झोझा फॉल: खतरनाक चट्टानों पर सेल्फी, प्रशासन के आदेश बेअसर:70 फीट ऊंचाई से गिरते पानी के पास फोटोशूट, हादसे का खतरा

उमरिया जिले में बारिश के दौरान झरने और जलप्रपात लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। हालांकि, इन प्राकृतिक स्थलों पर युवा जान जोखिम में डालकर सेल्फी और फोटोशूट कर रहे हैं, जो चिंता का विषय बन गया है। जिला प्रशासन द्वारा खतरनाक क्षेत्रों में जाने पर प्रतिबंध के आदेश और अपील के बावजूद इसका पालन नहीं हो रहा है। जिला मुख्यालय से लगभग 30 किलोमीटर दूर स्थित झोझा फॉल में भी ऐसी ही स्थिति देखी जा रही है। बारिश के बाद यहां मछडार नदी का पानी 70 फीट से अधिक ऊंचाई से गिरता है। झरने की सुंदरता देखने आने वाले युवा अक्सर सुरक्षा सीमाओं का उल्लंघन कर ऊंची चट्टानों और झरने के खतरनाक किनारों तक पहुँच जाते हैं। वे इन स्थानों पर बैठकर सेल्फी, वीडियो और फोटोशूट करते हैं। बारिश के मौसम में झोझा फॉल क्षेत्र की चट्टानें पानी के कारण अत्यधिक फिसलन भरी हो जाती हैं। ऐसे में ऊंचाई वाले स्थानों पर खड़े होकर सेल्फी लेना या फोटोशूट करना बेहद खतरनाक हो सकता है। थोड़ी सी भी असावधानी से पैर फिसलने पर गंभीर दुर्घटना हो सकती है। इसके बावजूद, युवा सोशल मीडिया के लिए आकर्षक तस्वीरें और वीडियो बनाने के लिए इन जोखिम भरे स्थानों पर जा रहे हैं। सेल्फी और फोटोशूट का यह चलन अब केवल पर्यटन स्थलों तक सीमित नहीं है। जिले में सड़कों, पुल-पुलियों के आसपास और बारिश के दौरान नदी-नालों एवं झरनों के नजदीक भी लोग तस्वीरें लेते देखे जा सकते हैं। सोशल मीडिया पर फोटो और वीडियो पोस्ट करने की होड़ में अक्सर सुरक्षा नियमों की अनदेखी की जाती है। प्रशासन के आदेश भी नहीं रोक पा रहे जोखिम बारिश के मौसम को देखते हुए जिला प्रशासन ने गहरे पानी और डेंजर जोन में जाने से लोगों को रोकने के निर्देश जारी किए हैं। इसके बावजूद प्राकृतिक स्थलों पर इन निर्देशों की अनदेखी होती दिखाई दे रही है। जरूरत है कि ऐसे स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने के साथ चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं और डेंजर जोन में जाने वालों पर सख्ती की जाए, ताकि किसी बड़े हादसे से पहले लोगों को सुरक्षित रखा जा सके।

Aug 18, 2026 - 07:09
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झोझा फॉल: खतरनाक चट्टानों पर सेल्फी, प्रशासन के आदेश बेअसर:70 फीट ऊंचाई से गिरते पानी के पास फोटोशूट, हादसे का खतरा
उमरिया जिले में बारिश के दौरान झरने और जलप्रपात लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। हालांकि, इन प्राकृतिक स्थलों पर युवा जान जोखिम में डालकर सेल्फी और फोटोशूट कर रहे हैं, जो चिंता का विषय बन गया है। जिला प्रशासन द्वारा खतरनाक क्षेत्रों में जाने पर प्रतिबंध के आदेश और अपील के बावजूद इसका पालन नहीं हो रहा है। जिला मुख्यालय से लगभग 30 किलोमीटर दूर स्थित झोझा फॉल में भी ऐसी ही स्थिति देखी जा रही है। बारिश के बाद यहां मछडार नदी का पानी 70 फीट से अधिक ऊंचाई से गिरता है। झरने की सुंदरता देखने आने वाले युवा अक्सर सुरक्षा सीमाओं का उल्लंघन कर ऊंची चट्टानों और झरने के खतरनाक किनारों तक पहुँच जाते हैं। वे इन स्थानों पर बैठकर सेल्फी, वीडियो और फोटोशूट करते हैं। बारिश के मौसम में झोझा फॉल क्षेत्र की चट्टानें पानी के कारण अत्यधिक फिसलन भरी हो जाती हैं। ऐसे में ऊंचाई वाले स्थानों पर खड़े होकर सेल्फी लेना या फोटोशूट करना बेहद खतरनाक हो सकता है। थोड़ी सी भी असावधानी से पैर फिसलने पर गंभीर दुर्घटना हो सकती है। इसके बावजूद, युवा सोशल मीडिया के लिए आकर्षक तस्वीरें और वीडियो बनाने के लिए इन जोखिम भरे स्थानों पर जा रहे हैं। सेल्फी और फोटोशूट का यह चलन अब केवल पर्यटन स्थलों तक सीमित नहीं है। जिले में सड़कों, पुल-पुलियों के आसपास और बारिश के दौरान नदी-नालों एवं झरनों के नजदीक भी लोग तस्वीरें लेते देखे जा सकते हैं। सोशल मीडिया पर फोटो और वीडियो पोस्ट करने की होड़ में अक्सर सुरक्षा नियमों की अनदेखी की जाती है। प्रशासन के आदेश भी नहीं रोक पा रहे जोखिम बारिश के मौसम को देखते हुए जिला प्रशासन ने गहरे पानी और डेंजर जोन में जाने से लोगों को रोकने के निर्देश जारी किए हैं। इसके बावजूद प्राकृतिक स्थलों पर इन निर्देशों की अनदेखी होती दिखाई दे रही है। जरूरत है कि ऐसे स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने के साथ चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं और डेंजर जोन में जाने वालों पर सख्ती की जाए, ताकि किसी बड़े हादसे से पहले लोगों को सुरक्षित रखा जा सके।