नर्मदापुरम में 28 करोड़ की मूंग में मिट्टी मिली:15 दिन बाद भी गिरफ्तारी नहीं, FIR वाले वेयरहाउस में फिर खरीदी शुरू
नर्मदापुरम जिले में सरकारी मूंग खरीदी में सामने आए 28.14 करोड़ रुपए के कथित घोटाले को 15 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। दूसरी ओर, जिन वेयरहाउस में गड़बड़ी मिलने के बाद एफआईआर दर्ज हुई थी, उनमें से कुछ को दोबारा मूंग खरीदी का केंद्र बना दिया गया है। इससे सरकारी खरीदी की व्यवस्था और पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। पिछले 15 दिनों में मूंग में मिलावट और अमानक खरीदी से जुड़े दो मामले सामने आ चुके हैं। इसके बावजूद कार्रवाई और खरीदी व्यवस्था में बदलाव को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
पहला मामला: 28.14 करोड़ की मूंग में मिट्टी माखननगर के गुराड़िया कला स्थित कनकधारा वेयरहाउस में वर्ष 2023-24 और 2024-25 की करीब 31,298.89 क्विंटल मूंग में मिट्टी और अन्य पदार्थ मिलने का मामला सामने आया था। इसकी अनुमानित कीमत करीब 28.14 करोड़ रुपए बताई गई। 22 जुलाई को कलेक्टर सोमेश मिश्रा के निर्देश पर एसडीएम देवेंद्र प्रताप सिंह की टीम ने जांच की थी। मूंग में मिट्टी मिलने के बाद वेयरहाउस को सील कर दिया गया। इसके बाद 29 जुलाई को माखननगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई। मामले में वेयरहाउस संचालक तारेश पुरोहित, तत्कालीन शाखा प्रबंधक श्याम होसले और जिला प्रबंधक वासुदेव दावंडे को आरोपी बनाया गया है। एफआईआर के बाद से जिला प्रबंधक दावंडे के फरार होने की बात सामने आई है। पुलिस का कहना है कि आरोपियों की तलाश की जा रही है और जांच में अन्य नाम सामने आने पर उन्हें भी आरोपी बनाया जा सकता है। दूसरा मामला: दो वेयरहाउस में भी गड़बड़ी का मामला चेतन वेयरहाउस फुरतला और राधा कृष्ण वेयरहाउस काजलखेड़ी में भी अमानक मूंग की खरीदी और किसानों की आड़ में व्यापारियों की मूंग खरीदे जाने के आरोप सामने आए। प्रशासन ने चेतन वेयरहाउस की संचालिका शोभा राजपूत, गनेरा समिति प्रबंधक सोनू परमार और सर्वेयर देशराज यादव के खिलाफ मामला दर्ज कराया। वहीं राधा कृष्ण वेयरहाउस की संचालिका ज्योति मीना, कांद्राखेड़ी समिति प्रबंधक सुनील पटेल और सर्वेयर शिवम तिवारी पर भी एफआईआर हुई। इन केंद्रों पर दो दिन खरीदी बंद रही, लेकिन तीसरे दिन से फिर इन्हीं स्थानों पर खरीदी शुरू कर दी गई। FIR वाले केंद्रों पर फिर खरीदी क्यों? चेतन और राधा कृष्ण वेयरहाउस को ब्लैकलिस्ट करने के बजाय वहीं दोबारा खरीदी शुरू कराने से अब सवाल उठ रहे हैं कि जहां हाल ही में अनियमितता सामने आई, वहां खरीदी की निगरानी और गुणवत्ता की गारंटी कैसे होगी? जिला विपणन अधिकारी अनिल जैन का कहना है कि माखननगर ब्लॉक के अधिकांश वेयरहाउस धान और गेहूं के स्टॉक से भरे हुए हैं। मूंग खरीदी के लिए पर्याप्त खाली जगह उपलब्ध नहीं है। किसानों को परेशानी न हो, इसलिए फिलहाल चेतन और राधा कृष्ण वेयरहाउस में खरीदी कराई जा रही है। उनके मुताबिक, दोनों केंद्रों पर वेयरहाउस कॉरपोरेशन के शाखा प्रबंधक की निगरानी में खरीदी कराई जा रही है। जैसे ही दूसरे वेयरहाउस खाली होंगे, वहां मूंग का स्टॉक शिफ्ट कराया जाएगा। किसानों की कतार, पारदर्शिता पर सवाल मूंग खरीदी केंद्रों के बाहर किसानों की लंबी कतार लगी है। एक ओर किसान अपनी उपज बेचने के लिए परेशान हैं, वहीं दूसरी ओर सरकारी खरीदी में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 28 करोड़ रुपए से ज्यादा की मूंग में मिट्टी मिलने के मामले में अब तक गिरफ्तारी नहीं होने और एफआईआर वाले केंद्रों पर दोबारा खरीदी शुरू होने से किसानों के बीच भी असमंजस की स्थिति है। अब निगाहें पुलिस जांच और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
