IT कंपनी के नाम पर 1.12 करोड़ की धोखाधड़ी:अम्बेडकरनगर में आरोपियों ने 82 लाख लौटाए, 12 के खिलाफ FIR दर्ज
IT कंपनी के नाम पर 1.12 करोड़ की धोखाधड़ी:अम्बेडकरनगर में आरोपियों ने 82 लाख लौटाए, 12 के खिलाफ FIR दर्ज
हंसवर में एक बड़ी आईटी कंपनी के नाम पर 1.12 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि सुदीप वर्मा और प्रांजल वर्मा ने लोगों को प्रतिष्ठित कंपनी में निवेश का झांसा देकर ठगी की। मंगलवार रात इस गिरोह के 12 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज की गई है। अरुसा आजमपुर निवासी अविनाश पटेल की शिकायत के अनुसार, यह धोखाधड़ी 5 अप्रैल 2025 को शुरू हुई। मुख्य आरोपी सुदीप वर्मा और प्रांजल वर्मा ने 'विप्रो इन्वेस्टमेंट पॉलिसी' नाम से एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया था। इस ग्रुप में कंपनी का लोगो इस्तेमाल किया गया और कंपनी के संस्थापक अजीम प्रेमजी के नाम का हवाला देकर निवेशकों को आकर्षक मुनाफे का भरोसा दिलाया गया। प्रांजल वर्मा ने खुद को कंपनी का कर्मचारी बताकर निवेशकों का विश्वास जीता। सुदीप और प्रांजल ने लोगों को अपनी जीवन भर की कमाई ऑनलाइन और नकद माध्यम से अपने तथा अपने करीबियों के विभिन्न बैंक खातों में जमा करने के लिए प्रेरित किया। ठगी का यह सिलसिला लगभग सात महीने तक चला। इस धोखाधड़ी में सुदीप के चाचा वीरेंद्र वर्मा की भी भूमिका सामने आई है। वीरेंद्र बसखारी बैंक ऑफ बड़ौदा के पास ग्राहक सेवा केंद्र चलाते हैं और उन्होंने सुदीप का खाता खुलवाने तथा नकदी निकालने में मदद की। सुदीप के बड़े भाई अनूप वर्मा और प्रांजल की चाची शिल्पा वर्मा (सहायक अध्यापिका) ने मिलकर विभिन्न ग्रुपों का लेखा-जोखा रखा और रुपये की हेराफेरी की। 13 नवंबर 2025 को सुदीप ने सभी निवेशकों को व्हाट्सएप ग्रुप से ब्लॉक कर दिया। अगले दिन, 14 नवंबर 2025 को, जब निवेशक सुदीप और प्रांजल के घर पहुंचे, तो आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने रुपये विप्रो कंपनी में निवेश नहीं किए थे, बल्कि आपस में बांट लिए थे। नौ महीने में इस ग्रुप के माध्यम से कुल 1 करोड़ 12 लाख 46 हजार 159 रुपये की ठगी की गई थी। निवेशकों के दबाव में आरोपियों ने 82 लाख 5 हजार 836 रुपये वापस किए हैं। हालांकि, अभी भी 30 लाख 18 हजार 323 रुपये की राशि बकाया है। निवेशकों का आरोप है कि रुपये वापस मांगने पर उन्हें धमकी दी जा रही है। प्रभारी निरीक्षक अभिनेष सिंह ने बताया कि पुलिस अधीक्षक के आदेश पर एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है।
हंसवर में एक बड़ी आईटी कंपनी के नाम पर 1.12 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि सुदीप वर्मा और प्रांजल वर्मा ने लोगों को प्रतिष्ठित कंपनी में निवेश का झांसा देकर ठगी की। मंगलवार रात इस गिरोह के 12 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज की गई है। अरुसा आजमपुर निवासी अविनाश पटेल की शिकायत के अनुसार, यह धोखाधड़ी 5 अप्रैल 2025 को शुरू हुई। मुख्य आरोपी सुदीप वर्मा और प्रांजल वर्मा ने 'विप्रो इन्वेस्टमेंट पॉलिसी' नाम से एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया था। इस ग्रुप में कंपनी का लोगो इस्तेमाल किया गया और कंपनी के संस्थापक अजीम प्रेमजी के नाम का हवाला देकर निवेशकों को आकर्षक मुनाफे का भरोसा दिलाया गया। प्रांजल वर्मा ने खुद को कंपनी का कर्मचारी बताकर निवेशकों का विश्वास जीता। सुदीप और प्रांजल ने लोगों को अपनी जीवन भर की कमाई ऑनलाइन और नकद माध्यम से अपने तथा अपने करीबियों के विभिन्न बैंक खातों में जमा करने के लिए प्रेरित किया। ठगी का यह सिलसिला लगभग सात महीने तक चला। इस धोखाधड़ी में सुदीप के चाचा वीरेंद्र वर्मा की भी भूमिका सामने आई है। वीरेंद्र बसखारी बैंक ऑफ बड़ौदा के पास ग्राहक सेवा केंद्र चलाते हैं और उन्होंने सुदीप का खाता खुलवाने तथा नकदी निकालने में मदद की। सुदीप के बड़े भाई अनूप वर्मा और प्रांजल की चाची शिल्पा वर्मा (सहायक अध्यापिका) ने मिलकर विभिन्न ग्रुपों का लेखा-जोखा रखा और रुपये की हेराफेरी की। 13 नवंबर 2025 को सुदीप ने सभी निवेशकों को व्हाट्सएप ग्रुप से ब्लॉक कर दिया। अगले दिन, 14 नवंबर 2025 को, जब निवेशक सुदीप और प्रांजल के घर पहुंचे, तो आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने रुपये विप्रो कंपनी में निवेश नहीं किए थे, बल्कि आपस में बांट लिए थे। नौ महीने में इस ग्रुप के माध्यम से कुल 1 करोड़ 12 लाख 46 हजार 159 रुपये की ठगी की गई थी। निवेशकों के दबाव में आरोपियों ने 82 लाख 5 हजार 836 रुपये वापस किए हैं। हालांकि, अभी भी 30 लाख 18 हजार 323 रुपये की राशि बकाया है। निवेशकों का आरोप है कि रुपये वापस मांगने पर उन्हें धमकी दी जा रही है। प्रभारी निरीक्षक अभिनेष सिंह ने बताया कि पुलिस अधीक्षक के आदेश पर एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है।