1 साल पहले बच्ची की मौत, परिजन का धरना शुरू:कहा- बेटी की किडनियां खराब थीं, फिर भी डॉक्टर ने डिस्चार्ज कर दिया

आगर-मालवा में जिला अस्पताल में एक साल पहले इलाज के दौरान 9 वर्षीय बच्ची की मौत हो गई थी। इस मामले में सोमवार को परिजन ने धरना दिया। डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए परिजन ने कलेक्टर कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। उन्होंने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। बच्ची के पिता के अनुसार, पिछले साल जुलाई में उन्होंने अपनी बेटी को जिला अस्पताल में भर्ती कराया था, जहां डॉ. सागरिया ने करीब 8 दिन तक उसका इलाज किया। इसके बाद डॉक्टर ने इसे सामान्य बीमारी बताकर छुट्टी दे दी, लेकिन बच्ची को आराम नहीं मिला। दिसंबर में पिता अपनी बेटी को इलाज के लिए अहमदाबाद ले गए। वहां के डॉक्टरों ने आगर जिला अस्पताल की रिपोर्ट देखने के बाद बताया कि बालिका की दोनों किडनियां खराब हो चुकी थीं। काफी इलाज के बाद भी फरवरी में बच्ची ने दम तोड़ दिया। डॉक्टर ने आरोपों को नकारा, सिविल सर्जन को सौंपी जांच दूसरी तरफ, डॉ. सागरिया ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि परिजन जब बालिका को लाए थे, तब उसे खून की कमी और ब्लड इन्फेक्शन था। उन्होंने तीन दिन इलाज कर छुट्टी दे दी थी। इसके बाद परिजन बालिका को किडनी की शिकायत होने पर दोबारा उनके पास लेकर नहीं आए। कलेक्टर ने क्या कहा? इधर, कलेक्टर ने सिविल सर्जन से जांच कराने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, इस संबंध में सिविल सर्जन मनीष कुरील से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। प्रशासन से निष्पक्ष जांच का आश्वासन मिलने के बाद भी धरने पर बैठे परिजन का कहना है कि जब तक जिम्मेदार डॉक्टर्स के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं होती और जवाबदेही तय नहीं की जाती, उनका आंदोलन जारी रहेगा।

Jul 13, 2026 - 14:37
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1 साल पहले बच्ची की मौत, परिजन का धरना शुरू:कहा- बेटी की किडनियां खराब थीं, फिर भी डॉक्टर ने डिस्चार्ज कर दिया
आगर-मालवा में जिला अस्पताल में एक साल पहले इलाज के दौरान 9 वर्षीय बच्ची की मौत हो गई थी। इस मामले में सोमवार को परिजन ने धरना दिया। डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए परिजन ने कलेक्टर कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। उन्होंने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। बच्ची के पिता के अनुसार, पिछले साल जुलाई में उन्होंने अपनी बेटी को जिला अस्पताल में भर्ती कराया था, जहां डॉ. सागरिया ने करीब 8 दिन तक उसका इलाज किया। इसके बाद डॉक्टर ने इसे सामान्य बीमारी बताकर छुट्टी दे दी, लेकिन बच्ची को आराम नहीं मिला। दिसंबर में पिता अपनी बेटी को इलाज के लिए अहमदाबाद ले गए। वहां के डॉक्टरों ने आगर जिला अस्पताल की रिपोर्ट देखने के बाद बताया कि बालिका की दोनों किडनियां खराब हो चुकी थीं। काफी इलाज के बाद भी फरवरी में बच्ची ने दम तोड़ दिया। डॉक्टर ने आरोपों को नकारा, सिविल सर्जन को सौंपी जांच दूसरी तरफ, डॉ. सागरिया ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि परिजन जब बालिका को लाए थे, तब उसे खून की कमी और ब्लड इन्फेक्शन था। उन्होंने तीन दिन इलाज कर छुट्टी दे दी थी। इसके बाद परिजन बालिका को किडनी की शिकायत होने पर दोबारा उनके पास लेकर नहीं आए। कलेक्टर ने क्या कहा? इधर, कलेक्टर ने सिविल सर्जन से जांच कराने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, इस संबंध में सिविल सर्जन मनीष कुरील से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। प्रशासन से निष्पक्ष जांच का आश्वासन मिलने के बाद भी धरने पर बैठे परिजन का कहना है कि जब तक जिम्मेदार डॉक्टर्स के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं होती और जवाबदेही तय नहीं की जाती, उनका आंदोलन जारी रहेगा।