुई, लेकिन नौकरी सागर में होने के कारण दोनों अलग-अलग रह रहे हैं। रोज सैकड़ों किलोमीटर की दूरी और बढ़ते पारिवारिक विवाद अब रिश्ते पर भारी पड़ने लगे हैं। मोना अकेली नहीं हैं। प्रदेश में कई महिला ग्राम रोजगार सहायकों का वैवाहिक जीवन तबादला नीति नहीं होने के कारण संकट में है। कुछ का तलाक हो चुका है तो कई परिवार टूटने की कगार पर हैं। अब यह मामला राज्य सरकार तक पहुंच गया है। सबसे पहले जानिए क्या है मामला एमपी में ग्राम रोजगार सहायकों और सहायक सचिवों के तबादले नहीं होने से अब परिवारों का विखंडन शुरू हो गया है। मामला राज्य सरकार तक पहुंच गया है। कर्मचारी कल्याण समिति का कहना है कि कई महिला ग्राम रोजगार सहायकों का वैवाहिक जीवन केवल इसलिए प्रभावित हो रहा है, क्योंकि वे विवाह के बाद भी अपने पति के साथ नहीं रह पा रही हैं। फेसबुक पर भी छलका दर्द आजाद अध्यापक संघ ने कर्मचारी कल्याण समिति का पत्र फेसबुक पर साझा किया। इस पर फेसबुक यूजर मोना प्रशांत गौतम ने टिप्पणी करते हुए लिखा, "हमारा तो तलाक होने वाला है। क्या कर सकते हैं? मुख्यमंत्री ही कुछ कर सकते हैं, जिससे मेरे जैसी कई बहनों की लाइफ बर्बाद होने से बच जाए।" महिला कर्मचारियों की पीड़ा को लेकर एसीएस को लिखा पत्र मध्यप्रदेश राज्य कर्मचारी कल्याण समिति के अध्यक्ष रमेशचंद्र शर्मा ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखकर वीबी-जी-राम-जी योजना के अंतर्गत कार्यरत ग्राम रोजगार सहायकों एवं सहायक सचिवों के अंतरजिला स्थानांतरण और स्थान परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि ग्राम रोजगार सहायक एवं सहायक सचिव संगठन ने 31 जुलाई 2026 को आवेदन देकर विशेष रूप से महिला कर्मचारियों के अन्य जिलों एवं ब्लॉकों में स्थानांतरण की मांग की थी। कर्मचारी कल्याण समिति ने इसे मानवीय और प्रशासनिक दृष्टि से उचित बताते हुए विभाग से आवश्यक कार्रवाई की अनुशंसा की है। समिति ने पत्र में बताया कि 24 जून 2025 को मध्यप्रदेश राज्य रोजगार गारंटी परिषद द्वारा जारी दिशा-निर्देशों में तीन वर्ष से अधिक सेवा देने वाले ग्राम रोजगार सहायकों का उसी जिले की अन्य ग्राम पंचायत में स्थान परिवर्तन किए जाने का प्रावधान है। ऐसे मामलों में पुरानी ग्राम पंचायत से अनुबंध समाप्त कर नई ग्राम पंचायत में नया अनुबंध किया जा सकता है। मानवीय आधार पर महिलाओं की मदद करें पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि मुख्यमंत्री ने 28 जून 2023 को घोषणा की थी कि ग्राम रोजगार सहायकों के स्थानांतरण और नियुक्ति की प्रक्रिया पंचायत सचिवों के समान की जाएगी। समिति का कहना है कि इसी घोषणा के अनुरूप अब अंतरजिला स्थानांतरण की व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। समिति के अनुसार, कई महिला ग्राम रोजगार सहायकों का विवाह दूसरे जिलों में हुआ है, लेकिन स्थानांतरण नहीं होने से उन्हें पारिवारिक और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कुछ मामलों में वैवाहिक जीवन भी टूट गया है। इसलिए मानवीय आधार पर पति या ससुराल वाले जिले में स्थानांतरण की सुविधा उपलब्ध कराई जानी चाहिए। रमेशचंद्र शर्मा ने बताया कि हाल ही में एक महिला ग्राम रोजगार सहायक उनसे मिली थी। उसने बताया कि स्थानांतरण नीति नहीं होने के कारण उसका तलाक हो गया। कई अन्य महिला कर्मचारियों का वैवाहिक जीवन भी इसी वजह से संकट में है। इसके बाद उन्होंने विभाग को पत्र लिखकर निर्णय लेने की मांग की। ये खबर भी पढ़ें… टारगेट पूरा नहीं करने वाले अफसर-कर्मचारियों को हटाया जाएगा मध्यप्रदेश सरकार ने तबादला नीति-2026 जारी कर दी है। नई नीति में बड़ा बदलाव करते हुए सरकार ने तय लक्ष्य पूरे नहीं करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों को प्रशासनिक आधार पर प्राथमिकता से हटाने का प्रावधान किया है। ऐसे कर्मचारी तीन साल की अवधि पूरी होने से पहले भी तबादले की सूची में शामिल किए जा सकेंगे।पूरी खबर पढ़ें