उज्जैन में पीपल पर मचान बनाकर तप कर रहे...‘टाइगर बाबा’:23 घंटे रहते हैं पेड़ के ऊपर, चातुर्मास पूरा होने तक यहीं रहेंगे

उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच संतों ने भी अपनी-अपनी साधना शुरू कर दी है। इसी क्रम में श्री पंच दशनाम जूना अखाड़े के नागा साधु गणेशानंद सरस्वती महाराज पीपल के पेड़ पर मचान बनाकर चातुर्मास की साधना कर रहे हैं। भक्त उन्हें ‘टाइगर बाबा’ के नाम से जानते हैं। बारिश और मौसम की परवाह किए बिना बाबा विश्व शांति, राष्ट्र और जनकल्याण के लिए अनुष्ठान, जाप और यज्ञ कर रहे हैं। उज्जैन में इन दिनों सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के साथ संतों की अलग-अलग साधनाएं भी देखने को मिल रही हैं। कोई संत धूनी रमाकर साधना कर रहा है तो कोई खुले आसमान के नीचे तप कर रहा है। इन सबके बीच ‘टाइगर बाबा’ की साधना सबसे अलग नजर आ रही है। उज्जैन के नरसिंह घाट के पास श्री पंच दशनाम जूना अखाड़े के नागा साधु गणेशानंद सरस्वती महाराज ने पीपल के पेड़ के ऊपर मचान बना रखा है। बारिश के बीच भी बाबा इसी मचान पर रहकर चातुर्मास की साधना कर रहे हैं। उनका संकल्प चार महीने खुले में रहकर विश्व शांति और जनकल्याण के लिए अनुष्ठान करने का है। पेड़ और स्थान देखकर हुई सकारात्मक अनुभूति बाबा ने बताया कि उन्होंने यह स्थान पहले से तय नहीं किया था। यहां पहुंचने पर पेड़ और आसपास के स्थान को देखकर उन्हें सकारात्मक अनुभूति हुई। शुरुआत में उन्होंने नीचे बैठकर साधना की, लेकिन बाद में संकल्प लिया कि पूरा चातुर्मास इसी वृक्ष पर रहकर साधना करेंगे। बाबा के मुताबिक वे भोपाल के कोलार रोड स्थित संकटमोचन हनुमान मंदिर से जुड़े हैं और पिछले 10 से 15 वर्षों से उज्जैन आते-जाते रहे हैं। इस बार करीब 20 दिन से वे इसी मचान पर रहकर साधना कर रहे हैं। 24 घंटे में करीब 23 घंटे मचान पर बाबा की साधना की सबसे खास बात यह है कि वे 24 घंटे में करीब 23 घंटे मचान पर ही रहते हैं। करीब एक घंटे के लिए आवश्यक दैनिक क्रियाओं के लिए नीचे उतरते हैं। बारिश, तेज हवा और सांप जैसे जीवों के खतरे के बावजूद उनका कहना है कि संत अपने शरीर की चिंता नहीं करता। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपना शरीर बाबा महाकाल को समर्पित कर दिया है। बाबा के मुताबिक कुछ दिन पहले मचान के पास नाग भी आया था, लेकिन उन्हें इसका कोई भय नहीं है। उनका विश्वास है कि बाबा महाकाल ही उनकी रक्षा करते हैं। जाप, अनुष्ठान और यज्ञ कर रहे बाबा मचान पर रहते हुए बाबा लगातार जाप, अनुष्ठान और यज्ञ कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह तपस्या उनके लिए नहीं, बल्कि राष्ट्र, देश और सभी भक्तों के जनकल्याण के लिए है। भक्त उन्हें ‘टाइगर बाबा’ के नाम से भी जानते हैं। बाबा के मुताबिक यह नाम उन्हें भक्तों ने ही दिया है। चातुर्मास पूरा होने तक यहीं रहेंगे बाबा ने बताया कि चातुर्मास के दौरान वे इसी मचान पर रहेंगे। उनकी इच्छा है कि जीवन का अंतिम समय भी बाबा महाकाल की नगरी में ही बीते। उज्जैन से उनका वर्षों पुराना जुड़ाव है और क्षिप्रा नदी के घाट पर रहना भी वे अपने लिए सौभाग्य मानते हैं। सिंहस्थ 2028 के दौरान देशभर से श्रद्धालु और संत उज्जैन पहुंचेंगे। ऐसे में पीपल के पेड़ पर मचान बनाकर की जा रही बाबा की यह अनोखी साधना श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकती है।

Aug 14, 2026 - 08:31
