साध्वी हर्षा बोलीं-कांवड़ की आड़ में नंगा नाच चल रहा:शराब-गांजा, अश्लील डांस से धर्म का मजाक बना रहे, नहीं रोका तो सिर पर चढ़कर नाचेंगे
मॉडल से साध्वी बनीं हर्षा रिछारिया (साध्वी हर्षानंद गिरि) एक बार फिर अपने बयानों को लेकर चर्चा में हैं। इंदौर विधायक गोलू शुक्ला की बाणेश्वरी कांवड़ यात्रा में शामिल होकर सनातन संस्कृति की तारीफ करने के चार दिन बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर कांवड़ यात्राओं में बढ़ रही कुरीतियों पर हमला बोला है। 4 दिन में तारीफ से तंज तक: क्या बोलीं साध्वी हर्षा? सरकार के सामने रखीं तीन मांगें- ‘नशा, डीजे और अश्लील डांस पर लगे बैन’ “कांवड़ उठाने की प्रथा भगवान परशुराम और रावण ने शुरू की थी। उस समय कांवड़ को श्रद्धा और समर्पण के साथ ले जाया जाता था, लेकिन अब हरिद्वार के हालात देखिए। पहले डीजे, फिर झांकियां, शराब की बोतलें खोलना और गांजे का इस्तेमाल। जैसे-जैसे साल आगे बढ़ रहा है। कांवड़ यात्रा में झांकियों के साथ डांस करने वालों को भी बुलाया जाने लगा है। उन्हें भगवान के गेटअप में रखा जाता है। कोई शिव बनता है। कोई पार्वती। इसके बाद डांस होता है। कई जगह बेहद अश्लील डांस भी देखने को मिलता है। मुझे यह देखकर शर्म आती है। क्या यही सनातन धर्म है? हम खुद अपने धर्म का मजाक बना रहे हैं। उसे नीचे गिरा रहे हैं। मेरा मानना है कि अब सरकार को इस दिशा में सख्त कदम उठाने की जरूरत है। सबसे पहले जो भी कांवड़िए नशा करते दिखाई दें, उनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए। नशे के साथ कांवड़ यात्रा नहीं हो सकती। ऐसे लोगों को कांवड़िए नहीं कहा जा सकता। दूसरा बड़ी-बड़ी झांकियों और तेज आवाज वाले डीजे पर रोक लगना चाहिए। तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण कांवड़ यात्रा की आड़ में होने वाले अश्लील डांस और ऐसे मंचों पर प्रतिबंध लगना चाहिए, जहां शिव-पार्वती का रूप धारण कर आपत्तिजनक प्रदर्शन किया जाता है। क्या इससे भगवान शिव और माता पार्वती की छवि और धार्मिक भावनाएं आहत नहीं होतीं? क्या धर्म के ठेकेदार और हमारे संतजन इस पर आवाज नहीं उठाएंगे? इन गतिविधियों पर रोक लगाना बहुत जरूरी है, अगर अभी कदम नहीं उठाया गया तो आने वाले वर्षों में यह प्रवृत्ति और बढ़ेगी। इसे रोकना मुश्किल हो जाएगा। मैं चाहती हूं कि ऐसी चीजों पर पूरी तरह रोक लगे। श्रद्धा, समर्पण और आस्था के साथ कांवड़ यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को आगे लाया जाए। उन्हें शांतिपूर्ण तरीके से कांवड़ यात्रा निकालने दी जाए, न कि इस तरह के प्रदर्शन करने वालों को।” (वीडियो में हरिद्वार से निकलने वाली कांवड़ यात्राओं की स्थिति का जिक्र किया गया है।) पहले संतों के आश्रम पर बयान से भी हुई थीं चर्चित इससे पहले गुरु पूर्णिमा के दौरान उज्जैन में हर्षा ने संतों के आश्रमों को लेकर टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि जो संत उनके आश्रम में रहने पर आपत्ति जता रहे हैं, उनके पास बड़े-बड़े आश्रम हैं, जबकि