बिना सर्जरी बगल की मुख्य धमनी का रिसाव रोका:भोपाल के हमीदिया अस्पताल में स्टेंटिंग से मरीज को मिली नई जिंदगी

सरकारी अस्पतालों में अब जटिल रक्तवाहिनी रोगों का इलाज भी अत्याधुनिक तकनीक से संभव हो रहा है। इसका ताजा उदाहरण हमीदिया अस्पताल में देखने को मिला, जहां 56 वर्षीय सलीम खान की बगल (एक्सिलरी) की मुख्य धमनी में हुए रिसाव का सफल इलाज एंजियोप्लास्टी और कवर्ड स्टेंटिंग के जरिए किया गया। इस प्रक्रिया से मरीज को बड़े ऑपरेशन से बचाते हुए कम समय में सुरक्षित उपचार उपलब्ध कराया गया। धमनी के रिसाव को एंडोवैस्कुलर तकनीक से किया बंद गांधी मेडिकल कॉलेज के रेडियोलॉजी विभाग के सहायक प्राध्यापक एवं इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट डॉ. अंकित शाह ने यह जटिल प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की। एंडोवैस्कुलर तकनीक के जरिए धमनी के रिसाव वाले हिस्से में कवर्ड स्टेंट लगाया गया, जिससे रक्तस्राव पूरी तरह नियंत्रित हो गया। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की प्रक्रिया तकनीकी रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण मानी जाती है और इसके लिए विशेष दक्षता की आवश्यकता होती है। 1.20 लाख का स्टेंट, लेकिन मरीज से नहीं लिया गया एक भी रुपया इस उपचार में इस्तेमाल किए गए कवर्ड स्टेंट की कीमत करीब 1.20 लाख रुपए है। सामान्य परिस्थितियों में यह इलाज काफी महंगा माना जाता है, लेकिन हमीदिया अस्पताल में आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीज को यह सुविधा पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध कराई गई। इससे यह भी साबित हुआ कि सरकारी अस्पतालों में अब आधुनिक इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी की सुविधाएं प्रभावी रूप से उपलब्ध हैं। भोपाल में केवल चार विशेषज्ञ, उनमें एक हमीदिया में चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार भोपाल में इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी की विशेषज्ञता रखने वाले केवल चार चिकित्सक हैं। इनमें डॉ. अंकित शाह हमीदिया अस्पताल में सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे विशेषज्ञों की उपलब्धता से जटिल रक्तवाहिनी संबंधी बीमारियों का इलाज अब राजधानी में ही संभव हो रहा है और मरीजों को बड़े निजी अस्पतालों का रुख नहीं करना पड़ रहा। कई विभागों के समन्वय से मिली सफलता इस सफल उपचार में कैथ लैब, रेडियोलॉजी और सीटीवीएस विभाग की टीम ने संयुक्त रूप से काम किया। रेडियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. लवली कौशल, कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. राजीव गुप्ता, सीटीवीएस विभागाध्यक्ष डॉ. प्रवीण शर्मा तथा डॉ. सागर मांडविये का मार्गदर्शन उपचार के दौरान महत्वपूर्ण रहा। वहीं हमीदिया अस्पताल के अधीक्षक डॉ. सुनीत टंडन और अधीक्षक कार्यालय ने आवश्यक उपकरण और सामग्री समय पर उपलब्ध कराई। गांधी मेडिकल कॉलेज की अधिष्ठाता डॉ. कविता एन. सिंह के नेतृत्व में अस्पताल लगातार आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार कर रहा है।

Jul 13, 2026 - 14:37
 0  0
बिना सर्जरी बगल की मुख्य धमनी का रिसाव रोका:भोपाल के हमीदिया अस्पताल में स्टेंटिंग से मरीज को मिली नई जिंदगी
सरकारी अस्पतालों में अब जटिल रक्तवाहिनी रोगों का इलाज भी अत्याधुनिक तकनीक से संभव हो रहा है। इसका ताजा उदाहरण हमीदिया अस्पताल में देखने को मिला, जहां 56 वर्षीय सलीम खान की बगल (एक्सिलरी) की मुख्य धमनी में हुए रिसाव का सफल इलाज एंजियोप्लास्टी और कवर्ड स्टेंटिंग के जरिए किया गया। इस प्रक्रिया से मरीज को बड़े ऑपरेशन से बचाते हुए कम समय में सुरक्षित उपचार उपलब्ध कराया गया। धमनी के रिसाव को एंडोवैस्कुलर तकनीक से किया बंद गांधी मेडिकल कॉलेज के रेडियोलॉजी विभाग के सहायक प्राध्यापक एवं इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट डॉ. अंकित शाह ने यह जटिल प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की। एंडोवैस्कुलर तकनीक के जरिए धमनी के रिसाव वाले हिस्से में कवर्ड स्टेंट लगाया गया, जिससे रक्तस्राव पूरी तरह नियंत्रित हो गया। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की प्रक्रिया तकनीकी रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण मानी जाती है और इसके लिए विशेष दक्षता की आवश्यकता होती है। 1.20 लाख का स्टेंट, लेकिन मरीज से नहीं लिया गया एक भी रुपया इस उपचार में इस्तेमाल किए गए कवर्ड स्टेंट की कीमत करीब 1.20 लाख रुपए है। सामान्य परिस्थितियों में यह इलाज काफी महंगा माना जाता है, लेकिन हमीदिया अस्पताल में आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीज को यह सुविधा पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध कराई गई। इससे यह भी साबित हुआ कि सरकारी अस्पतालों में अब आधुनिक इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी की सुविधाएं प्रभावी रूप से उपलब्ध हैं। भोपाल में केवल चार विशेषज्ञ, उनमें एक हमीदिया में चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार भोपाल में इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी की विशेषज्ञता रखने वाले केवल चार चिकित्सक हैं। इनमें डॉ. अंकित शाह हमीदिया अस्पताल में सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे विशेषज्ञों की उपलब्धता से जटिल रक्तवाहिनी संबंधी बीमारियों का इलाज अब राजधानी में ही संभव हो रहा है और मरीजों को बड़े निजी अस्पतालों का रुख नहीं करना पड़ रहा। कई विभागों के समन्वय से मिली सफलता इस सफल उपचार में कैथ लैब, रेडियोलॉजी और सीटीवीएस विभाग की टीम ने संयुक्त रूप से काम किया। रेडियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. लवली कौशल, कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. राजीव गुप्ता, सीटीवीएस विभागाध्यक्ष डॉ. प्रवीण शर्मा तथा डॉ. सागर मांडविये का मार्गदर्शन उपचार के दौरान महत्वपूर्ण रहा। वहीं हमीदिया अस्पताल के अधीक्षक डॉ. सुनीत टंडन और अधीक्षक कार्यालय ने आवश्यक उपकरण और सामग्री समय पर उपलब्ध कराई। गांधी मेडिकल कॉलेज की अधिष्ठाता डॉ. कविता एन. सिंह के नेतृत्व में अस्पताल लगातार आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार कर रहा है।