नर्मदापुरम जिले में सरकारी मूंग खरीदी में सामने आए 28.14 करोड़ रुपए के कथित घोटाले को 15 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। दूसरी ओर, जिन वेयरहाउस में गड़बड़ी मिलने के बाद एफआईआर दर्ज हुई थी, उनमें से कुछ को दोबारा मूंग खरीदी का केंद्र बना दिया गया है। इससे सरकारी खरीदी की व्यवस्था और पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। पिछले 15 दिनों में मूंग में मिलावट और अमानक खरीदी से जुड़े दो मामले सामने आ चुके हैं। इसके बावजूद कार्रवाई और खरीदी व्यवस्था में बदलाव को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
पहला मामला: 28.14 करोड़ की मूंग में मिट्टी माखननगर के गुराड़िया कला स्थित कनकधारा वेयरहाउस में वर्ष 2023-24 और 2024-25 की करीब 31,298.89 क्विंटल मूंग में मिट्टी और अन्य पदार्थ मिलने का मामला सामने आया था। इसकी अनुमानित कीमत करीब 28.14 करोड़ रुपए बताई गई। 22 जुलाई को कलेक्टर सोमेश मिश्रा के निर्देश पर एसडीएम देवेंद्र प्रताप सिंह की टीम ने जांच की थी। मूंग में मिट्टी मिलने के बाद वेयरहाउस को सील कर दिया गया। इसके बाद 29 जुलाई को माखननगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई। मामले में वेयरहाउस संचालक तारेश पुरोहित, तत्कालीन शाखा प्रबंधक श्याम होसले और जिला प्रबंधक वासुदेव दावंडे को आरोपी बनाया गया है। एफआईआर के बाद से जिला प्रबंधक दावंडे के फरार होने की बात सामने आई है। पुलिस का कहना है कि आरोपियों की तलाश की जा रही है और जांच में अन्य नाम सामने आने पर उन्हें भी आरोपी बनाया जा सकता है। दूसरा मामला: दो वेयरहाउस में भी गड़बड़ी का मामला चेतन वेयरहाउस फुरतला और राधा कृष्ण वेयरहाउस काजलखेड़ी में भी अमानक मूंग की खरीदी और किसानों की आड़ में व्यापारियों की मूंग खरीदे जाने के आरोप सामने आए। प्रशासन ने चेतन वेयरहाउस की संचालिका शोभा राजपूत, गनेरा समिति प्रबंधक सोनू परमार और सर्वेयर देशराज यादव के खिलाफ मामला दर्ज कराया। वहीं राधा कृष्ण वेयरहाउस की संचालिका ज्योति मीना, कांद्राखेड़ी समिति प्रबंधक सुनील पटेल और सर्वेयर शिवम तिवारी पर भी एफआईआर हुई। इन केंद्रों पर दो दिन खरीदी बंद रही, लेकिन तीसरे दिन से फिर इन्हीं स्थानों पर खरीदी शुरू कर दी गई। FIR वाले केंद्रों पर फिर खरीदी क्यों? चेतन और राधा कृष्ण वेयरहाउस को ब्लैकलिस्ट करने के बजाय वहीं दोबारा खरीदी शुरू कराने से अब सवाल उठ रहे हैं कि जहां हाल ही में अनियमितता सामने आई, वहां खरीदी की निगरानी और गुणवत्ता की गारंटी कैसे होगी? जिला विपणन अधिकारी अनिल जैन का कहना है कि माखननगर ब्लॉक के अधिकांश वेयरहाउस धान और गेहूं के स्टॉक से भरे हुए हैं। मूंग खरीदी के लिए पर्याप्त खाली जगह उपलब्ध नहीं है। किसानों को परेशानी न हो, इसलिए फिलहाल चेतन और राधा कृष्ण वेयरहाउस में खरीदी कराई जा रही है। उनके मुताबिक, दोनों केंद्रों पर वेयरहाउस कॉरपोरेशन के शाखा प्रबंधक की निगरानी में खरीदी कराई जा रही है। जैसे ही दूसरे वेयरहाउस खाली होंगे, वहां मूंग का स्टॉक शिफ्ट कराया जाएगा। किसानों की कतार, पारदर्शिता पर सवाल मूंग खरीदी केंद्रों के बाहर किसानों की लंबी कतार लगी है। एक ओर किसान अपनी उपज बेचने के लिए परेशान हैं, वहीं दूसरी ओर सरकारी खरीदी में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 28 करोड़ रुपए से ज्यादा की मूंग में मिट्टी मिलने के मामले में अब तक गिरफ्तारी नहीं होने और एफआईआर वाले केंद्रों पर दोबारा खरीदी शुरू होने से किसानों के बीच भी असमंजस की स्थिति है। अब निगाहें पुलिस जांच और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।