उनके पास रहने के लिए गुरु का आश्रम और माता-पिता का घर ही है। हर्षा ने लड़कियों की सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए कहा था कि जब तक उनका अपना ठिकाना नहीं है, तब तक गुरु के आश्रम में कुछ समय रहना और बाकी समय माता-पिता के घर पर रहना उन्हें उचित लगता है। उन्होंने यह भी कहा था कि यदि कोई संत उन्हें अपनी बेटी के समान मानकर आश्रम में 100 प्रतिशत सुरक्षा की गारंटी देता है तो वह वहां रहने के लिए तैयार हैं। आश्रम में पार्लर बुलाने का भी लगाया था आरोप हर्षा ने कुछ संतों पर आश्रम में पार्लर बुलाकर छिपकर मैनिक्योर-पेडिक्योर कराने का आरोप भी लगाया था। उनका कहना था कि जब धार्मिक परंपराओं में देवी-देवताओं को सुंदर स्वरूप में पूजा जाता है तो उनके पूजने वालों को भी साफ-सुथरा और सुंदर रहने का अधिकार है। इससे पहले दिए गए इन बयानों की तरह कांवड़ यात्रा को लेकर हर्षा की नई टिप्पणी भी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है। ------------------------------- यह खबर भी पढ़िए… पहली बार कांवड़ उठाकर बोलीं हर्षानंद-‘युवाओं की श्रद्धा देखने लायक कंधे पर कांवड़ और जुबां पर ‘बोल बम’... पहली बार कांवड़ यात्रा में शामिल हुईं हर्षानंद के लिए यह अनुभव सिर्फ धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि युवाओं की आस्था को करीब से देखने का अवसर भी रहा। गोलू शुक्ला की 24 साल पुरानी कांवड़ यात्रा के उज्जैन पहुंचने पर उन्होंने कहा कि यात्रा में युवाओं की श्रद्धा और एक-दूसरे के प्रति सहयोग का भाव देखने लायक है। पढ़ें पूरी खबर…
मॉडल से साध्वी बनीं हर्षा रिछारिया (साध्वी हर्षानंद गिरि) एक बार फिर अपने बयानों को लेकर चर्चा में हैं। इंदौर विधायक गोलू शुक्ला की बाणेश्वरी कांवड़ यात्रा में शामिल होकर सनातन संस्कृति की तारीफ करने के चार दिन बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर कांवड़ यात्राओं में बढ़ रही कुरीतियों पर हमला बोला है। 4 दिन में तारीफ से तंज तक: क्या बोलीं साध्वी हर्षा? सरकार के सामने रखीं तीन मांगें- ‘नशा, डीजे और अश्लील डांस पर लगे बैन’ “कांवड़ उठाने की प्रथा भगवान परशुराम और रावण ने शुरू की थी। उस समय कांवड़ को श्रद्धा और समर्पण के साथ ले जाया जाता था, लेकिन अब हरिद्वार के हालात देखिए। पहले डीजे, फिर झांकियां, शराब की बोतलें खोलना और गांजे का इस्तेमाल। जैसे-जैसे साल आगे बढ़ रहा है। कांवड़ यात्रा में झांकियों के साथ डांस करने वालों को भी बुलाया जाने लगा है। उन्हें भगवान के गेटअप में रखा जाता है। कोई शिव बनता है। कोई पार्वती। इसके बाद डांस होता है। कई जगह बेहद अश्लील डांस भी देखने को मिलता है। मुझे यह देखकर शर्म आती है। क्या यही सनातन धर्म है? हम खुद अपने धर्म का मजाक बना रहे हैं। उसे नीचे गिरा रहे हैं। मेरा मानना है कि अब सरकार को इस दिशा में सख्त कदम उठाने की जरूरत है। सबसे पहले जो भी कांवड़िए नशा करते दिखाई दें, उनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए। नशे के साथ कांवड़ यात्रा