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उज्जैन में पीपल पर मचान बनाकर तप कर रहे...‘टाइगर बाबा’:23 घंटे रहते हैं पेड़ के ऊपर, चातुर्मास पूरा होने तक यहीं रहेंगे
उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच संतों ने भी अपनी-अपनी साधना शुरू कर दी है। इसी क्रम में श्री पंच दशनाम जूना अखाड़े के नागा साधु गणेशानंद सरस्वती महाराज पीपल के पेड़ पर मचान बनाकर चातुर्मास की साधना कर रहे हैं। भक्त उन्हें ‘टाइगर बाबा’ के नाम से जानते हैं। बारिश और मौसम की परवाह किए बिना बाबा विश्व शांति, राष्ट्र और जनकल्याण के लिए अनुष्ठान, जाप और यज्ञ कर रहे हैं। उज्जैन में इन दिनों सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के साथ संतों की अलग-अलग साधनाएं भी देखने को मिल रही हैं। कोई संत धूनी रमाकर साधना कर रहा है तो कोई खुले आसमान के नीचे तप कर रहा है। इन सबके बीच ‘टाइगर बाबा’ की साधना सबसे अलग नजर आ रही है। उज्जैन के नरसिंह घाट के पास श्री पंच दशनाम जूना अखाड़े के नागा साधु गणेशानंद सरस्वती महाराज ने पीपल के पेड़ के ऊपर मचान बना रखा है। बारिश के बीच भी बाबा इसी मचान पर रहकर चातुर्मास की साधना कर रहे हैं। उनका संकल्प चार महीने खुले में रहकर विश्व शांति और जनकल्याण के लिए अनुष्ठान करने का है। पेड़ और स्थान देखकर हुई सकारात्मक अनुभूति बाबा ने बताया कि उन्होंने यह स्थान पहले से तय नहीं किया था। यहां पहुंचने पर पेड़ और आसपास के स्थान को देखकर उन्हें सकारात्मक अनुभूति हुई। शुरुआत में उन्होंने नीचे बैठकर साधना की, लेकिन बाद में संकल्प लिया कि पूरा चातुर्मास इसी वृक्ष पर रहकर साधना करेंगे। बाबा के मुताबिक वे भोपाल के कोलार रोड स्थित संकटमोचन हनुमान मंदिर से जुड़े हैं और पिछले 10 से 15 वर्षों से उज्जैन आते-जाते रहे हैं। इस बार करीब 20 दिन से वे इसी मचान पर रहकर साधना कर रहे हैं। 24 घंटे में करीब 23 घंटे मचान पर बाबा की साधना की सबसे खास बात यह है कि वे 24 घंटे में करीब 23 घंटे मचान पर ही रहते हैं। करीब एक घंटे के लिए आवश्यक दैनिक क्रियाओं के लिए नीचे उतरते हैं। बारिश, तेज हवा और सांप जैसे जीवों के खतरे के बावजूद उनका कहना है कि संत अपने शरीर की चिंता नहीं करता। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपना शरीर बाबा महाकाल को समर्पित कर दिया है। बाबा के मुताबिक कुछ दिन पहले मचान के पास नाग भी आया था, लेकिन उन्हें इसका कोई भय नहीं है। उनका विश्वास है कि बाबा महाकाल ही उनकी रक्षा करते हैं। जाप, अनुष्ठान और यज्ञ कर रहे बाबा मचान पर रहते हुए बाबा लगातार जाप, अनुष्ठान और यज्ञ कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह तपस्या उनके लिए नहीं, बल्कि राष्ट्र, देश और सभी भक्तों के जनकल्याण के लिए है। भक्त उन्हें ‘टाइगर बाबा’ के नाम से भी जानते हैं। बाबा के मुताबिक यह नाम उन्हें भक्तों ने ही दिया है। चातुर्मास पूरा होने तक यहीं रहेंगे बाबा ने बताया कि चातुर्मास के दौरान वे इसी मचान पर रहेंगे। उनकी इच्छा है कि जीवन का अंतिम समय भी बाबा महाकाल की नगरी में ही बीते। उज्जैन से उनका वर्षों पुराना जुड़ाव है और क्षिप्रा नदी के घाट पर रहना भी वे अपने लिए सौभाग्य मानते हैं। सिंहस्थ 2028 के दौरान देशभर से श्रद्धालु और संत उज्जैन पहुंचेंगे। ऐसे में पीपल के पेड़ पर मचान बनाकर की जा रही बाबा की यह अनोखी साधना श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकती है।