15 दिन बाद स्वस्थ हुए भगवान जगन्नाथ:रीवा में औषधियों और जड़ी-बूटियों से हुआ उपचार, 16 जुलाई को निकलेगी रथ यात्रा

रीवा के प्राचीन लक्ष्मणबाग संस्थान स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में सदियों पुरानी परंपरा के तहत रविवार को राजवैद्य ने भगवान जगन्नाथ का औषधियों और जड़ी-बूटियों से उपचार किया। धार्मिक मान्यता के अनुसार 15 दिनों के अनसर (अनवसर) काल के बाद भगवान स्वस्थ हो गए हैं। इसके साथ ही 16 जुलाई को निकलने वाली भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा और नगर भ्रमण की तैयारियां तेज हो गई हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार ज्येष्ठ पूर्णिमा पर महास्नान यात्रा के बाद भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा को ज्वर आ जाता है। इसी परंपरा के तहत 30 जून से मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए गए थे। इस दौरान राजवैद्य ने आयुर्वेदिक औषधियों, जड़ी-बूटियों और विशेष भोग के माध्यम से भगवान का उपचार किया। 16 जुलाई को निकलेगी रथयात्रा रविवार को उपचार की धार्मिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद भगवान को स्वस्थ घोषित किया गया। अब भगवान श्रद्धालुओं को दर्शन देंगे। 16 जुलाई को भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा सुसज्जित रथ पर विराजमान होकर नगर भ्रमण के लिए निकलेंगे। रथ यात्रा को लेकर मंदिर में विशेष सजावट की जा रही है और रथ को अंतिम रूप दिया जा रहा है। रीवा के प्राचीन लक्ष्मणबाग संस्थान स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में यह परंपरा वर्षों से निभाई जा रही है। रथ यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान का रथ खींचने और दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं। हल्का और औषधीय भोग लगाया जाता है मंदिर के मुख्य पुजारी ने बताया कि भगवान जगन्नाथ की यह परंपरा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि यह संदेश भी देती है कि प्रकृति के नियम सभी पर समान रूप से लागू होते हैं। भगवान को भी मानव स्वरूप मानकर उनकी सेवा, विश्राम और उपचार किया जाता है। अनसर काल में भगवान को हल्का और औषधीय भोग अर्पित किया जाता है तथा पूरे विधि-विधान से उनकी आरोग्यता की कामना की जाती है। यह परंपरा सदियों से बिना किसी बदलाव के चली आ रही है। उन्होंने बताया कि भगवान के स्वस्थ होने के बाद भक्तों में रथ यात्रा को लेकर विशेष उत्साह रहता है, क्योंकि इसी दिन भगवान स्वयं मंदिर से बाहर निकलकर अपने भक्तों के बीच आते हैं। रथ यात्रा में शामिल होकर भगवान के दर्शन करना अत्यंत शुभ और पुण्यदायी माना जाता है।

Jul 12, 2026 - 12:57
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15 दिन बाद स्वस्थ हुए भगवान जगन्नाथ:रीवा में औषधियों और जड़ी-बूटियों से हुआ उपचार, 16 जुलाई को निकलेगी रथ यात्रा
रीवा के प्राचीन लक्ष्मणबाग संस्थान स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में सदियों पुरानी परंपरा के तहत रविवार को राजवैद्य ने भगवान जगन्नाथ का औषधियों और जड़ी-बूटियों से उपचार किया। धार्मिक मान्यता के अनुसार 15 दिनों के अनसर (अनवसर) काल के बाद भगवान स्वस्थ हो गए हैं। इसके साथ ही 16 जुलाई को निकलने वाली भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा और नगर भ्रमण की तैयारियां तेज हो गई हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार ज्येष्ठ पूर्णिमा पर महास्नान यात्रा के बाद भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा को ज्वर आ जाता है। इसी परंपरा के तहत 30 जून से मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए गए थे। इस दौरान राजवैद्य ने आयुर्वेदिक औषधियों, जड़ी-बूटियों और विशेष भोग के माध्यम से भगवान का उपचार किया। 16 जुलाई को निकलेगी रथयात्रा रविवार को उपचार की धार्मिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद भगवान को स्वस्थ घोषित किया गया। अब भगवान श्रद्धालुओं को दर्शन देंगे। 16 जुलाई को भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा सुसज्जित रथ पर विराजमान होकर नगर भ्रमण के लिए निकलेंगे। रथ यात्रा को लेकर मंदिर में विशेष सजावट की जा रही है और रथ को अंतिम रूप दिया जा रहा है। रीवा के प्राचीन लक्ष्मणबाग संस्थान स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में यह परंपरा वर्षों से निभाई जा रही है। रथ यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान का रथ खींचने और दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं। हल्का और औषधीय भोग लगाया जाता है मंदिर के मुख्य पुजारी ने बताया कि भगवान जगन्नाथ की यह परंपरा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि यह संदेश भी देती है कि प्रकृति के नियम सभी पर समान रूप से लागू होते हैं। भगवान को भी मानव स्वरूप मानकर उनकी सेवा, विश्राम और उपचार किया जाता है। अनसर काल में भगवान को हल्का और औषधीय भोग अर्पित किया जाता है तथा पूरे विधि-विधान से उनकी आरोग्यता की कामना की जाती है। यह परंपरा सदियों से बिना किसी बदलाव के चली आ रही है। उन्होंने बताया कि भगवान के स्वस्थ होने के बाद भक्तों में रथ यात्रा को लेकर विशेष उत्साह रहता है, क्योंकि इसी दिन भगवान स्वयं मंदिर से बाहर निकलकर अपने भक्तों के बीच आते हैं। रथ यात्रा में शामिल होकर भगवान के दर्शन करना अत्यंत शुभ और पुण्यदायी माना जाता है।