मानसून सत्र से पहले भूपेश बघेल का सरकार पर हमला:किसानों की समस्याओं, बढ़ते बिजली बिल और महंगाई को लेकर घेरने की तैयारी

छत्तीसगढ़ विधानसभा के आगामी मानसून सत्र से पहले प्रदेश की राजनीति तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बिजली बिल बढ़ोतरी, खाद-बीज की कमी और किसानों की परेशानियों को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इन मुद्दों को विधानसभा में मजबूती से उठाएगी। भिलाई-3 स्थित अपने निवास से दौरे पर निकलने से पहले पत्रकारों से चर्चा करते हुए भूपेश बघेल ने कहा कि प्रदेश में खेती का महत्वपूर्ण समय चल रहा है। ऐसे में किसानों को खाद, बीज और बिजली जैसी मूलभूत जरूरतों के लिए परेशान होना पड़ रहा है। किसानों की समस्याओं पर सरकार को घेरा उन्होंने कहा कि प्रदेश के कई जिलों से शिकायतें मिल रही हैं कि किसानों को समय पर खाद और बीज उपलब्ध नहीं हो रहे हैं। जहां सामग्री मिल रही है, वहां अधिक कीमत वसूली जा रही है। साथ ही घटिया गुणवत्ता की कृषि सामग्री मिलने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। बिजली दरों में वृद्धि पर उठाए सवाल पूर्व मुख्यमंत्री ने बिजली दरों में बढ़ोतरी को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने दावा किया कि उनके कार्यकाल में बिजली दरों में वृद्धि नहीं की गई थी, जबकि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में कई बार बिजली दरें बढ़ाई जा चुकी हैं। बघेल ने कहा कि बढ़ी हुई दरों का असर सीधे आम उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है। जिन परिवारों का बिजली बिल पहले कम आता था, अब उन्हें कई गुना अधिक भुगतान करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता को राहत देने के बजाय आर्थिक बोझ बढ़ा रही है। डीजल-पेट्रोल की कीमतों पर भी चिंता उन्होंने कहा कि डीजल और पेट्रोल की बढ़ती कीमतों का असर खेती-किसानी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। इससे किसानों की लागत बढ़ रही है और आम लोगों पर भी अतिरिक्त आर्थिक दबाव बन रहा है। 13 जुलाई से शुरू होगा मानसून सत्र छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र 13 जुलाई 2026 से शुरू होकर 17 जुलाई तक चलेगा। विधानसभा सचिवालय द्वारा इसकी अधिसूचना जारी कर दी गई है। पांच दिवसीय सत्र में कुल पांच बैठकें आयोजित होंगी। कई अहम मुद्दों पर होगी चर्चा विधानसभा सचिवालय के अनुसार सत्र के दौरान विभिन्न शासकीय और विधायी कार्यों के साथ अनुपूरक बजट मांगों तथा महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा हो सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिजली दरों में वृद्धि, खाद-बीज की उपलब्धता, किसानों की समस्याएं और महंगाई जैसे मुद्दों को लेकर विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी में है। ऐसे में आगामी मानसून सत्र के दौरान सदन में तीखी बहस और राजनीतिक टकराव देखने को मिल सकता है।

Jun 16, 2026 - 18:33
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मानसून सत्र से पहले भूपेश बघेल का सरकार पर हमला:किसानों की समस्याओं, बढ़ते बिजली बिल और महंगाई को लेकर घेरने की तैयारी
छत्तीसगढ़ विधानसभा के आगामी मानसून सत्र से पहले प्रदेश की राजनीति तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बिजली बिल बढ़ोतरी, खाद-बीज की कमी और किसानों की परेशानियों को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इन मुद्दों को विधानसभा में मजबूती से उठाएगी। भिलाई-3 स्थित अपने निवास से दौरे पर निकलने से पहले पत्रकारों से चर्चा करते हुए भूपेश बघेल ने कहा कि प्रदेश में खेती का महत्वपूर्ण समय चल रहा है। ऐसे में किसानों को खाद, बीज और बिजली जैसी मूलभूत जरूरतों के लिए परेशान होना पड़ रहा है। किसानों की समस्याओं पर सरकार को घेरा उन्होंने कहा कि प्रदेश के कई जिलों से शिकायतें मिल रही हैं कि किसानों को समय पर खाद और बीज उपलब्ध नहीं हो रहे हैं। जहां सामग्री मिल रही है, वहां अधिक कीमत वसूली जा रही है। साथ ही घटिया गुणवत्ता की कृषि सामग्री मिलने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। बिजली दरों में वृद्धि पर उठाए सवाल पूर्व मुख्यमंत्री ने बिजली दरों में बढ़ोतरी को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने दावा किया कि उनके कार्यकाल में बिजली दरों में वृद्धि नहीं की गई थी, जबकि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में कई बार बिजली दरें बढ़ाई जा चुकी हैं। बघेल ने कहा कि बढ़ी हुई दरों का असर सीधे आम उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है। जिन परिवारों का बिजली बिल पहले कम आता था, अब उन्हें कई गुना अधिक भुगतान करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता को राहत देने के बजाय आर्थिक बोझ बढ़ा रही है। डीजल-पेट्रोल की कीमतों पर भी चिंता उन्होंने कहा कि डीजल और पेट्रोल की बढ़ती कीमतों का असर खेती-किसानी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। इससे किसानों की लागत बढ़ रही है और आम लोगों पर भी अतिरिक्त आर्थिक दबाव बन रहा है। 13 जुलाई से शुरू होगा मानसून सत्र छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र 13 जुलाई 2026 से शुरू होकर 17 जुलाई तक चलेगा। विधानसभा सचिवालय द्वारा इसकी अधिसूचना जारी कर दी गई है। पांच दिवसीय सत्र में कुल पांच बैठकें आयोजित होंगी। कई अहम मुद्दों पर होगी चर्चा विधानसभा सचिवालय के अनुसार सत्र के दौरान विभिन्न शासकीय और विधायी कार्यों के साथ अनुपूरक बजट मांगों तथा महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा हो सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिजली दरों में वृद्धि, खाद-बीज की उपलब्धता, किसानों की समस्याएं और महंगाई जैसे मुद्दों को लेकर विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी में है। ऐसे में आगामी मानसून सत्र के दौरान सदन में तीखी बहस और राजनीतिक टकराव देखने को मिल सकता है।