नहीं हो सकती। ऐसे लोगों को कांवड़िए नहीं कहा जा सकता। दूसरा बड़ी-बड़ी झांकियों और तेज आवाज वाले डीजे पर रोक लगना चाहिए। तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण कांवड़ यात्रा की आड़ में होने वाले अश्लील डांस और ऐसे मंचों पर प्रतिबंध लगना चाहिए, जहां शिव-पार्वती का रूप धारण कर आपत्तिजनक प्रदर्शन किया जाता है। क्या इससे भगवान शिव और माता पार्वती की छवि और धार्मिक भावनाएं आहत नहीं होतीं? क्या धर्म के ठेकेदार और हमारे संतजन इस पर आवाज नहीं उठाएंगे? इन गतिविधियों पर रोक लगाना बहुत जरूरी है, अगर अभी कदम नहीं उठाया गया तो आने वाले वर्षों में यह प्रवृत्ति और बढ़ेगी। इसे रोकना मुश्किल हो जाएगा। मैं चाहती हूं कि ऐसी चीजों पर पूरी तरह रोक लगे। श्रद्धा, समर्पण और आस्था के साथ कांवड़ यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को आगे लाया जाए। उन्हें शांतिपूर्ण तरीके से कांवड़ यात्रा निकालने दी जाए, न कि इस तरह के प्रदर्शन करने वालों को।” (वीडियो में हरिद्वार से निकलने वाली कांवड़ यात्राओं की स्थिति का जिक्र किया गया है।) पहले संतों के आश्रम पर बयान से भी हुई थीं चर्चित इससे पहले गुरु पूर्णिमा के दौरान उज्जैन में हर्षा ने संतों के आश्रमों को लेकर टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि जो संत उनके आश्रम में रहने पर आपत्ति जता रहे हैं, उनके पास बड़े-बड़े आश्रम हैं, जबकि उनके पास रहने के लिए गुरु का आश्रम और माता-पिता का घर ही है। हर्षा ने लड़कियों की सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए कहा था कि जब तक उनका अपना ठिकाना नहीं है, तब तक गुरु के आश्रम में कुछ समय रहना और बाकी समय माता-पिता के घर पर रहना उन्हें उचित लगता है। उन्होंने यह भी कहा था कि यदि कोई संत उन्हें अपनी बेटी के समान मानकर आश्रम में 100 प्रतिशत सुरक्षा की गारंटी देता है तो वह वहां रहने के लिए तैयार हैं। आश्रम में पार्लर बुलाने का भी लगाया था आरोप हर्षा ने कुछ संतों पर आश्रम में पार्लर बुलाकर छिपकर मैनिक्योर-पेडिक्योर कराने का आरोप भी लगाया था। उनका कहना था कि जब धार्मिक परंपराओं में देवी-देवताओं को सुंदर स्वरूप में पूजा जाता है तो उनके पूजने वालों को भी साफ-सुथरा और सुंदर रहने का अधिकार है। इससे पहले दिए गए इन बयानों की तरह कांवड़ यात्रा को लेकर हर्षा की नई टिप्पणी भी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है। ------------------------------- यह खबर भी पढ़िए… पहली बार कांवड़ उठाकर बोलीं हर्षानंद-‘युवाओं की श्रद्धा देखने लायक कंधे पर कांवड़ और जुबां पर ‘बोल बम’... पहली बार कांवड़ यात्रा में शामिल हुईं हर्षानंद के लिए यह अनुभव सिर्फ धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि युवाओं की आस्था को करीब से देखने का अवसर भी रहा। गोलू शुक्ला की 24 साल पुरानी कांवड़ यात्रा के उज्जैन पहुंचने पर उन्होंने कहा कि यात्रा में युवाओं की श्रद्धा और एक-दूसरे के प्रति सहयोग का भाव देखने लायक है। पढ़ें पूरी खबर…